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बीआईसी के लिए 161.98 करोड़ रुपए स्वीकृत

Kanpur

Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
कानपुर। लाल इमली मिल के लिए खुशियों की सौगात है। इसे पूरी क्षमता क्षमता से चलाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 160.98 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए हैं। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। इस रकम का इस्तेमाल लाल इमली और धारीवाल मिल को फिर खड़ा करने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा देनदारियां चुकाई जाएंगी, कुछ मजदूरों, कर्मचारियों को वीआरएस दिया जाएगा और संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करवाया जाएगा।
ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (बीआईसी) की मिलों लाल इमली और धारीवाल के कर्मचारियों के वेतन, वीआरएस और अन्य देयों के मामले अरसे से लंबित हैं। लगभग तीन साल पहले 338 करोड़ रुपए का रिवाइवल प्लान स्वीकृत हुआ था पर मिला एक धेला नहीं। इस कारण लाल इमली और धारीवाल मिल का उत्पादन लगातार घटता जा रहा है। कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ंने बताया कि बीआईसी को 160.98 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे देनदारियां निपटेंगी, बकाए का भुगतान होगा और लाल इमली चमकाई जाएगी। संपत्ति फ्री-होल्ड की अनुमति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए 25 फीसदी धन का भुगतान भी किया जा चुका है।

बच जाएगी अरबों की संपत्ति
मामूली बकाएदारी न चुकाने के चलते लिक्विडेशन में गईं बीआईसी की एल्गिन मिल और कानपुर टेक्सटाइल की संपत्तियां अरबों रुपये की हैं। मजदूर यूनियनें अरसे से लिक्विडेशन समाप्त कराने को लेकर आंदोलन कर रही हैं। पर धन के अभाव में इन्हें मुक्त नहीं कराया जा सका था। अब संपत्तियों को बचाया जा सकेगा। साथ ही लाल इमली, एल्गिन-एक, एल्गिन-दो और कानपुर टेक्सटाइल की जमीन फ्री-होल्ड कराई जा सकेगी। तब जमीन को बेचकर मिल चालू करने के लिए और रकम इकट्ठा की जाएगी।

इस तरह काम आएंगे 161 करोड़
- बीआईसी कर्मियों और मजदूरों का बकाया वेतन
- वीआरएस के लिए फिलहाल 17.10 करोड़ रुपए
- एसबीआई के लोन की अदायगी के लिए 11.50 करोड़
- बाकी पैसे संपत्तियों के फ्री-होल्ड के लिए

एक नजर
- लाल इमली और धारीवाल के रिवाइवल को 338 करोड़ रुपए की जरूरत है।
- फिलहाल 161 करोड़ रुपए मिलेंगे। बाकी जमीन बेचकर जुटाए जाएंगे।
- 900 कर्मचारियों और मजदूरों को वीआरएस देने का प्रस्ताव है।
- कर्ज और अन्य बकाएदारी चुकाने के लिए 100 करोड़ की जरूरत।


लाल इमली का हाल
- लाल इमली में करीब 1100 मजदूर और कर्मचारी हैं।
- मिल में क्षमता का बमुश्किल पांच प्रतिशत उत्पादन हो रहा है।
- कच्चे माल और आधुनिक मशीनों का अभाव है लाल इमली में।
- आधुनिकीकरण के लिए 100 करोड़ की और आवश्यकता है।

धारीवाल का हाल -
- लुधियाना स्थित धारीवाल मिल में 850 मजदूर और कर्मचारी हैं।
- मिल में क्षमता का बमुश्किल 10 फीसदी उत्पादन हो रहा है।
- कच्चे माल और आधुनिक मशीनरी का अभाव यहां भी है।
- आधुनिकीकरण के लिए लगभग 70 करोड़ की जरूरत है।
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बीआईसी की अन्य मिलों के हाल
- कानपुर टेक्सटाइल, एल्गिन एक और एल्गिन दो मिलें बंद हो चुकी हैं।
- इन मिलों के 27 कर्मचारी लाल इमली में समायोजित किए जा चुके हैं।
- बीआईसी मुख्यालय में 65-70 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं।

फायदे :-
- रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, राज्यों में डीलरों की नियुक्ति होगी।
- सस्ते उत्पाद उपलब्ध होंगे, निवेशकों का रुझान बढ़ेगा।
- अन्य मिलों की चालू होने के रास्ते भी खुल सकते हैं।
-शहर के औद्योगिक स्वरूप की बहाली में बड़ा कदम होगा।


लाल इमली के मशहूर उत्पाद
- मेघदूत, चक्रवर्ती, हिमालया, सीजी-379 ब्रांड के कंबल
- 60 नंबर लोई, काश्मीरी लोई
- शूटिंग-शर्टिंग
- बीसी-95 ब्लेजर

ऐतिहासिक मिल
लाल इमली मिल1876 में खुली थी। आजादी के बाद इसे उद्योगपति हरिदास मुंद्रा ने खरीद ली। कुछ साल बाद कलकत्ता के उद्योगपति बनवारी लाल बाजौरिया ने मिल खरीद ली। 11 जून 1981 में भारत सरकार ने इसका टेकओवर किया। तब पांच हजार से ज्यादा मजदूर थे। मिल पूरी क्षमता से चलती थी। इसके बाद हड़ताल, घपलों-घोटालों और मजदूर यूनियनों के अड़ियल रवैये के चलते मिल के हालत खराब होने लगी। 1992 में बीमार घोषित कर दी गई। 2009 में 338 करोड़ का रिवाइवल पैकेज स्वीकृत हुआ।



अरसे बाद खुशखबरी आई है। हम लोग इससे उत्साहित हैं। अब मिल को पूरी क्षमता से चलाना संभव हो सकेगा। मजदूर पूरी ताकत से मिल को फिर खड़ा करने में सहयोग करेंगे।
सूती मिल मजदूर यूनियन के अध्यक्ष बीएम त्रिपाठी

सरकार के इस फैसले का स्वागत है। वेतन न मिल पाने से दुश्वारियां झेल रहे मजदूरों को राहत मिलेगी। मांग है कि वेतन और भत्ते भी बढ़ाए जाएं ताकि महंगाई से मुकाबला किया जा सके।
सूती मिल मजदूर यूनियन के महामंत्री राजू ठाकुर

मजदूरों का संघर्ष रंग लाया। खुशहाली आ सकती है। कम से कम दो वक्त की रोटी तो नसीब होगी और बच्चे पढ़ सकेंगे। अब मिलों की संपत्तियां वापस आ सकेंगी।
बीआईसी कर्मचारी यूनियन के वीरेंद्र दुबे
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