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पग-पग पर पैसा, केडीए है ही ऐसा

Kanpur

Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
विवेक त्रिपाठी
कानपुर। शहर में अवैध इमारतें ‘राजा के राज और प्यादों के मिजाज’ से तनती हैं। राजा मतलब आला अफसर और प्यादे हैं कर्मचारी। अवैध निर्माण की बिसात केडीए की चहारदीवारी में ही बिछती है। बिल्डिंग के लिए जमीन दिलाने, नक्शा पास करने और निर्माण कार्य पूरा होने तक का काम केडीए के अफसरों-कर्मचारियों की मिलीभगत से ही होता है। राजा अगर चहेतों का कोई काम कराना चाहता है तो प्यादे उसकी इच्छा का सम्मान करते हैं। प्यादों की करतूतों को राजा नजरअंदाज करता रहता है। सब एक-दूसरे की ढकते-मूंदते रहते हैं और शहर में अवैध इमारतें तनती जाती हैं।


इन टेबिलों से गुजरता है रेजिडेंशियल नक्शा

काउंटर-यहां बैठने वाले कर्मचारी के पास नक्शे का आवेदन जमा होता है। एक आवेदन के साथ नक्शे की तीन कॉपी जमा करना जरूरी है।
घूस-100 रुपए

रिकार्ड रूम-आवेदन को रजिस्टर में चढ़ाकर इसे रिकार्ड रूम में कनिष्ठ लिपिक/ लिपिक के पास भेजा देता है। वही फाइल तैयार करते हैं।
रिश्वत-300-500 रुपए

जोन ऑफिस-नक्शा जिस जोन का होता है, रिकार्ड रूम से फाइल उसके लिपिक/वरिष्ठ लिपिक के पास भेजी जाती है।
रिश्वत-5000 रुपए

नगर नियोजक-जोन ऑफिस से नक्शे की फाइल नगर नियोजक को भेजी जाती है। वह टेक्निकल जांच कराकर रिपोर्ट बनाते हैं। इसके लिये संबंधित जोन का संबंधित क्षेत्र देख रहे जेई की मदद ली जाती है।
रिश्वत-आवेदक की हैसियत के मुताबिक-20,000 से 2 लाख रुपए या उससे ज्यादा

संयुक्त सचिव-अगर नक्शा 115 वर्ग मीटर तक का है तो टाउन प्लानर उसे पास करने के लिए संबंधित जोन के संयुक्त सचिव के पास भेजता है।
रिश्वत-जेई और नगर नियोजक को मिली रकम में हिस्सा बांट करते हैं

सचिव/अपर सचिव-अगर नक्शा 116 से 300 वर्ग मीटर तक का है तो उसे सचिव और अपर सचिव के पास भेजा जाता है।
रिश्वत-कोई सीमा नहीं

उपाध्यक्ष-300 वर्ग मीटर से अधिक का नक्शा पास होने के लिये उपाध्यक्ष के पास आता है। इसके अलावा कॉमर्शियल नक्शा पास करने का अधिकार सिर्फ उपाध्यक्ष को ही होता है।
रिश्वत-कोई सीमा नहीं

खेल होता रहता है, अफसर सोते रहते हैं
केडीए का सिस्टम सेंट्रलाइज्ड नहीं है। उपाध्यक्ष ने यहां सबकी अलग-अलग जिम्मेदारी तय कर दी है। यही वजह है छोटे-छोटे ‘खेल’ होते रहते हैं और उपाध्यक्ष या सचिव और अपर सचिव को ‘पता नहीं’ चलता। केडीए सूत्र बताते हैं नक्शा पास होता है तो उसकी एक कॉपी केडीए की फाइल में लगती है। दूसरी कॉपी आवेदक को सौंपी जाती है जबकि तीसरी कॉपी संबंधित जोन व क्षेत्र के प्रवर्तन दस्ते के पास होती है। प्रवर्तन दस्ते की जिम्मेदारी होती है कि वह साइट का निरीक्षण कर यह जांच करता रहे कि निर्माण नक्शे के मुताबिक हो रहा है या नहीं। हालांकि, दस्ता अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाए बिल्डरों के इशारे पर नाचता रहता है इसलिये अवैध निर्माण रुक नहीं पाते। संयुक्त सचिव स्तर के अफसरों को निरीक्षण करना चाहिये लेकिन वह भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते।
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