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‘प्लेटफार्म ऊंचा करो, पुलिस कब तक निगरानी करे’

Kanpur

Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
कानपुर। कल्याणपुर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को बीएड छात्र पवन कुमार की मौके बाद हुए बवाल के दौरान सीओ कल्याणपुर राजेश यादव कल्याणपुर स्टेशन मास्टर पर बिफर पड़े। उन्होंने स्टेशन मास्टर बलराम प्रजापति से कहा कि तुम्हारा विभाग प्लेटफार्म ऊंचा नहीं करा रहा है, रोज यात्री मर रहे हैं। पुलिस कब तक निगरानी करे। अब बवाल हो गया है, आरपीएफ को बुलाओ, वहीं आकर स्थिति संभाले। इस पर बलराम चुपचाप सीओ की बात सुनते रहे।
उधर, लोग कल्याणपुर स्टेशन और उसके बाहर घूम-घूम कर पथराव कर रहे थे। पनकी रोड और कल्याणपुर थाने के आसपास जो दुकान खुली दिखीं, लोगों ने वहां पथराव किया। थोड़ी देर बाद पूरा बाजार बंद हो गया। जीटी रोड, पनकी रोड पर दोनों ओर जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतार लग गई। रावतपुर से कल्याणपुर आने-जाने वाले अन्य रास्तों पर भी यही स्थिति रही। करीब ढाई घंटे बाद पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के जवान कड़ी मशक्कत के बाद यातायात व्यवस्था सुचारु कराने में सफल हुए। बाजार भी खुल गया।

रेलवे की गिट्टी से की तोड़फोड़
कल्याणपुर स्टेशन और सड़क पर तोड़फोड़ में भीड़ ने ईंट-पत्थर की जगह रेलवे ट्रैक पर पड़ी गिट्टी से स्टेशन पथराव किया। पुलिसकर्मियों और रेलवे कर्मियों पर भी गिट्टी चलाई। इसके बाद एक उपद्रवी ने गेट मैन केबिन में रखी लालटेन से मिट्टी का तेल निकालकर एक बस फूंकने की कोशिश की लेकिन आपाधापी में तेल गिर गया। गेट मैन रवींद्र ने बताया कि अगर तेल नहीं गिरता तो एक बस जरूर फुंक जाती।

नहीं उठा आरपीएफ थाने का फोन
आरक्षण केंद्र में तैनात आरपीएफ सिपाही डीएस राणा को भी भीड़ ने पीटा। वह अपनी जान बचाने के लिए कल्याणपुर थानें में घुस गया। वहां से आरपीएफ थाने का फोन नंबर कई बार मिलाया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। अगर थाना पुलिस मदद नहीं करती तो उनकी जान चली जाती।

मोबाइल और चिट्ठी का हुआ प्रयोग
ट्रेन संचालन से जुड़े यंत्रों के डिस्टर्ब होने के कारण रेलकर्मियों को मोबाइल और चिट्ठी का सहारा लेना पड़ा। स्टेशन मास्टर बलराम प्रजापति का कहना है कि तोड़फोड़ के दौरान सिग्नल भी काम नहीं कर रहे थे। आउटर पर खड़ी ट्रेन के चालक को लिखित सूचना भेजी गई कि लाइन क्लियर है, गाड़ी आगे बढ़ाओ। गेट मैन रवींद्र ने बताया कि टेलीफोन सेट टूटने के मोबाइल फोन के जरिये रेलवे स्टेशन पर बात करनी पड़ी। हालांकि, बवाल खत्म होने के बाद पहुंची इंजीनियरिंग टीम ने क्षतिग्रस्त उपकरणों को दुरुस्त किया।

‘सर पब्लिक पागल हो चुकी है’
प्रत्यक्षदर्शी अय्याज ने बताया कि जीटी रोड पर उपद्रव देख राहगीर इतने डर गए थे कि उन्हें कुछ नहीं सूझ रहा था। एक शख्स ने पुलिस अफसरों से मोबाइल फोन पर कहा कि सर पब्लिक पागल हो चुकी है। चारों तरफ घूम-घूम कर पथराव और मारपीट कर रही है। पुलिसकर्मी पीटे जा रहे हैं। वाहन टूट रहे हैं। जल्दी फोर्स भेजें, वर्ना बड़ी घटना हो सकती है।

घर का सबसे बड़ा बेटा था पवन
हादसे में जान गंवाने वाले पवन कुमार अपने पिता सत्य प्रकाश का सबसे बड़ा बेटा था। परिवार में मां मीरा देवी, 2 बड़ी बहनें, 2 छोटे भाई रामकुमार और अक्षय हैं। सत्य प्रकाश दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। परिवार के बाकी सदस्य गांव में रहते हैं। मौत की खबर पाकर चचेरा भाई सुरेश चंद्र, फूफा सुरेश चंद्र, बहनोई राघवेंद्र सिंह और बहन प्रीति दोपहर में पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पवन का शव देख प्रीति और सुरेश फफक पड़े। बहनोई राघवेंद्र ने बताया कि बेटे की मौत की खबर से मीरा सुधबुध खो बैठी हैं। इधर, देर शाम पोस्टमार्टम के बाद पवन का शव उनके गृह जनपद मैनपुरी चला गया। पता चला है कि सत्य प्रकाश भी गांव पहुंच गए हैं। शनिवार को शव का अंतिम संस्कार होगा।

सीट पाने के चक्कर में गई जान!
पवन इंदिरा नगर कल्याणपुर के राजकीय अनुसूचित हरिजन छात्रावास में रहते थे। वह बिल्हौर के बरण्डा अरौल स्थित मां शीतला देवी त्रिजुगी नारायण महाविद्यालय से बीएड कर रहे थे। वह कल्याणपुर स्टेशन से रोजाना अरौल अप-डाउन करते थे। बताया जाता है कि शुक्रवार को कानपुर-फर्रुखाबाद पैसेंजर कल्याणपुर स्टेशन पर रुक भी नहीं पाई थी कि सीट पाने के लिए पवन ने चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास किया। प्लेटफार्म नीचा होने के कारण पावदान से उनका पैर फिसल गया। स्टेशन मास्टर खुद फर्स्ट एड बाक्स लेकर पहुंचे और 108 नंबर डायल कर एंबुलेंस से पवन को हैलट भेजा लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई।

बस एक बार बोला, हमें बचा लो...
घटना के प्रत्यक्षदर्शी सुशील ने बताया कि ट्रेन से हाथ और पैर कटने के बाद रेलवे ट्रैक पर पवन लहूलुहान हालत में पड़े थे। जब लोग उनके पास पहुंचे तो केवल एक बार वह बोले, भइया हमें बचा लो। इतना कहने के बाद पवन बेहोश हो गए।
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