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बिना हाजिरी कर रहा था काम

Kushinagar

Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
रामकोला। विपणन विभाग के रामकोला गोदाम पर मंगलवार को बोरियों से दबकर मरने वाला पल्लेदार वहां उपस्थित ही नहीं था। यह पढ़ने में अटपटा जरूर लग रहा है, लेकिन है सच्चाई। वहां मजदूर के रूप में उसकी कोई हाजिरी नहीं बनी है। कारण यह कि रजिस्टर नहीं है। विभागीय लापरवाही की वजह से बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ही ठेकेदार के साथ वह काम कर रहा था। यदि नियमों का पालन किया गया होता तो शिवशरण के परिवार को ताउम्र तकलीफ नहीं झेलनी पड़ती।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को रामकोला एसएमआई गोदाम से राशन की निकासी करते समय गोदाम के अंदर बोरियों के भरभराकर गिरने के कारण दो पल्लेदार साधु और शिवशरण दब गये। इलाज के लिए लेकर जाते समय शिवशरण की मौत हो गई। इस मौत ने गोदाम पर चल रही लोडिंग-अनलोडिंग की पूरी व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। विभागीय सूत्रों की मानें तो यहां ठेका बिना किसी मानक के पूरा किए ही चल रहा है। नियमानुसार लेबर सप्लाई या अन्य कोई जोखिम भरा कार्य कराने के पहले ठेकेदार को श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। मजदूरों की संख्या पर कर्मचारी बीमा योजना के तहत बीमा कराया जाता है। यही नहीं यदि लेबर 30 दिनों तक लगातार काम पर आता है तो उसका पीएफ भी कटवाना ठेकेदार की जिम्म्ेादारी होती है। इसके लिए नियम है कि कार्य स्थल पर ही हाजिरी रजिस्टर भरा जाना चाहिए। कार्य स्थल पर ठेकेदार की तरफ से एक सुपरवाइजर का होना भी आवश्यक होता है। सुपरवाइजर कोई विषम परिस्थति आने पर मजदूर की मदद करेगा। मंगलवार को रामकोला के एसएमआई गोदाम पर जब मजदूर के साथ दुर्घटना हुई, उस वक्त वहां लोडिंग-अनलोडिंग का ठेका लिए लोगों या उनके कर्मचारी का कोई पता नहीं था। यदि कोई होता तो समय से मजदूर को अस्पताल पहुंचा देता और उसकी जान बच जाती। सूत्र बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों से यह ठेका बिना कागज वाले उसी ठेकेदार के पास है। मजदूर शिवशरण अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसका बड़ा बेटा तिलकधारी अभी 16 वर्ष तथा छोटा बेटा गिरधारी 5 वर्ष का ही है। इस परिवार के पास रोटी का संकट आ गया है। यदि लेबर बीमा हुआ होता तो शिवशरण की विधवा और उसके अनाथ हुए बच्चों को जीवन यापन के लिए कुछ मिल भी जाता। इस संबंध में डिप्टी आरएमओ रूपेश सिंह का कहना है कि लेबर इंस्पेक्टर को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा जाएगा। इसकी विभागीय जांच भी करायी जाएगी।
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