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नक्शा मकान का, बन रहे अपार्टमेंट

Kanpur

Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
117/482 पाण्डुनगर में 356 वर्ग मीटर के भूखंड पर दो मंजिला मिनी अपार्टमेंट बनाने का काम चल रहा है। पहली मंजिल पर लगे बोर्ड में किसी मंजू अग्रवाल का नाम लिखा है। संवाददाता अपार्टमेंट के बारे में जानने पहुंचा तो विनोद वर्मा नाम का एक व्यक्ति मिला। भवन का स्वीकृत नक्शा मांगने पर विनोद वर्मा ने अपनी पहुंच बतानी शुरू कर दी। कुछ सवाल दागे तो विनोद वर्मा ने अपार्टमेंट के मालिक राजेश अग्रवाल के साथ दफ्तर आकर मिलने की बात कही।
128/584 के ब्लाक किदवईनगर में निर्माण सामग्री आ चुकी है। काम भी चालू है। वहां मौजूद लोगों से पूछा तो पता चला विनोद मुरारका और जितेंद्र अग्रवाल यहां अपार्टमेंट बनवा रहे हैं। विनोद ने फोन पर बताया 356 वर्ग मीटर के भूखंड पर थ्री बेडरूम के 14 फ्लैट बनाने हैं।
117/एच-1/145 पाण्डुनगर में चार मंजिला मिनी अपार्टमेंट लगभग बनकर तैयार है। फिनिशिंग टच का काम चल रहा है। कर्मचारियों ने बताया रंजीतनगर के सोनू सरदार काम करा रहे हैं। फोन पर संवाददाता ने सोनू सरदार से नक्शे के बारे में पूछा तो उन्होंने शनिवार को मिलने की बात कही। कुछ ही मिनट बाद संवाददाता के पास केडीए के एक जेई का फोन आ गया। जेई ने बताया नक्शा पास है।
इन तीन उदाहरणों से स्पष्ट है बार एसोसिएशन ने केडीए अफसरों की कार्यप्रणाली पर अंगुली यूं ही नहीं उठाई है। एसोसिएशन ने शहर में 68 अवैध निर्माण की जो सूची कमिश्नर शालिनी प्रसाद को सौंपी है, ऊपर के तीन भूखंड भी उसमें शामिल हैं। अमर उजाला ने सूची की पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं। छोटे-छोटे बिल्डर कैसे केडीए के नियम-कानून से खेल रहे हैं, यह सूची उसकी बानगी भर है। हालांकि, इकीकत इस सूची से कहीं भयावह है। शहर में बन रहे छोटे-बड़े अपार्टमेंट में 95 प्रतिशत अवैध हैं। सूची के मुताबिक लाजपनगर, पाण्डुनगर, लखनपुर, आजादनगर, विष्णुपुरी, शारदानगर, किदवईनगर के एच ब्लाक, के ब्लाक, ओ ब्लाक, आनंदपुरी, एच-2, काकादेव के एम ब्लाक, नवीननगर, रावतपुर गांव, जूही कला बर्रा के डब्ल्यू-2, नौबस्ता के वसंत विहार, केशवनगर, गोविंदनगर के बी ब्लाक में अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहा है। यहां 200 वर्ग मीटर से 356 और 500 वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर बिल्डर मिनी अपार्टमेंट बना रहे हैं जबकि अपार्टमेंट या मल्टीस्टोरी बनाने के लिये भूखंड न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर का होना चाहिये। खास बात ये है कि इन अपार्टमेंट में से कई का नक्शा मकान के रूप में पास है और बन रहे हैं अपार्टमेंट। ये गोरखधंधा केडीए अफसरों की मिलीभगत से चल रहा है।


