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30 से बंद हो जाएगी यह सेवा, आईआईटी कानपुर ने खोला मोर्चा

Kanpur

Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। आईआईटी कानपुर के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सेटेलाइट इमेजिंग फॉर रेल नेविगेशन (सिमरन) की सेवाएं 30 सितंबर से काम करना बंद कर देंगी। रेलवे बोर्ड के ‘सिमरन’ को बंद करने के फैसले के बाद ट्रेनों के इंजन से इसकी डिवाइस निकाल दी जाएंगी। 30 सितंबर के बाद एसएमएस से ट्रेन की लोकेशन, स्टेशन पर आने का समय, स्पीड की जानकारी नहीं मिल सकेगी। साथ ही वेबसाइट से ट्रेनों के अपडेट की सुविधा भी बंद हो जाएगी। उधर, रेलवे बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ आईआईटी प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। संस्थान ने रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि रेलवे पारदर्शी प्रक्रिया से बचना चाह रहा है।
सूत्रों के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने सिमरन को ठंडे बस्ते में डालने के लिए अनोखा तर्क दिया है। कहा है कि हैदराबाद की कंपनी अवेंटल ने सेटेलाइट सिस्टम की तकनीकी विकसित की है, जिसकी मदद से रेलवे की संचार व्यवस्था दुरुस्त की जा सकती है। हालांकि, सेटेलाइट सिस्टम की इस तकनीक का ट्रायल चेन्नई से 80 किलोमीटर के ट्रैक पर ही किया गया है, जिसके 90 फीसदी नतीजे ही सामने आ सके हैं। यह तकनीक लंबी दूरी के ट्रैक पर काम करेगी या नहीं, इसका ट्रायल अभी नहीं हो सका है। वहीं, सिमरन का परीक्षण पूरे देश के रेलवे ट्रैक पर सफल रहा है। इसके बावजूद उसे प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया है।
आईआईटी के सूत्रों ने बताया कि रेलवे की पब्लिक सेक्टर यूनिट सेंट्रल रेलवे इनफारमेशन सिस्टम (क्रिस) और रेलवे बोर्ड ने साजिश करके सिमरन को प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया है क्योंकि डिवाइस लगने के बाद 4000 गुड्स ट्रेनों से माल चोरी रुक जाती।


क्या है सिमरन
आईआईटी कानपुर द्वारा बनाई गई यह डिवाइस इस समय नार्थ-ईस्ट, मुंबई, कोलकाता, दिल्ली जाने वाली 36 शताब्दी, राजधानी और दूरंतो ट्रेनों में लगी है। इसकी मदद से यात्रियों को इन ट्रेनों की पल-पल की लोकेशन मिल जाती है। यह सूचना वेबसाइट www.simran.in अौर मोबाइल नंबर 9415139139 से एसएमएस के जरिये प्राप्त होती है। नतीजे सकारात्मक मिलने के बाद इसे देश की सभी ट्रेनों में लगाने की योजना थी।



इन्फो
9500
ट्रेनोें में सिमरन डिवाइस लगाने के लिए रेल बजट में 120 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ था। इसमें से 5.70 करोड़ रुपये आईआईटी कानपुर को मिले थे, जिससे डिवाइस के साफ्टवेयर और हार्डवेयर की खराबी दूर होनी थी। अब यह बजट लैप्स हो जाएगा। इससे आईआईटी को आर्थिक नुकसान होगा, क्योंकि परीक्षण पर खर्च 60 लाख रुपये आईआईटी कानपुर ने दिए थे।
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