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बुलंदी पर बेटियां

Lakhimpur

Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
इनसे जुड़ा परिवार का नाम, दिखा दिया हम किसी से कम नहीं
शिवकुमार गौड़
लखीमपुर खीरी। समाज में लड़के-लड़की के बीच भले ही भेदभाव हो रहा है। इसी भेदभाव के चलते कन्या भ्रूण हत्या जैसे घिनौने कृत्य को बल मिल रहा है, लेकिन लड़कियां अपनी लगन और मेहनत से अपने माता-पिता का नाम रोशन करने में लड़कों से बहुत आगे हैं। अपने शहर की कुछ लड़कियों ने उन बुलंदियों को छुआ है जहां तक लड़के अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं।
शहर की अमर बिहार कॉलोनी निवासी एमएस चौहान की तीन बेटियां राखी सिंह, रोली सिंह और रुचि सिंह वर्ष 1999 में कमीशन से सेना में अधिकारी चुनीं गईं। आज तीनों बहनें देश के अलग-अलग हिस्सों में सेना में मेजर के पद पर तैनात हैं, और देश की सेवा कर रहीं हैं। बेटियों की इस सफलता से जहां एमएस चौहान के परिवार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, वहीं जिले का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ। बेटियों की इस सफलता में कहीं न कहीं एमएस चौहान की भूमिका भी सराहनीय है। एमएस चौहान बताते हैं कि उनके एक बेटा भी है। वह भी सेना में अधिकारी है, लेकिन उन्होंने बेटियों को बेटे से कम नहीं माना। उनके मन में कभी यह बात नहीं आने दी कि वे लड़कियां हैं। एमएस चौहान बताते हैं उनका लड़का पहले सेना में अधिकारी बन गया था। एक दिन जब वह घर आया तो बेटियों से उसकी बहस होने लगी। बहस के दौरान उसने बहनों से कहा कि वह सेना का अधिकारी है, उससे सलीकेसे बात करें। बस क्या था बेटियों ने इसे चुनौती के रूप में लिया और लक्ष्य बनाकर शुरू कर दी तैयारी। अगले वर्ष तीनों एक साथ सेना में अधिकारी चुनी गईं। भाई भी उनकी इस कामयाबी पर खुश हुआ।
विश्व का यह पहला मामला था, जब तीन बहनें एक साथ सेना में अधिकारी के रूप में चुनीं गई थीं। तीनों बहनों राखी सिंह, रोली सिंह और रुचि सिंह का लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हुआ। इसके बाद यह तीनों बहनें देश के तमाम पत्र-पत्रिकाओं की सुर्खियों में आ गईं।
अब बात करते हैं पारुल चौहान की। लेखपाल प्रताप सिंह चौहान की बेटी पारुल चौहान अपने ही शहर की गलियों में खेली और पली-बढ़ी। आज पारुल चौहान की सफलता के चर्चे सिर्फ अपने जिले तक सीमित नहीं हैं। स्टार प्लस के धारावाहिक ‘विदाई’ में पारुल को काम मिला तो रागिनी की भूमिका में पारुल ने अपनी अभिनय क्षमता का वह जादू दिखाया कि आज पारुल छोटे पर्दे की सफल कलाकार मानी जाती है। इतना ही नहीं पारुल ने मायानगरी में अपने पैर जमाने के बाद अपने भाई को भी फोटोग्राफी के क्षेत्र में काम दिलाया। यह तो वे लड़कियां हैं जिन्होंने बुलंदियों को छुआ है। इनके अलावा तमाम ऐसी लड़कियां हैं जो सफलता के झंडे गाड़ने के लिए मंजिल की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहीं हैं। शहर के चिकित्सक धर्मेंद्र पालीवाल की बेटी इशिता पालीवाल अभी छोटी सी है, लेकिन कई टीवी चैनलों पर नृत्य के कार्यक्रमों में सफलता केझंडे गाड़ चुकी है।
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