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5 हजार वादकारी मायूस लौटे

Kanpur

Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
कानपुर। हायर एजूकेशन एंड रिसर्च बिल के विरोध में बुधवार को वकीलों ने काम नहीं किया। इससे करीब 5 हजार वादकारी मायूस होकर तारीख लेकर लौट गए। वकीलों ने रजिस्ट्री दफ्तर में हंगामा करते हुए काम बंद करा दिया। नारेबाजी करते हुए कई स्थानों पर बिल की प्रतियां फूंकी। ज्यादातर स्टांप वेंडरों और टाइपिस्टों ने भी काम नहीं किया। वकील गुरुवार को भी हड़ताल पर रहेंगे।
शहर में 60 और रमाबाई नगर में 37 कोर्ट हैं। हर कोर्ट में रोज औसतन 50 मुकदमों की तारीखें लगती हैं। इस तरह रोज करीब 5 हजार वादकारी कचहरी पहुंचते हैं। वकीलों की हड़ताल के कारण दूर-दराज से आए वादकारी हाजिरी लगवाकर तारीख लेकर लौट गए। हड़ताल पर रहे वकीलों ने दोपहर 12 बजे रजिस्ट्री दफ्तर में पहुंचकर नारेबाजी करते हुए हंगामा किया। बाबुओं और अन्य लोगों को भगाते हुए रजिस्ट्री दफ्तर बंद करा दिया। बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामेंद्र सिंह कटियार, महामंत्री पीयूष अवस्थी, मंत्री अरविंद डिमरी, कोषाध्यक्ष अशोक पांडेय, शशिकांत पांडेय, संयुक्त मंत्री प्रकाशन अभिषेक तिवारी, लायर्स अध्यक्ष सर्वेश सिंह और महामंत्री राकेश तिवारी ने कचहरी में घूम-घूमकर साथियों से काम न करने की अपील की। शुभेंदु दुबे, अशोक कुमार त्रिवेदी, वसीम अख्तर, अनंत शर्मा, अहमद अली, प्रशांत वाजपेयी, मधु यादव, पवन श्रीवास्तव, रंजय सिंह, कृष्णानंद झा ने नारेबाजी करते हुए बिल की प्रतियां फूंकी।


(इंटरेक्शन)

सिविल कोर्ट में उनका किराएदारी का मुकदमा चल रहा है। कचहरी तक आने में 40-50 रुपए खर्च हो गए।
शाईस्ता फेथफुलगंज

हत्या के मामले में उनकी गवाही थी। हड़ताल के बारे में पता था। वकील साहब से तारीख लेने को कहा था। उन्होंने इनकार कर दिया था। इसलिए सभी को आकर हाजिरी लगवानी पड़ी।
रमेश, कामता नाथ, रामेश्वर गुलौली डेरापुर



क्या है बिल और वकीलों को नुकसान
हायर एजूकेशन एंड रिसर्च बिल 2011 के तहत ला इंस्टीट्यूट अफसरशाही के हाथों में होंगे। अभी यह इंस्टीट्यूट बार कौंसिल संचालित करती है। पहला ला इस्टीट्यूट बार कौंसिल ने ही खुलवाया था। इस समय देश में करीब एक दर्जन इंस्टीट्यूट हैं। मान्यता से लेकर अन्य काम बार कौंसिल ही करती है। यह बिल लागू होने पर इनमें बार कौंसिल का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। इस तरह बार कौंसिल की स्वायत्त्ता खतरे में पड़ जाएगी। इस बिल के तहत विदेशी वकीलों को भी देश में वकालत की छूट होगी। इससे बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने मामले इन्हें दे देंगी। विदेशी भी अपने ला इंस्टीट्यूट खोल सकेंगे।
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