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बिना पार्किंग के कांप्लेक्स भी बढ़ा रहे समस्या

Kushinagar

Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
पडरौना। शायद ही पडरौना का कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पिछले कुछ वर्षों से 24 घंटे में कम से कम एक बार जाम का शिकार न बना हो। पडरौना शहर में आने-जाने और रहने वालों के लिए जाम स्थायी समस्या बन गई है। लगातार विकराल होती इस समस्या से शहर का कोई हिस्सा अछूता नहीं है। हालांकि, शासन प्रशासन कई बार शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रयास कर चुका है, लेकिन हर बार चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत चरितार्थ होती दिखती है। अमर उजाला ने शनिवार को शहर का जायजा लिया। पेश है शहर की इस समस्या पर प्रकाश डालने वाली रिपोर्ट की पांचवीं कड़ी...।
इनसेट
तंग गलियों और चौड़े मार्गों में अंतर नहीं
विकास के पायदान पर ऊपर चढ़ने की होड़ ने शहर की तस्वीर बिगाड़ दी है। जिम्मेदारों की उदासीनता से शहर में व्यावसायिक उपयोग के लिए विशालकाय भवनों और कटरों का निर्माण तो होता गया, लेकिन नियम कानून की धज्जियां उड़ा कर। दूरदर्शिता के अभाव में विकास की रफ्तार कुछ ऐसी हुई कि पूरा शहर जाम के कारण ठहरा नजर आने लगा है। विद्रुप यह कि आम आदमी के भवन निर्माण समय कई तरह की कठिनाइयां उत्पन्न करने वाले मास्टर प्लान के जिम्मेदारों की देखरेख में ही ऐसे व्यावसायिक उपयोग के भवनों को मंजूरी दे गई, जहां पार्किंग स्थल ही नहीं है। शहर में शायद ही कोई ऐसा व्यावसायिक कांप्लेक्स या भवन दिखेगा, जहां उसका अपना पार्किंग स्थल हो। शुरुआत करते हैं कि नगर के व्यस्तम कहे जाने वाले धर्मशाला रोड से। इस मार्ग पर गिनती करनी शुरू कर दी जाए तो तीन से चार बडे़ कटरे और कई ऐसे व्यावसायिक भवन दिखते हैं, जहां दुकानों के अलावा कई बडे़ बैंकों की शाखाएं हैं। इन भवनों और कटरों के सामने लगे ग्राहकों या अन्य लोगों के दो पहिया और चार पहिया वाहन सुगम यात्रा में बाधक बनते हैं। यही हाल कोतवाली रोड से लेकर नगर के तिलक चौक तक की है। विकसित हो रहे शहर में सुव्यवस्थित विकास की जिम्मेदारी जिन हाथाें को दी गई, वे अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा सके हैं। व्यावसायिक अट्टालिकाएं खड़ी हो गईं, जो सड़कों पर लगने वाले जाम की कहानी कह रही हैं। स्थिति यह है कि व्यावसायिक भवनों के आसपास सड़कों पर खड़ी गाड़ियों की वजह से चौड़ी सड़क और तंग गली में कोई अंतर ही नहीं रह गया है।
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क्या कहता है कानून
कानूनविद् जगदीश चंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि नियमानुसार किसी भी व्यावसायिक भवनों के निर्माण या उपयोग की इजाजत बिना पार्किंग स्थल के नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके लिए गाइड लाइन दी है। श्रीवास्तव बताते हैं कि न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश के साथ इसके लिए डीएम, ट्रैफिक विभाग एवं नगर निकायों को जिम्मेदार बनाया है। सुगम यात्रा नागरिक के मौलिक अधिकारों की एक कड़ी है।
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