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नहीं देखनी 155वीं मौत।

Kanpur

Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
एक मौत का मतलब केवल एक जान जाना नहीं, कई रिश्तों का बेमौत मर जाना है। ‘दुनिया से जाने वाले, जाने चले जाते हैं कहां’, कई रिश्ते जिंदगी भर यही पूछते रह जाते हैं। मरने की बाद की क्या दुनिया है, यह तो ऊपर वाला जाने, मगर एक बेटे के गम में पागल होने वाले मां-पिता, भाई-बहन समेत तमाम रिश्तों की अंतहीन तकलीफें तो हम देख ही सकते हैं। आंकड़े भले कहते हों कि पांच साल में कल्याणपुर रेलवे स्टेशन पर हादसों में 154 लोगों की मौत हो गई, मगर हम मानते हैं कि मौतें 154 नहीं, हजारों रिश्तों की हुईं हैं।
मौत देश के अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी होती हैं, मगर वहां लापरवाही का दोष मरने वाले के सिर जाता है। कल्याणपुर की कहानी अन्य स्टेशनों से अलहदा इस मायने में है कि यहां सबको पता है कि प्लेटफार्म नीचा है और चढ़ने के प्रयास में यात्री कभी भी असंतुलित होकर मौत का शिकार हो सकता है। यह तथ्य सर्वविदित होने के बावजूद इतने लोग काल के गाल में समा गए। पत्थरदिल, रेल प्रशासन अब भी 20 लाख रुपए न होने का रोना रो रहा है। कल्याणपुर क्षेत्र के सांसद कांग्रेस के, सरकार कांग्रेस की फिर भी हत्यारा प्लेटफार्म जब-तब जाने ले रहा है। कभी तो सवाल उठेगा, गुनाहगार कौन? सांसदजी, जनता चेत गई है। 2014 भी नजदीक है। जनता ने मुठ्ठी भींच ली है। मीडिया भी एकजुट है, नहीं देखनी 155वीं मौत। काश, संवेदनहीन रेलवे अधिकारी भी जनता की यह आवाज सुन सकते। यहां हम यह भी कहना चाहेंगे, हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं। बात मनवाने के और भी कई अहिंसक रास्ते हैं। आप पूरे मनोयोग से रेलवे प्रशासन की संवेदनहीनता के खिलाफ आगे आईए, दुनिया में एक भी मिसाल नहीं, जब जनता की ताकत के आगे सत्ता न झुकी हो।
संपादक


संशोधित

आपे से बाहर हुए सीओ
बवाल के दौरान सीओ कल्याणपुर राजेश यादव कल्याणपुर स्टेशन पहुंचे और स्टेशन मास्टर बलराम प्रजापति पर बिफर पड़े। बोले, तुम्हारा विभाग प्लेट फार्म ऊंचा नहीं करा रहा है, रोज यात्री मर रहे हैं। पुलिस कब तक निगरानी करे। अब बवाल हो गया है, आरपीएफ को बुलाओ, वहीं आकर स्थिति संभाले। बलराम चुपचाप सीओ की डांट सुनते रहे।

बस एक बार बोला, हमें बचा लो
ट्रेन से हाथ और पैर कटने के बाद रेलवे ट्रैक पर पवन लहूलुहान हालत में पड़ा था। जब लोग उसके पास पहुंचे तो केवल एक बार वह बोला, भईया हमें बचा लो। इतना कहने के बाद पवन बेहोश हो गया था। उसे 108 नंबर एम्बुलेंस से हैलट भेजा गया था। सुशील, प्रत्यक्षदर्शी।

सर पब्लिक पागल हो चुकी है
उपद्रव देख राहगीर इतने डर गए थे कि उन्हें कुछ नहीं सूझ रहा था। एक शख्स से पुलिस अफसरों से मोबाइल पर कहा कि सर पब्लिक पागल हो चुकी है। चारों तरफ घूम-घूम कर पथराव और मारपीट कर रही है। पुलिसकर्मी पीटे जा रहे हैं। वाहन टूट रहे हैं। जल्दी फोर्स भेजे, वरना बड़ी घटना हो सकती है। अय्याज, प्रत्यक्षदर्शी।
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नहीं उठ रहा था थाने का फोन
आरक्षण केंद्र में तैनात आरपीएफ सिपाही डीएस राणा को भी भीड़ ने जमकर पीटा। ईंट-पत्थर लेकर उसे दौड़ा लिया। वह अपनी जान बचाने के लिए कल्याणपुर थानें में घुस गया। वहां से आरपीएफ थाने का टेलीफोन मिलाया। डीएस राणा का कहना है कि उन्होंने कई बार थाने का नंबर डायल किया पर किसी ने फोन नहीं उठाया। यदि पुलिस मदद नहीं करती तो उनकी जान चली जाती।

