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दरिद्र नारायण की सेवा में समर्पित ‘अन्नपूर्णा ’

Kushinagar

Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
पडरौना (कुशीनगर)। अपने पडरौना में भी एक अन्नपूर्णा हैं। बेहद गरीब। पति और बच्चे यजमानी कर घर का खर्च चलाते हैं लेकिन गरीबों का पेट भरने का जज्बा इस अन्नपूर्णा के अंदर इस कदर है कि हफ्ते भर नगर में भिक्षाटन कर राशन जुटाती हैं। हर शनिवार सुबह से शाम तक दहलीज पर आने वाले गरीबों को भोजन कराती हैं। इसमें उनको उनके पति और बच्चों का भी पूरा साथ मिल रहा है। पूरे नगर में वे भोजन कराने वाली मतवा के नाम से प्रसिद्धि पा चुकी हैं और अब गरीबों को दान देने की इच्छा रखने वाले शनिवार को उनकी दहलीज पर पहुंचकर गरीबों को दान करने लगे हैं।
गोपालगंज जिलांतर्गत कुचायकोट के रहने वाले रघुनाथ पांडेय उर्फ सुग्गा बाबा करीब 40 साल पहले अपनी पत्नी रेखा पांडेय के साथ पडरौना आ गए थे। यजमानी और लोगों का हाथ देखकर किसी तरह पेट पालने वाले सुग्गा बाबा बताते हैं कि 12 वर्षों पूर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रथमा को उन्होंने स्वप्न देखा था कि मृगचर्म लपेटे एक बालक उन्हें गरीबों को भोजन कराने का आदेश दे रहा था। बाबा सोच में पड़ गए कि जब अपना पेट भरने का ही इंतजाम नहीं है तो दूसरों को भोजन कैसे कराएं? सोच में डूबे पंडित जी को पत्नी रेखा पांडेय ने उबारा। तब से आज तक यह महिला रविवार से लेकर शुक्रवार तक घर-घर भिक्षाटन करती है और जो कुछ अनाज मिल जाता है उसे एकत्र करके शनिवार की सुबह भूखे गरीबों को पूरी श्रद्धा के साथ भरपेट भोजन कराती है। रेखा पांडेय बताती हैं कि शुरू में कुछ दिक्कत हुई लेकिन अब तो यह उनकी दिनचर्या में शामिल हो चुका है। दोनों बेटों को पढ़ा लिखा दिया है, घर में बहू भी आ गयी है। एक बेटा कथा वाचक है और दूसरा तीन विषय में एमए करके नौकरी की तलाश में है। लेकिन रेखा पांडेय का यह व्रत अनवरत चल रहा है। इस शनिवार को भी सुबह वह गरीबों को भोजन कराने में तल्लीन थीं। थोड़ी भीड़ कम हुई तो बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा। इन्होंने बताया कि अब तो हर शनिवार को उनके यहां सवा सौ से डेढ़ सौ तक लोग भोजन करने आते हैं। रात में दो बजे से उठकर पूरा परिवार भोजन बनाने में जुट जाता है। सुबह सात बजते-बजते भोजन तैयार हो जाता है। इसके बाद एक-एक करके गरीब जुटते जाते हैं और वे दरवाजे पर उन्हें बैठाकर खुद अपने हाथों से परोसकर प्रेम से भोजन कराती हैं। आसपास के लोगों के अलावा शहर के कुछ सहृदय लोग भी इस पुनीत कार्य में मदद करने लगे हैं। शनिवार को एक महिला अपने साथ कंबल लेकर आयी थीं। उन्होंने गरीबों को कंबल बांटा।
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