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इन फ्लैट्स में जनता नहीं ‘यमराज’ रहेंगे

Kanpur

Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
‘डिविनिटी’ शब्द के हिंदी में अलग-अलग अर्थ हैं। देवता या देवी, दैवीय होने के गुण अथवा धर्म का अध्ययन। अगर ‘डिविनिटी’ के साथ ‘होम्स’ भी जुड़ जाये तो मतलब दैवीय आवास होगा, यानि जहां देवता रहते हैं। कल्याणपुर में बन रहे ‘डिविनिटी होम्स’ की शानो-शौकत देखकर पहली नजर में ऐसा ही लगता है। लेकिन भीतर जाते ही खुशनुमा अहसास दहशत में बदल जाता है। आइये बताते हैं क्यों? मेन गेट से दो कदम चलते ही करंट प्रवाहित होने की डरावनी आवाज सुनाई पड़ती है, झन्न। ऊपर देखने पर होश उड़ जायेंगे। एक लाख बत्तीस हजार वॉट की हाईटेंशन लाइन ठीक मेनगेट के ऊपर से गुजर रही है। इसी लाइन के नीचे सामने लगे नीले रंग के खूबसूरत बोर्ड पर लिखा है ‘किड्स क्रैच’ यानी बच्चों का स्वीट होम। अंदाज लगा लीजिये कि बिल्डर कितने जुगाड़ू हैं। उन्होंने हाईटेंशन लाइन के नीचे ‘डिविनिटी होम्स’ बनाकर असंभव को संभव कर डाला है। केडीए और केस्को ने इस काम में कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिया। इस ‘डिविनिटी होम’ में तो साक्षात यम देवता ही निवास करेंगे।
विवेक त्रिपाठी
कानपुर। ‘डिविनिटी होम्स प्राइवेट लिमिटेड’ सिविल लाइंस निवासी प्रतिष्ठित गर्ग परिवार की कंपनी है। सिंगापुर और हांगकांग की तर्ज पर कंपनी विश्वविद्यालय के पीछे इंदिरानगर में छह एकड़ जमीन पर फ्लैट व डुप्लेक्स बना रही है। शहर में अवैध निर्माण की खाक छानते हुए संवाददाता यहां पहुंचा तो सेल्स हेड विशाल चंद्रा मिले। उन्होंने बताया चार बिल्डिंग में 360 फ्लैट बन रहे हैं। 19 डुप्लेक्स भी हैं। नक्शे के बारे में पूछने पर बोले पास है। अब सवाल आया हाईटेंशन लाइन का तो विशाल ने कहा एनओसी है। आप देख सकते हैं। एनओसी किसने दी, इस सवाल पर विशाल थोड़ा लड़खड़ाये। फिर बोले जो भी है, इसके लिये आपको सिविल लाइंस स्थित हमारे दफ्तर जाना होगा। फिर संभलते हुए बोले, वैसे भी हाईटेंशन लाइन के नीचे कोई कंस्ट्रक्शन नहीं करा रहे। ‘किड्स क्रेच’ के बोर्ड की तरफ इशारा किया तो बोले वहां लेबर के बच्चों को पढ़ाते हैं। संवाददाता ने पूछा, देख सकता हूं। विशाल बोले अभी तो वहां कुछ भी नहीं है। दायीं तरफ खाली पड़ी जगह के बारे में पूछने पर विशाल ने बताया वहां प्रपोज्ड शॉपिंग मॉल है। कंपनी के मालिक से बातचीत करने के लिये नंबर मांगा तो विशाल बोले, वो परिवार सहित एब्रॉड (विदेश) गये हैं। एक शादी के सिलसिले में। आते ही बात करा देंगे।

हाईटेंशन लाइन के नीचे कंस्ट्रक्शन नहीं हो रहा। इतना बड़ा रिस्क कोई ले ही नहीं सकता। यह तो आम आदमी के लिये बड़ा खतरा है। कंपनी सारे टेक्निकल नार्म्स पूरे कर रही है। विद्युत परिषद लखनऊ से एनओसी लेकर ही कंस्ट्रक्शन करा रहे हैं। लाइन के नीचे ओपन स्पेस है। दोनों तरफ तीस मीटर का डिस्टेंस है। आप नपवा सकते हैं।
राजीव चौहान, लीगल और मार्केटिंग हेड

मामला गंभीर है। हाईटेंशन लाइन के नीचे तो नक्शा ही पास नहीं होना चाहिये था। नक्शा किसने पास किया और स्थलीय निरीक्षण किसने किया, सचिव इसकी पड़ताल करेंगे। रिपोर्ट आने दीजिये, दोषी अफसर या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
राम मोहन यादव, वीसी, केडीए

दो टूक: शेखर अग्रवाल, एक्जिीक्यूटिव इंजीनियर, ट्रांसमिशन

हाईटेंशन लाइन के आसपास निर्माण के मानक क्या हैं
-चार तरह की लाइनें होती हैं। 400 केवीए कानपुर में कहीं नहीं है। यहां सिर्फ 220 केवीए, 132 और 33 केवीए की लाइन है। इसके अलग-अलग नियम और मानक हैं।

क्या हाईटेंशन लाइन के नीचे निर्माण कार्य हो सकता है
-नहीं, कभी नहीं। यह जगह कॉरीडोर कही जाती है। यहां सिर्फ खेती हो सकती है। यह लाइनें शहर के बाहरी क्षेत्र में होती है। चूंकि, शहर फैलता जा रहा है इसलिये यह लाइनें शहर में आ गई हैं। शहरी क्षेत्र में इसके नीचे सिर्फ ग्रीनबेल्ट बन सकती है। न कोई कालोनी बन सकती है न कोई नक्शा पास होगा।

अगर कोई नक्शा पास कराकर निर्माण कर रहा है तो
-ऐसा संभव नहीं है। पहली बात तो केडीए से नक्शा ही पास नहीं होगा। इसके बाद भी निर्माण हो रहा है तो पूरी तरह से अवैध है। जो निर्माण कर रहा है वह अपने रिस्क पर कर रहा है। आम भाषा में ऐसी लाइनों के नीचे हवाई करंट रहता है। यह करंट इतना होता है कि कभी-कभी बारिश के समय आसपास के बल्ब या ट्यूबलाइट जल जाते हैं।

डिविनिटी होम्स बना रही कंपनी केस्को से एनओसी लेने का दावा कर रही है।
-झूठ बोल रहे हैं। ऐसा हो ही नहीं सकता। बिल्डर ने बिना हाईटेंशन लाइन दिखाये केडीए से कंस्ट्रक्शन की क्लियरेंस ले ली होगी। हालांकि, परमीशन देने से पहले केडीए को भौतिक निरीक्षण करना चाहिये था। इसमें केडीए की गलती है।


यह हैं मानक
220 केवीए लाइन के आस-पास निर्माण
-ग्राउंड क्लियरेंस 7.5 मीटर, लाइन के नीचे दोनों तरफ भी इतना ही हिस्सा छूटा होना चाहिये

132 केवीए लाइन के आस-पास निर्माण
-ग्राउंड क्लियरेंस 6.1 मीटर, लाइन के नीचे दोनों तरफ भी इतना ही हिस्सा छूटा होना चाहिये

33 केवीए लाइन के आस-पास निर्माण
-ग्राउंड क्लियरेंस 5.1 मीटर, लाइन के नीचे दोनों तरफ भी इतना ही हिस्सा छूटा होना चाहिये
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