आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

जुआरियों का अड्डा बनी क्रांतिवीरों की कर्मस्थली

Kanpur

Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
गौरव शुक्ला
कानपुर। देश की आजादी के आंदोलन में क्रांतिकारी लेखों के जरिए ब्रितानिया हुकूमत की जड़े हिलाने वाला ‘प्रताप’ अखबार का दफ्तर गुमनामी के अंधेरे में गुम हो गया है। पहले जिस दफ्तर में गणेश शंकर विद्यार्थी, भगत सिंह समेत देश की आजादी में योगदान देने वाले क्रांतिवीरों की महफिल सजती थी वहीं अब जुआरी और शराबी जुट रहे हैं। दिन-ब-दिन जर्जर हो रहा प्रताप प्रेस के दफ्तर की अभी तक किसी ने सुध नहीं ली है।
निर्भीक देशभक्त सेनानी, ओजस्वी वक्ता और उत्कृष्ट पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ अखबार का पहला दैनिक संस्करण 23 नवंबर सन् 1920 को फीलखाना स्थित प्रताप प्रेस के दफ्तर से निकाला था। प्रताप में क्रांतिकारियों की प्रशंसा के साथ अंग्रेजों की नीतियों के खिलाफ खबरें छापी जाती थीं। बताया गया कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन के दौरान सरदार भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद भी प्रताप प्रेस में रहे थे। बताया जाता है कि अखबार में बलवंत सिंह के छद्म नाम से भगत सिंह लेख लिखा करते थे। इस इमारत में सुरंग भी हुआ करती थी। अंग्रेजों का छापा पड़ने पर इसी सुरंग के रास्ते क्रांतिकारी भाग जाया करते थे। बताया गया कि अब यहीं दफ्तर काफी जर्जर हो चुका है। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि दस साल पहले दफ्तर की मशीनें और अखबार संबंधी चीजें या तो जला दी गयीं या बेच दी गयीं। प्रताप के दफ्तर पर रात 9 बजे के बाद शराबियों और जुआरियों का मजमा लग जाता है। इसकी शिकायत पुलिस से कई बार की गयी लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हुई। केवल यही नहीं इमारत की हालत भी खराब है। प्लास्टर और ईंट जमीन पर गिरने लगी है। छत और सीढ़ियां भी जर्जर हो चुकी हैं। फीलखाना निवासी अंबिका प्रसाद बाजपेई के परिवार के लोग प्रताप अखबार में काम करते थे। अंबिका (77) ने बताया कि यह जगह क्रांतिकारियों की शरण स्थली रही है। आजादी की लड़ाई में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। इस अखबार के दफ्तर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए। तभी इस पवित्र स्थली के विषय में नई पीढ़ी जान सकेगी।

--------------------
प्रताप अखबार का योगदान : रायबरेली के किसान आंदोलन को बढ़चढ़ उठाया, कानपुर के मजदूरों का समर्थन, सत्याग्रह, जनता की खुशहाली के लिये आह्वान किया।

------------------------------------------------------------
फोटो-1- मोहानी के परिवार के सदस्य अजहर मोहम्मद मोहानी और उमैर मोहानी
----------------------

गुमनामी में जी रहा मोहानी का परिवार
कानपुर। अपनी लेखनी और शायरियों के बल अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले मशहूर शायर सैय्यद फजलुल हसन उर्फ ‘हसरत मोहानी’ का परिवार नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। नई सड़क स्थित कमाल खां का हाता निवासी इस महान क्रांतिकारी के घर के सामने नालियां बजबजा रही हैं। यहां पिछले तीन सालों से नालियों की सफाई नहीं की गयी। हिंदुस्तान की ऐसी महान शख्सियत का परिवार अभी भी गुमनामी की जिंदगी जी रहा है। कमाल खां के हाते में अभी भी उनके पोते राशिद मोहानी, असद मोहानी और स्वर्गीय परवेज मोहानी का परिवार रहता है। सरकारी मदद तो दूर घर के आस-पास की गंदगी तक साफ नहीं कराई जा रही।
बताया गया कि हसरत मोहानी का जन्म 1875 को उन्नाव जिले के मोहान कस्बे में हुआ था। उन्होंने अपने अखबार ‘उर्दू-ए-मोअल्ला’ के जरिये ब्रिटिश साम्राज्य की खिलाफत की थी। साथ ही 1928 को मोहानी द्वारा प्रकाशित ‘मुस्तकबिल’ अखबार का लोहा विदेशी भी मानते थे। 13 मई 1951 को लखनऊ के फिरंगी मोहाल में उनका इंतकाल हो गया था। बताया गया कि फिल्म ‘निकाह’ में पाकिस्तानी गायक गुलाम अली की मशहूर गजल ‘चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है...’ मोहानी ने लिखी थी। मोहानी कृष्ण प्रेमी भी थे। हज का फर्ज अदा करने के लिये मक्का मदीना शरीफ जाने के साथ साथ वे हर साल मथुरा भी जाया करते थे। ‘मन तोसे प्रीत लगाई कन्हाई, काहू और की सूरत अब काहे का आई...’ गीत भी खूब पसंद किया जाता है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

जिनके पास होती हैं ये 10 चीजें, उनका कुछ भी बिगाड़ नहीं पाता राहु

  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +

अपने पार्टनर से सिर्फ ये 5 चीजें चाहती है हर लड़की...

  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +

अमजद खान की मौत के गम में ताउम्र कुंवारी रह गई ये हीरोइन, अब चला रही है होटल

  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +

B'Day Spl: मुकेश ने बनाया था इस एक्टर को सुपरस्टार, मौत से पहुंचा था गहरा सदमा

  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +

परिणीति चोपड़ा का '15 मिनट' ब्यूटी सीक्रेट अब नहीं रहा राज

  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +

Most Read

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

शिक्षामंत्री की कुर्सी पर बैठ FB में शेयर की फोटो, वायरल होते ही हिरासत में युवक

police arrested boy sat on minister's chair after uploading pic on FB
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

रामनाथ कोविंद की तकदीर एक शब्द ने बदल दी, जानें क्या है इसका रहस्य  

one word change life of ramnath kovind
  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +

..जब पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच 10 घंटे फंसे रहे दो स्कूलों के 217 बच्चे

more than two hundred children were stucked in pak shelling in school
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017
  • +

सीजफायर उल्लंघन पर भारत का पाक को करारा जवाब, कई पोस्ट की तबाह

befeating response to pakistan of CFV many posts destroyed
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

सीएम योगी के पहले आदेश का देखिए क्या हुआ हाल...

officers denied up cm order
  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!