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घाटे का सौदा हो गई है गन्ने की खेती

Kushinagar

Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
रामकोला। डीजल और उर्वरक मूल्य वृद्धि से गन्ने की लागत बढ़ गई है। गन्ना किसानों पर इससे महंगाई की मार तो पड़ी है, बढ़ती मजदूरी ने भी इनकी कमर तोड़ दी है। पिछले सात सालों में जिस दर से महंगाई बढ़ी है, उस हिसाब से गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसी कारण किसानों के लिए गन्ने की खेती भी घाटे का सौदा साबित होने लगी है।
प्रदेश में सबसे अधिक चीनी परता देने वाले जिले के गन्ना किसानों की हालत दयनीय होती जा रही है। इसके पीछे बढ़ती महंगाई और गन्ने का लाभकारी मूल्य किसानों को न मिलना प्रमुख कारण है। पिछले सात वर्षों के गन्ने के इतिहास पर नजर डाली जाय तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। जनवरी 2005 में डीजल 26.28 रुपये लीटर था। उस समय किसानों को एक बोरी डीएपी खाद 473.40 रुपये में मिल जाती थी। एक बोरी यूरिया के लिए किसानों को 256 रुपये खर्च करने पड़ते थे। मजदूर भी 30 रुपये रोज पर आसानी से मिल जाते थे। वर्ष 2004-05 के सीजन में गन्ने का मूल्य अगेती प्रजाति का 112 रुपये कुंटल तथा सामान्य प्रजाति का 107 रुपये कुंटल था। इसी प्रकार वर्ष 2005 के सितंबर में डीजल 30.45 रुपये लीटर हो गया। डीएपी 274 तथा यूरिया 256 रुपये बोरी मिलती थी। मजदूरों की मजदूरी 40 रुपये हो गई। लेकिन गन्ने का मूल्य 120 और 115 रुपये कुंटल ही रहा। 2010 आते आते डीजल 37.71 रुपये लीटर हो गया। डीएपी का दाम भी आसमान छूने लगा। डीएपी 502.50 रुपये तथा यूरिया 278.50 रुपये बोरी बिकने लगी। खेतिहर मजदूरों की मजदूरी 100 रुपये हो गई। जबकि 2010-11 के सीजन में गन्ना 210 व 205 रुपये प्रति कुंटल ही मिला। पिछले वर्ष 2011-12 के पेराई सत्र के लिए किसानों ने डीजल 40.91 रुपये लीटर खरीदा तो डीएपी भी 911 रुपये बोरी मिली। एक बोरी यूरिया खरीदने के लिए किसानों को सरकारी दुकानों पर 296.98 रुपये खर्च करने पड़े। इस सत्र में किसानों को मजदूरों की मजदूरी के लिए 125 रुपये देने पड़े। जबकि गन्ने का दाम 250 व 240 रुपये कुंटल रहा। इस पेराई सत्र के लिए किसानों को 40 से 50 रुपये लीटर डीजल खरीदना पड़ा। डीएपी और यूरिया की कीमतों का अंदाजा इसलिए नहीं लगाया जा सकता है कि खाद सरकारी दुकानों पर मिली ही नहीं, प्राइवेट दुकानदारों ने डीएपी के लिए 1000 से 1200 रुपये बोरी तक वसूला, जबकि एक बोरी यूरिया 400 से 500 रुपये में बिकी। इस सत्र में किसानों ने 150 रुपये दिहाड़ी देकर मजदूरों से काम करवाया।
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