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किसान एक बार फिर मुश्किल में

Kushinagar

Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
पडरौना। जेएचवी शुगर मिल पडरौना के होम जोन में आने वाले 127 गांवों के 22000 गन्ना काश्तकार एक बार फिर मुश्किल में है। वजह यह कि बैंक का कर्जा चुकता न कर पाने के चलते मिल नीलाम होने के कगार पर है। अभी तक होम जोन का 16 लाख कुंतल गन्ना भी किसी को एलाट नहीं हुआ है।
पडरौना चीनी मिल वर्ष 1995-96 तक प्रदेश की सबसे अच्छी स्थिति वाली चीनी मिलों में शुमार थी। किंतु एक बार मिल की दशा बिगड़ी तो सुधरी नहीं। जनवरी 1998 में घाटे के चलते मिल बंद हो गई। कपड़ा मंत्रालय भारत सरकार के अधीन आने वाली इस मिल का मामला बीएफआईआर में पहुंचा। वर्ष 1999 में गंगोत्री इंटरप्राइजेज को मिल चलाने का अनुबंध मिला लेकिन केवल पूजा-पाठ तक ही मामला सीमित रहा। वर्ष 2001 में यहां के गन्ना किसानों और मिल मजदूरों ने छुछिया गेट पर नागा बाबा के नेतृत्व में आंदोलन कर दिया। आंदोलन हिंसक हो गया और पुलिस की फायरिंग में भुलन गुप्ता नामक युवक की मौत हो गई। मामले की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर हुई और तमाम बड़े नेता पडरौना पहुंचे। एक पखवारे तक मामला छाया रहा लेकिन कोई हल नहीं निकला। अंतत: वर्ष 2005 में जेएचवी शुगर मिल ने इस चीनी मिल को चलाने का अधिकार प्राप्त कर लिया। इस कंपनी ने मिल के जीर्णोद्धार का काम शुरू कराया और समय से पेराई सत्र भी शुरू हो गया। एक बार फिर पडरौना क्षेत्र के गन्ना किसानों की उम्मीदें बलवती हुईं लेकिन अगले ही साल से मिल को ग्रहण लगने लगा। कभी नो केन के चलते तो कभी पेराई सत्र देर से शुरू होने के नाते मिल हर सत्र में केवल कुछ गिनती के दिन चलने के बाद बंद होती रही। इस साल भी अभी तक मिल चलने की कोई उम्मीद नहीं है। इसी बीच, पंजाब नेशनल बैंक ने अपने बकाया धन की वसूली के लिए मिल को नीलाम करने का नोटिस भेज दिया। इसकी जानकारी होने के बाद किसान फिर हतप्रभ हैं। यहां यह बता दें कि पडरौना चीनी मिल की केन यूनियन से 170 गांव के 22000 किसान जुड़े हैं। केन यूनियन सूत्रों के अनुसार इस चीनी मिल पर किसानों का 25 करोड़ रुपये बाकी है। केन यूनियन को भी कमीशन मद में 82 लाख रुपये पाना है। पिछले साल इस चीनी मिल के होम जोन में 16 लाख कुंतल गन्ना था। इस साल भी इतना ही गन्ना किसानों के पास है। मिल का होम जोन होने के नाते अभी तक यह गन्ना किसी और मिल को एलाट नहीं है। चीनी मिल के चलने की संभावना भी नगण्य है। ऊपर से मिल नीलाम होने की खबर से किसान और कर्मचारी दोनों सन्न हैं।

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