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लोक का कर्तव्य है पर्यावरण संरक्षण

Kushinagar

Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
पडरौना। पर्यावरण संरक्षण लोक का कर्तव्य है। पर्यावरण क्षति का प्रभाव व्यापक है। अगर हमने प्रकृति के स्वरूप को बिगाड़ा तो आने वाली पीढ़ियां इसका दुष्परिणाम भुगतेंगी। ये बातें पूर्व प्रधानाचार्य पंडित केदारनाथ मिश्र ने कहीं।
शनिवार को ओजोन संरक्षण दिवस के पूर्ववर्ती दिवस पर आयोजित पर्यावरण गोष्ठी को वह बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उदित नारायण पीजी कालेज के भूगोल विभाग की ओर से आयोजित गोष्ठी में मिश्र ने कहा कि पेड़ लगाकर दुनिया के सबसे बडे़ दानी हो सकते हैं। एक पेड़ 15.70 लाख रुपये से अधिक देता है। पूर्व विभागाध्यक्ष डा. केएस सिंह ने कहा कि अगर प्रकृति एवं मनुष्य के बीच सामंजस्य नहीं होगा तो उसके तमाम दुष्प्रभाव होंगे। पर्यावरण क्षरण से ग्लेशियर पिघल रहे हैं। महासागरों से घिरे कई देश खतरे में हैं। अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डा. सीबी सिंह ने कहा कि प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार का नतीजा हम सबके सामने है। ध्रुवीय क्षेत्रों में हलचल हो रही है। जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है। कहा कि जीवन पद्धति में बदलाव लाना होगा। दोहन कम करना होगा। डा. सिंह ने कहा कि जबतक सह अस्तित्व की जीवन पद्धति नहीं अपनाई जाएगी, तब तक पृथ्वी के ऊपर खतरा मंडराता रहेगा। संचालन डा. सरिता सिंह ने किया। डा. संजय सिंह ने आभार जताया। नूतन मिश्रा, आराधना राय, प्रीति मिश्रा, कल्याणी तिवारी ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। प्रियंका गुप्ता ने माता-पिता पर कविता सुनाया। प्रवक्ता अमिता तिवारी, प्रवक्ता रणजीत मल्ल, सहायक रामनरेश, शाहिन, शालिनी, आदि मौजूद थे।
इनसेट
क्या होता है ओजोन ?
ओजोन पृथ्वी के आवरण के रूप में काम करती है। यह स्ट्रेटोस्फियर के किलोमीटर 16 से 32 तक के मध्य सुरक्षा कवज के रूप में मौजूद रहती है। भूगोल विभाग के प्रवक्ता डा. संजय सिंह ने बताया कि ओजोन गैसें पृथ्वी पर आने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकती है। ओजोन गैसों का सर्वाधिक निर्माण विषुवतरेखीय क्षेत्रों के ऊपर स्थित वायुमंडल में होता है। वहां पर ओजोन की मोटी परत पाई जाती है। चूंकि उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में प्रदूषण की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसका निर्माण और प्रसार भी प्रभावित हो रहा है। डा. सिंह ने बताया कि यही कारण है कि अंटार्कटिका क्षेत्र के ऊपर इसके आवरण में गैप आ गया है। इसे ओजोन छिद्र के नाम से जाना जाता है।
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