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पारंपरिक तरीके से की गोवर्धन पूजा

Kushinagar

Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
पडरौना। बृहस्पतिवार को जिले में गोवर्धन पूजा और भैया-दूज का त्योहार पारंपरिक रूप से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। लड़कियों और महिलाओं ने सुबह गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया और दोपहर बाद मूसल से कूटकर भाइयों के दीर्घायु होने की कामना की। इस त्योहार के साथ ही मांगलिक कार्य भी प्रारंभ हो जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को गोवर्धन पूजा होती है। इस त्योहार के पीछे कई किंवदंतियां प्रचलित हैं। मान्यता है कि छह माह से सो रहे भगवान विष्णु गोवर्धन पूजा के दिन ही निद्रा का त्याग करते हैं। इसीलिए इन छह महीनों में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होते। परंतु गोवर्धन पूजा के बाद से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। दीपावली के दूसरे दिन पड़ने वाले इस त्योहार को भैया-दूज के रूप में भी जाना जाता है। बृहस्पतिवार को सुबह लड़कियों और महिलाओं ने परंपरानुसार सुबह गांव में सार्वजनिक स्थानों पर समवेत रूप से गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया। दोपहर बाद लड़कियों और महिलाओं ने उठहू हे देव उठहू, सुतले भईल छह मास..का पारंपरिक गीत गाते हुए गोवर्धन की मूसल से कुटाई करके भाइयों के दीर्घायु होने की कामना की।

देवराज इंद्र का घमंड तोड़ा था
तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में भी गोवर्धन पूजा और भैया दूज का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पंडित संतोष पाठक के मुताबिक द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने इंद्र का घमंड चूर करने के लिए गोवर्धन पूजा करने की सलाह दी थी। इससे नाराज देवराज इंद्र ने घनघोर वर्षा शुरू कर दी। ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई थी। बृहस्पतिवार को इलाके के राजपुर, मिश्रौली, पिपराघाट, परसा, पिरोजहां, ब्रह्मपुर, दुबौली, घघवा जगदीश, पकड़ीहार समेत क्षेत्र के सभी गांवों में गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया गया।

रेंगनी के काट का विशेष महत्व
तमकुहीरोड। गोवर्धन पूजा में रेंगनी के काट का विशेष महत्व होता है। इस पूजा में भाग लेने वाली महिलाएं और लड़कियां रेंगनी के काट को उपला पर रखकर अपने भाइयों को शाप देकर मारती हैं। पुन: उसी से उन्हें शापमुक्त कर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। साल में सिर्फ एक बार इस रेंगनी के काट को खोजना पड़ता है, जो प्राकृतिक वनस्पति के महत्व को दर्शाता है।
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