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मौत की पाठशाला, अफसरों का मुंह ....ला

Kanpur

Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
ए फॉर अफसर
बी फॉर बेपरवाह
सी फॉर करॅप्ट (भ्रष्ट)
डी फॉर डर्टी (गंदे)
‘यह आज के जमाने की एबीसीडी है जिसे बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए’। काहूकोठी में स्कूल की छत गिरने के हादसे के बाद ‘अमर उजाला’ में फोन करके एक शहरी ने अपना आक्रोश यूं व्यक्त किया। उनका कहना था कि ‘पूरे शहर में सैकड़ों स्कूल जर्जर मकानों में चल रहे हैं। इनमें पढ़ाई-लिखाई के स्टैंडर्ड का तो पता नहीं लेकिन फीस का स्टैंडर्ड जरूर हाई रहता है। कापी-किताबों, स्कूल ड्रेस, पार्टी, फंक्शन आदि के नाम पर मनमानी वसूली की जाती है लेकिन शिक्षा विभाग के किसी अफसर ने आज तक किसी स्कूल पर कार्रवाई की हो तो बताइए? सबका हिस्सा जाता है’।
आक्रोश जायज है। शहर के जर्जर स्कूलों की स्थिति के बारे में ‘अमर उजाला’ ने अपनी खबरों के माध्यम से पहले ही चेताया था। लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर शिक्षा अधिकारी ने कहा कि टीमें बनाकर जांच की जाएगी। लेकिन न तो टीम का पता है और न ही निरीक्षण का। पिछले वर्ष विभाग ने कुछ जर्जर विद्यालयों को चिह्नित कर उनकी फोटोग्राफी कराई थी ताकि इनकी मरम्मत कराई जा सके। मगर एक भी विद्यालय में मरम्मत नहीं हुई। ज्यादातर जर्जर विद्यालय किराए के भवन में चल रहे हैं। किराए के चक्कर और मकान खाली कराने के विवाद के कारण मरम्मत नहीं कराई जाती। हर बार की तरह इस बार भी बेसिक शिक्षा अधिकारी राजकुमार यादव ने कहा कि कोई भी स्कूल जर्जर भवन में संचालित होता मिला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि नई मान्यता के मानकों को पूरा करने के लिए स्कूल वालों को तीन साल का समय दिया गया है। अभी एक सत्र बाकी है।


1972 की है मान्यता, मरम्मत 30 साल से नहीं
कानपुर। काहूकोठी के जिस एसएसडी जूनियर हाईस्कूल की छत गिरी है उसकी मान्यता 40 साल पुरानी (1972 की) है। स्कूल की मरम्मत पिछले 30 सालोें से नहीं हुई है। कुछ पैरेंट्स ने इस बाबत प्रिंसिपल और प्रबंधक से बात की थी लेकिन उन्होंने मकान मालिक की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ लिया था। मान्यता प्राप्त स्कूलों को छात्र संख्या के आधार पर शासन से हर साल 45 हजार रुपए अनुदान मिलता है पर इस मद से भी इस स्कूल में कभी मरम्मत नहीं कराई गई।


संकरी सीढ़ियां
ऊपर की मंजिल में चल रहे एसएसडी जूनियर हाईस्कूल के ऊपर जाने के लिए इतनी संकरी सीढ़ियां हैं कि एक साथ दो लोग नहीं आ-जा सकते। ऊपर पहुंचकर दाहिनी ओर प्रिंसिपल का कमरा है और उसके पीछे हाल है जहां प्री नर्सरी से लेकर तीन तक की कक्षाएं लगती है। उसी के ऊपर एक अन्य कमरा (जहां हादसा हुआ) है। वहां जाने के लिए भी संकरी सीढ़ियां हैं। वहां कक्षा चार से लेकर आठ की कक्षाएं लगती हैं।


स्कूल दो, प्रिंसिपल एक
एसएसडी विद्यालय में प्रिंसिपल मंजू लता शर्मा कई दिनों से नहीं आ रही हैं। गुरुवार को भी वह नहीं आई थीं। सहायक अध्यापक चंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि प्रबंधतंत्र का एक विद्यालय चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल हूलागंज में है। प्रिंसिपल वहीं ज्यादा बैठती हैं।


20 सितंबर के बाद से अटेंडेस ही नहीं
विद्यालय में शिक्षक-शिक्षिकाओं का अटेंडेस रजिस्टर नहीं मिला। नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय से आए बाबू मोहम्मद परवेज ने रजिस्टर को काफी ढूंढा मगर पता नहीं चला। बच्चों का अटेंडेस रजिस्टर देखा तो उसमें 20 सितंबर के बाद से बच्चों की उपस्थिति दर्ज ही नहीं थी। एसएसडी स्कूल में पीजी कक्षा में 10, नर्सरी ए में 13, नर्सरी बी में 20, कक्षा एक में 8, कक्षा दो में 11, कक्षा तीन में 12, कक्षा 4 में 8, कक्षा 5 में 14, कक्षा 6 में 12, कक्षा 7 में 5 कक्षा 8 में 6 बच्चे रजिस्टर्ड हैं।


नगर निगम ने जर्जर छत गिराई
जर्जर छत के गिरने के बाद नगर निगम की एक टीम को बुलाकर बाकी जर्जर छत को गिराया गया। अगर पहले ही जर्जर छत को गिरा दिया गया होता तो शायद यह हादसा नहीं होता। स्कूल में फायर विभाग की एनओसी भी नहीं है। फायर स्टेशन लाटूश रोड की टीम भी जांच के लिए पहुंची।
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