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अब सामान्य होने लगा है माहौल

Kushinagar

Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
बड़हरागंज। बृहस्पतिवार की रात हुए तनाव के चलते अशांत हुए बड़हरागंज में अब स्थिति सामान्य होने लगी है। शनिवार को बाजार की सभी दुकानें खुलीं और बड़हरागंज के अलावा अगल-बगल के ग्रामीण भी बाजार पहुंचे। गांव में लगाई गई फोर्स भी कम हो गई है। अब केवल एहतियात के तौर पर एक दर्जन पुलिस कर्मी और एक कंपनी पीएसी को गांव में रोका गया है।
बृहस्पतिवार की रात पडरौना कोतवाली के गांव बड़हरागंज में मिनहाज और राकेश के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों पक्षों में जबरदस्त तनाव की स्थिति बन गई थी। रात में ही कोतवाली प्रभारी के अलावा सीओ और एडिशनल एसपी मौके पर पहुंचे। शुक्रवार को गांव में नेबुआ नौरंगिया, हनुमानगंज और विशुनपुरा के थानेदार तथा दो कंपनी पीएसी व क्यूआरटी टीम को भी गांव में भेजा गया। एएसडीएम भी मौके पर पहुंचे। दिन भर चली प्रशासनिक कवायद के बाद धीरे-धीरे विवाद शांत होने लगा। शनिवार की सुबह बाजार का माहौल काफी सामान्य दिखा और चहल-पहल नजर आने लगी। दिन के 09 बजे तक सभी छोटी-बड़ी दुकानें खुल गईं। बड़हरागंज के अलावा आसपास के ग्रामीण भी बाजार पहुंचे। बाजार के खेल मैदान पर भी रौनक लौटी और बच्चों ने क्रिकेट खेला। माहौल सामान्य दिखने के बाद क्यूआरटी और दो कंपनी पीएसी वापस बुला ली गई। हालांकि अभी भी एहतियात के तौर पर एक कंपनी पीएसी और करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों को गांव में रोका गया है।

मुश्किल में हैं पीएसी के जवान
बड़हरागंज। विवाद के बाद गांव में लगाए गए पीएसी के जवान बड़ी मुश्किल में हैं। जवानों कोे गांव के पंचायत भवन परिसर में रखा गया है, जहां न बिजली है और न ही पानी। शौचालय की समस्या से भी पीएसी जवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ जवानों का कहना रहा कि मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है।
बहुत याद आ रहे हैं ये लोग
पिपरा बाजार। त्योहार आते ही विवाद की आशंका से संवेदनशील हो जाने वाले बड़हरागंज के लोगों को अब स्वर्गीय मंगल लाला, गब्बू मियां और मौलाना सईदुज्जमा की बहुत याद आती है। ग्रामीणों के अनुसार इन लोगों के रहते विवाद या तनाव की नौबत बहुत कम ही आई। वजह यह कि न सिर्फ ये लोग एक दूसरे के त्योहारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे, बल्कि किसी भी विवाद को बातचीत और भाईचारा के आधार पर हल कराते थे। ग्रामीणों का कहना है कि ये लोग गलती करने वालों को डांट-फटकार कर मामले को बिगड़ने से बचा लेते थे। इससे हमेशा गांव में अमन-चैन का माहौल बना रहता था।
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