जाम लगा, बाजार बंद हुई
उपद्रवी कल्याणपुर स्टेशन और उसके बाहर घूम-घूम कर पथराव कर रहे थे। पनकी रोड और कल्याणपुर थाने के आसपास जो दुकान खुली दिखी, उपद्रवियों ने वहां पथराव किया। थोड़ी देर बाद पूरी बाजार बंद हो गई। जीटी रोड, पनकी रोड पर दोनों ओर जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतार लग गई। रावतपुर से कल्याणपुर आने-जाने वाले अन्य रास्तों पर भी जाम की स्थिति बनी रही। आफिस और कालेज जा रहे लोगों को खासी परेशानी हुई। ढ़ाई घंटे बाद पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के जवान कड़ी मशक्कत के बाद यातायात व्यवस्था सुचारू कराने में सफल हुए। बाजार भी खुल गया।
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रेलवे की गिट्टी का इस्तेमाल किया
कल्याणपुर स्टेशन और सड़क पर तोड़फोड़ में भीड़ ने ईंट-पत्थर का इस्तेमाल नहीं किया। उन लोगों ने रेलवे ट्रैक पर मिली गिट्टी से स्टेशन में तोड़फोड़ की। बाहर निकलने के बाद गेनमैन केबिन और वाहनों पर भी इसी गिट्टी के प्रयोग किया। पुलिसकर्मियों और रेलवे कर्मियों पर भी गिट्टी चलाई। इसके बाद एक उपद्रवी ने गेट मैन केबिन में रखी लालटेन से मिट्टी का तेल निकालकर एक बस फूंकने की कोशिश की। परंतु आपाधापी में तेल गिर गया। गेट मैन रवींद्र का कहना है कि यदि मिट्टी का तेल नहीं गिरता तो एक बस जरूर फुंक जाती।
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मोबाइल और चिट्ठी का हुआ प्रयोग
ट्रेन संचालन से जुड़े यंत्रों के डिस्टर्व होने के कारण रेलकर्मियों को मोबाइल और चिट्ठी का सहारा लेना पड़ा। स्टेशन मास्टर बलराम प्रजापति का कहना है कि तोड़फोड़ के दौरान हुई ट्रेनों संचालन यंत्र में खराबी की वजह से सिग्नल भी काम नहीं कर रहे थे। आउटर पर खड़ी ट्रेन के चालक को लिखित सूचना भेजी गई है कि लाइन क्लीयर है, गाड़ी आगे बढ़ाओं। इसी तरह गेन मैन रवींद्र ने बताया कि टेलीफोन सेट टूटने की वजह से उनका स्टेशन से संपर्क टूट गया है। अब मोबाइल के जरिए अफसरों से सूचना का अदान-प्रदान चल रहा है। हालांकि बवाल खत्म होने के बाद इंजीनियरों टीम के साथ पहुंचे और क्षतिग्रस्त उपकरणों को दुरस्त किया।
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घर का सबसे बड़ा बेटा था पवन
पवन कुमार अपने पिता सत्य प्रकाश की सबसे बड़ा बेटा था। परिवार में मां मीरा देवी, दो बड़ी बहने और दो छोटे भाई रामकुमार और अक्षय हैं। सत्य प्रकाश दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। परिवार के अन्य सभी सदस्य गांव में रहते हैं। हादसे में पवन की मौत की खबर पाकर चचेरा भाई सुरेश चंद्र, फूफा सुरेश चंद्र, बहनोई राघवेंद्र सिंह और बहन प्रीति दोपहर में पोस्टमार्ट हाउस पहुंचे। पवन का शव देख प्रीति और सुरेश फफक पड़े। साथ आए अन्य रिश्तेदारों की भी आंखे भर आईं। उन लोगों ने खुद को संभालने के बाद प्रीति और उसके चचेरे भाई सुरेश को ढांढस बंधाया। बहनोई राघवेंद्र ने बताया कि बेटे की मौत की खबर से मीरा सुधबुध खो बैठी है। वह घर में गुमशुम बैठी हैं। वहीं परिवार से जुड़े लोगों की आंसू थम नहीं रहे हैं। इधर, देर शाम पोस्टमार्टम के बाद पवन का शव उनके गृह जनपद मैनपुरी चला गया। पता चला है कि सत्य प्रकाश भी गांव पहुंच गए हैं। शनिवार को शव का अंतिम संस्कार होगा।
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