आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

...तो कौन बनाएगा लक्ष्मी की पूजा के दीप

Kaushambi

Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
मंझनपुर। वह दिन भी दूर नहीं, जब दीपों के पर्व यानी दीपावली पर मिट्टी के दीप जलाने को नहीं मिलेंगे। क्योंकि लक्ष्मी की पूजा के दीप बनाने वाले कुम्हार आर्थिक तंगी का शिकार हैं और मिट्टी के बर्तन बनाना छोड़कर रोजी-रोटी के इंतजाम में घर छोड़कर शहर जाने को मजबूर हैं। दिनभर हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी उन्हें मिट्टी के बर्तन, दीपक, खिलौना आदि बेचने पर उसकी लागत-दिहाड़ी भी नहीं मिल पा रही है।
मिट्टी के कलाकार धीरे-धीरे अपना पुश्तैनी धंधा कच्ची मिट्टी के बर्तन बनाने का काम छोड़ते जा रहे हैं। मिट्टी नहीं मिलने और मेनहत के बाद भी कमाई नहीं होने के कारण कुम्हारों ने चाक चलाना बंद कर दिया है। दीपों के पर्व से पहले कुम्हारों के गांव में सन्नाटा इसकी बानगी है। बता दें कि अमावस की रात लक्ष्मी की पूजा के लिए पहले कुम्हार महीनेभर से कच्ची मिट्टी के दीपों को बनाने, सूखाकर पकाने और उसे घर-घर पहुंचाकर कमाने का काम करते थे। लेकिन, बदलते समय के साथ जहां बिजली की रंगबिरंगी लड़ियों, इलेक्ट्रिक दिए और मोमबत्ती से लोग दीपावली की रात घरों को रोशन करने लगे हैं, वहीं मिट्टी, ईधन नहीं मिलने और मेहनत मुताबिक मेहनताना नहीं मिलने से कुम्हार परेशान हैं। मंझनपुर तहसील के समदा गांव में मिट्टी के बर्तन बनाकर जीविका चलाने वाले सिपाही लाल बताते हैं कि तीज-त्यौहार और गरमी में सुराही, घड़े के अलावा अब मिट्टी के बर्तन की कोई पूछ नहीं है। बस चाय के कुल्हड़ ही बिक पाते हैं। इसकी भी कीमत लागत, मेहनत से कम मिलती है। बताया कि इसी से परेशान होकर उसके दो भाई पुश्तैनी कामधंधा छोड़कर मुंबई कमाने चले गए हैं। जबकि उनके पिता राम दुलारे जीवनभर मिट्टी का बर्तन बनाने का ही काम करते थे। पिता की मौत के बाद सिपाही लाल ने तो पुश्तैनी धंधा अपनाया है, लेकिन, बताता है कि माह भर की मेहनत में बच्चों की रोटी का इंतजाम भी मुश्किल होता है।
द्वाबा में कुम्हारों के सामने सबसे बड़ा संकट मिट्टी का है। शासन-प्रशासन द्वारा मिट्टी के लिए जमीन का पट्टा नहीं मिलने से उसे पड़ोसी के खेत से बर्तन बनाने की मिट्टी खरीदनी पड़ती है। ऐसे में सारी कमाई मिट्टी में ही लग जाती है। एक रिक्शा ट्राली मिट्टी खरीदकर बर्तन बनाने में एक हजार रुपये की लागत आती है और मिट्टी के बर्तन की बिक्री में इतनी रकम मिलनी मुश्किल हो जाती है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

lakshmi worship

स्पॉटलाइट

जानें नए कलेवर में लॉन्च नोकिया फोन की खूबियां

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

जानिए दुनिया के सबसे सम्मानित पुरस्कार 'ऑस्कर' से जुड़ी 10 रोचक बातें 

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

ICC रैंकिंग: स्टीव ओ'कीफ की ऊंची छलांग, अश्विन-जडेजा और विराट को हुआ नुकसान

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

अब यह लोकप्रिय कार भी नहीं मिलेगी बाजार में

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

सेक्स में चरम सुख की कुंजी क्या है? शोध में हुआ खुलासा

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

Most Read

बागी मंत्री को अख‌िलेश ने क‌िया कैब‌िनेट से बाहर

vijay mishra expelled from akhilesh cabinet
  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

झारखंड: महिला कर्मचारियों को मिलेगी दो विशेष छुट्टी

Jharkhand:women will get 2 special leave under sarva shiksha abhiyan
  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

ड‌िम्पल ने मोदी को बताया झूठ का प‌िटारा, कसाब को द‌‌िया नया फुलफॉर्म

dimple yadav rally in gonda
  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

पीएम मोदी के बयान से हिला पाकिस्तान, सर्जिकल स्ट्राइक-2 की तैयारी तो नहीं!

prime minister statement shock pakistan
  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

जानें, अखिलेश को मायावती से क्यों लग रहा है डर

akhilesh says against mayawati
  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top