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आकाश से बरसी राहत, नहरें भी कलकलाईं

Kushinagar

Updated Sat, 07 Jul 2012 12:00 PM IST
पड़रौना। सूखे की आशंका से मुरझाए किसानों के चेहरों से चिंता की लकीरें मिटने लगी हैं। किसानों के लिए एक तरफ आसमान से झमाझम राहत टपका तो नहरों में भी फसलों के लिए अमृत की धारा बहने लगी। बृहस्पतिवार की रात शुरू हुई बरसात ने देर से ही सही किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है। किसानों के लिए इस बरसात ने संजीवनी का काम किया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय की बारिश लाभदायक तो है लेकिन यदि दस दिनों पूर्व बारिश शुरू हुई होती तो इतना नुकसान नहीं होता।
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अब तक बारिश न होने से हुआ नुकसान
भीषण गर्मी और आसमान से बरस रहे अंगारो के चलते जमीन की नमी समाप्त हो गई थी। वहीं वायुमंडल से आर्र्दता भी गायब हो चली थी। धान की फसल के लिए उसके तीनों अवस्थाओं टिलरिंग, रेणा और जब बालियों में दाना आए तब खेत में नमी एवं मौसम में आर्द्रता का होना बहुत जरूरी है। कुशीनगर जनपद की अधिकतर जमीन लो लैंड हैं। यहां के किसान धान की रोपाई पहले इसलिए कर देते हैं कि बरसात शुरू होने के पहले उनके धान के पौध में टिलरिंग हो जाए। भूतपूर्व कृषि अधिकारी बच्चा सिंह बताते हैं कि इस इलाके के लिए बरसात कम से कम दस दिन विलंब से शुरू हुई है, जिससे किसानों को धान की फसलों के अलावा गन्ने की फसल में भी दस से पंद्रह फीसदी का नुकसान हो चुका है।
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दस दिन पहले होती बारिश तो ...
कुशीनगर इलाके में धान की रोपाई के लिए 15 जून से सात जुलाई तक समय उपयुक्त माना जाता है। लेकिन लो लैंड एरिया के किसान धान की रोपनी का कार्य 30 जून तक ही समाप्त कर देते हैं। यदि यह बरसात 10 दिन पूर्व हो गई होती तो किसानों को पानी चलाने में खर्च भी नहीं करना पड़ता और उनके पौधे में टिलरिंग भी शुरू हो गई होती। यही नहीं गन्ने की फसल भी अब तक काफी बढ़ चुकी होती।
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यदि बरसात दस दिन बाद होती तो
पूर्व कृ षि अधिकारी बच्चा सिंह बताते हैं कि यदि यह बरसात दस दिनों बाद शुरू हुई होती तो गन्ने की फसल को काफी क्षति हो जाती। क्योंकि गन्ने की फसल में बढ़ाव बरसात शुरू होने के बाद ही होता है। यदि बरसात दस दिनों बाद होती तो गन्ने की फसल को 50 फीसदी तक का नुकसान हो जाता। इसी प्रकार धान की फसल में दस दिन बाद बरसात होने से किसानों को प्रति वर्ग मीटर लगाए जाने वालों पौध की संख्या बढ़ जाती। धान के बेहन 40 दिनों से अधिक के हो जाते, जिससे न केवल उन पौध का विकास रुक जाता बल्कि उन पौधाेें की बालियां छोटी होने के साथ-साथ उनमें दानों की संख्या भी कम हो जाती।
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लगातार होने लगी बरसात तो
यदि बरसात लगातार होने लगी तो निचली जमीनों में पानी लग जाएगा, जिससे धान के पौध गल जाएंगे। गन्ने की फसलों जिनकी टाप ड्रेसिंग नहीं हुई है उनके बढ़त पर भी असर पड़ेगा।
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बंद हो गई बरसात तो
तपती धरती को जो संजीवनी रूपी बारिश की बूंदे मिली हैं। यदि इस बारिश के बाद एक लंबे अंतराल के लिए बारिश बंद हो जाएगी तो जमीन की नमी के साथ-साथ मौसम से आर्र्दता भी चली जाएगी, जिससे गन्ने की फसल का बढ़ना बंद हो जाएगा। गन्ने में मुड़िया रोग का प्रभाव तेज हो जाएगा।
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किसान अब क्या-क्या करें
लगभग दस दिन देर से शुरू हुई बरसात के बाद जिन किसानों को अब धान की रोपाई करनी हो तो उन्हें चाहिए कि वे प्रति वर्ग मीटर 40 के जगह 50 धान के पुर्जे लगाएं और यह ध्यान रखें कि प्रति पुर्जों में चार से पांच धान के पौधे जरूर हों। यही नहीं किसानों को यह भी ध्यान रखना होगा बेहन के उन पौधों को न लगाएं जो काफी मोटे हो गए हों। ठीक इसी प्रकार किसानों को गन्ने की फसल की टाप ड्रेसिंग भी करा देनी चाहिए।
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