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भारी बारिश से गंडक के जलस्तर में उफान

Kushinagar

Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
खड्डा। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंडक नदी के जलस्तर में जबरदस्त उछाल आ गया है। नदी खतरे के निशान से कुछ ही नीचे बह रही है। मंगलवार को दिन में दो बजे नदी खतरा बिंदु छूने के करीब पहुंच गयी थी। हालांकि शाम चार बजे यह कुछ नीचे खिसकी है। लेकिन इस हालात के बीच छितौनी बांध को बचाने के लिए किये गये उपायों की कलई भी खुल गई है। बंधे पर जगह-जगह रेनकट्स हो गये हैं। लोगों का कहना है कि यदि अचानक कोई बचाव कार्य शुरू कराना पड़ा तो जमीनी मार्ग नहीं बल्कि पत्थर गिराने के लिए हवाई मार्ग का ही सहारा लेना पड़ेगा।
सोमवार की शाम को नदी के जलस्तर में भारी इजाफा हुआ था। वाल्मीकिनगर बैराज पर ढाई लाख क्यूसेक से अधिक डिस्चार्ज होने के कारण रात नौ बजे नदी 95.55 मीटर पर बही, जबकि नदी का खतरा बिंदु 96 मीटर है। मंगलवार को दिन में दो बजे जलस्तर फिर बढ़ा और नदी 95.85 मीटर के उच्चतम जलस्तर तक पहुंच गई। हालांकि शाम चार बजे यह खिसककर 95.79 पर आ गई थी। मंगलवार की शाम पांच बजे वाल्मीकिनगर बैराज पर तीन लाख चार सौ क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज था जो इस वर्ष का सर्वाधिक डिस्चार्ज है। इससे गंडक के जलस्तर में भारी इजाफा होने की बात कही जा रही है क्याेंकि वाल्मीकिनगर से भैंसहा गेज स्थल पर पानी के आने में करीब आधे घंटे लग जाते हैं।
बीते 12 सितंबर से शुरू हुई बरसात एक सप्ताह में 400 मिलीमीटर पानी बरसा चुकी है। जबकि सितंबर माह में 11 तारीख तक महज 2.8 मिमी बारिश ही हुई थी। 12 सितंबर को 32, 13 को 144.8, 14 सितंबर को 2.2, 15 को 65.2, 16 को 14.8, 17 को 19.8 व 18 को 115.4 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गयी है। इसी क्रम में नेपाल की पहाड़ियों में भारी बारिश के कारण 18 सितंबर को वाल्मीकिनगर में 179.0 मिमी बारिश रिकार्ड हुई है, जिसके कारण नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है।
बाढ़ से लोगों को बचाने के लिए दो साल पहले ही छितौनी बांध को डेढ़ मीटर ऊंचा तथा गांव की ओर दो मीटर चौड़ा किया गया था। परंतु देखरेख के अभाव में मदनपुर गांव के पास नदी के किमी 6.800 तक खूब रेनकट्स बन गये हैं। 6.8 से भैंसहा मंदिर के पास किमी 8.000 तक बड़े गड्ढे बन गये हैं, तो भैंसहा गेजस्थल 8.800 किमी तक किसी भी दशा में चार पहिया वाहन नहीं गुजर सकते। यही नहीं बंधे पर चढ़ने के लिए हनुमानगंज गांव के पास बना ढाला बारिश के पानी से कट गया है। लोगों का कहना है कि अगर आपात स्थिति में बंधे पर बचाव कार्य कराना पड़ा तो किस तरफ से पत्थर आदि ले जाए जाएंगे?
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