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‘सरकार पर बनाएंगे प्रेशर ताकि शहर बने बेहतर’

Kanpur

Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
कानपुर। शहर के व्यापारिक और औद्योगिक विकास में तेजी लाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति बनाने के लिये रविवार को कारोबारी, उद्यमी, आईआईटियंस और बुद्धिजीवी एक मंच पर आए। समस्याओं, उम्मीदों, कमजोरियों आदि पर गंभीर मंथन हुआ और तय किया गया कि बुनियादी ढांचा, बिजली, सुरक्षा और सुविधाएं पाने के लिये एक प्रेशर ग्रुप बनाया जाएगा। इसके जरिये केंद्र और प्रदेश सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि शहर में व्यापार और उद्योग स्थापित करने का उचित माहौल दिया जाए। व्यापारियों और उद्यमियों ने नाराजगी व्यक्त कर कहा कि कानपुर से 6 हजार करोड़ राजस्व मिलने के बाद भी शहर के विकास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस दौरान राइट टू रिकॉल लागू करने की भी मांग की गई।
सिविल लाइन स्थित रागेन्द्र स्वरूप आडिटोरियम में ‘21वीं सदी व्यापारिक व औद्योगिक चुनौतियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में आईआईटियंस सुमित अग्रवाल ने कहा कि चीन में उद्योग लगाने के लिये बेहतर आधारभूत ढांचा और सस्ती ब्याज दरों पर लोन दिया जा रहा है पर देश में ऐसा नहीं है। यही कारण है कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश चीन के मुकाबले कम आता है। आईआईटियंस और उद्यमी राहुल दत्ता ने कहा कि 2011-12 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार शहर से 6 हजार करोड़ रुपयेे राजस्व दिया गया है जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके बावजूद शहर पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के उपाध्यक्ष आरके जालान ने कहा कि विश्व में चमड़े और उसके उत्पादों का कारोबार 23 बिलियन डालर का है। जिसमें भारत हिस्सेदारी दूसरे स्थान पर है। उद्यमी एसपी अग्निहोत्री और नरेश मनचंदा ने कहा कि शहर में उद्योगों के लिये कई संभावनाएं है लेकिन प्रदेश और केन्द्र सरकार का ध्यान सिर्फ एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद तक ही सीमित रहता है। एल्डिको की वाइस चेयरमैन अर्चना त्रिपाठी, आयकर के पूर्व निदेशक बद्री प्रसाद, पूर्व आईएएस आरएन त्रिवेदी ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन महेश मेघानी ने किया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महेंद्र मोहन ने किया। सुरेंद्र कुमार गुप्ता, नजम हमराज, सुरेंद्र सनेजा, आरजी पांडे, केके जिंदल, पदमपत बदौलिया, सरदार दिलीप सिंह, सरदार राजेंद्र, लालचंद कुकरेजा, विनय अग्निहोत्री, विनय अरोड़ा, शीतल शुक्ला सहित अन्य उद्यमी व व्यापारी मौजूद रहे। इस दौरान व्यापारियों और कारोबारियों को सम्मानित भी किया गया।

समस्याएं
-उद्योग लगाने के लिये ऊंची ब्याज दरों पर लोन
- सिंगल विंडो सिस्टम का प्रावधान नहीं।
- कुशल मजदूरों की कमी।
- श्रम, औद्योगिक कानून और एक्ट की बंदिशें।
- बेहतर टैक्स प्रणाली की कमी।
- औद्योगिक क्षेत्र, बाजारों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति नहीं।
- खस्ताहाल इंफ्रास्ट्रक्चर
- उद्योग लगाने के लिये सरकार द्वारा प्रोत्साहन न देना
- लघु उद्योगों के लिये अच्छी योजनाओं का अभाव
- करों में राहत और छूट नहीं
-आयात-निर्यात में कई करों का प्रावधान

मांगें
-उद्योगों और बाजारों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो
-सरकार उद्योग स्थापित करने के लिये प्रोत्साहन देे
- करों में राहत मिले, एकल टैक्स प्रणाली हो
- उद्योग लगाने के लिये दफ्तरों के चक्कर काटने की समस्या खत्म हो
- श्रम कानून लचीले बनाये जाएं
- ट्रेड यूनियनों पर अंकुश लगे
- कच्चे माल पर मिले रियायत
- बेहतर ट्रांसपोर्ट की सुविधा हो


सुझाव
-कानपुर को बनाएं पॉवर हब
-बिल्हौर, पुखरायां में लगें पावर प्लांट
-एनटीसी और बीआईसी की बंद पड़ी मिलों की भूमि का प्रयोग किया जाए
-शहर में स्मार्ट बिल्डिंग और शॉपिंग मॉल बनाए जाए
- शहर के यातायात को ध्यान में रखकर रेलवे ओवर ब्रिज बनें
- कानपुर - लखनऊ मार्ग को और बेहतर किया जाए
- शहर की सड़कों पर बने स्पीड ब्रेकर और रेड सिग्नल खत्म हों
- नदी जोड़ो परियोजना चलाई जाये। इसमें जल परिवहन की व्यवस्था हो
- स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क विस्तार योजना लागू की जाए
-एनएचआई भौंती, मंधना, गंगा बैराज से अंचलपुर मार्ग तक बाईपास बने
- एसईजेड का स्थापना की जाए

संभावनाएं
उद्यमी और कारोबारियों के अनुसार शहर में आईटी हब, फूड प्रोसेसिंग हब, सर्विस हब, प्लास्टिक हब, लेदर हब, इंजीनियरिंग गुड्स हब, रेडीमेड, होजरी हब, केमिकल, पेंट और डिटरजेंट हब बनने की संभावनाएं हैं।



शहर में सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। यदि इसे दूर कर दिया जाये तो उद्योगों का और कायाकल्प किया जा सकता है।
बलराम नरुला, उद्यमी

प्रदेश और केन्द्र सरकार की उदासीनता से शहर का औद्योगिक स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व देने के बाद भी शहर के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
राजेश ग्रोवर,उद्यमी

सरकार को शहर में उद्योग लगाने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिये। इसके लिये सबसे पहले आधार भूत ढांचा ठीक करना होगा।
मिक्की मनचंदा,उद्यमी

प्रदेश सरकार का शहर के कारोबारियों के प्रति उपेक्षा का व्यवहार है। अपनी मेहनत के बल पर उद्यमी यहां उद्योगों को जिंदा रखे हैं।
महेश दुबे, कारोबारी

सरकार को करों में रियायत देने के साथ श्रम कानूनों को लचीला बनाए, टैक्स प्रणाली में कई परिवर्तन किये जाने चाहिये।
लालचंद, कारोबारी

छोटे कारोबारियों के लिये सरकार को प्रोत्साहन योजनाएं चलानी चाहिये। छोटे-मझोले उद्योग लगाने से युवाओं को रोजगार मिलेगा।
राजेंद्र आडवानी, कारोबारी
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