ये हैं मल्टीस्टोरी/अपार्टमेंट बनाने के नियम
-नक्शा ग्रुप हाउसिंग के रूप में पास होना चाहिये
-भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 2000 वर्ग मीटर होना चाहिये
-भूखंड कम से कम 12 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित हो
-3000 वर्ग मीटर या इससे अधिक भूखंड के 15 प्रतिशत हिस्से में पार्क हो
-पार्किगिं के लिये अलग से पार्किगिं नक्शा स्वीकृत होना चाहिये
-पार्किगिं के लिये अधिकतम 2.1 मीटर ऊंचा स्टिल्ट फ्लोर हो

बख्शीश से शुरू होता है वसूली का सिलसिला
केडीए के काउंटर पर नक्शा, डीड और फीस जमा करते वक्त ही बख्शीश के तौर पर वसूली का सिलसिला शुरू हो जाता है। सबसे पहले काउंटर पर बैठे कर्मचारी बेशर्म होकर बख्शीश मांग लेते हैं। बख्शीश मिलने के बाद फाइल बनाकर भवन सेक्शन भेज दी जाती है। यहां नक्शा और भूखंड के भौतिक सत्यापन के लिये फाइल संबंधित जोन के जेई के पास जाती है। पहले तो कुछ दिन जेई आवेदक को टहलाकर नखरे लेता है। इसके बाद एई और टाउन प्लानर से बातचीत कर रकम का तय-तोड़ करता है। रकम मिलने के बाद ही नक्शा पास होता है।

इनफोर्समेंट दस्ता कराता है निर्माण
नक्शा पास होने के बाद साइट पर निर्माण कार्य शुरू होता है। यहां फिर से शुरू होता है वसूली का सिलसिला। शहर में अवैध निर्माण पर नजर रखने और इसकी रोकथाम की जिम्मेदारी केडीए के इनफोर्समेंट दस्ते की है, हालांकि यह दस्ता वसूली पर ज्यादा ध्यान देता है। बिल्डरों को अवैध निर्माण की मौन सहमति देने के बदले मिलने वाली रकम इनफोर्समेंट दस्ते के जेई से केडीए के आला अफसरों तक बंटती है। कई दफा तो इनफोर्समेंट दस्ते के लोग खड़े होकर अवैध निर्माण कराते हैं। अपार्टमेंट में अगर आठ फ्लैट बनने हैं तो दस से बारह बनाये जाते हैं। बाकी के दो-चार फ्लैट की कमाई में बंदरबाट होती है।

एनओसी के झंझट में नहीं पड़ते छोटे बिल्डर
एक अपार्टमेंट बनाने से पहले फायर डिपार्टमेंट, जल संस्थान, नगर निगम, आपदा प्रबंधन, नजूल (अगर जमीन नजूल की है तो) और बिजली विभाग से एनओसी लेनी पड़ती है लेकिन गली-कूचों में छोटे-छोटे अपार्टमेंट बनाने वाले बिल्डर इस चक्कर में नहीं पड़ते। बार एसोसिएशन ने अवैध निर्माण की जो सूची अफसरों को सौंपी है, उसमें 80 प्रतिशत बिल्डर ऐसे हैं जिन्होंने किसी विभाग से एनओसी नहीं ली है। इसका खामियाजा फ्लैट खरीदने वालों को उठना पड़ता है।

अवैध निर्माण पर यह होती है कार्रवाई
अवैध निर्माण के मामले में केडीए उत्तर प्रदेश नगर विकास योजना 1973 की धारा 26, 27, 28 के तहत कार्रवाई करता है। धारा 26 में चालान, धारा 27 चालान, मामले की सुनवाई, नोटिस और ध्वस्तीकरण का आदेश तथा धारा 28 क में सीलिंग का प्रावधान है। केडीए इस नियम के तहत अवैध निर्मित भवन अथवा उसका अवैध हिस्सा सील कर सकता है। सील भवन अथवा अवैध हिस्से का सर्वेक्षण कर जुर्माना की धनराशि तय की जाती है। यह राशि चुकाने पर भवन अथवा उसके अवैध हिस्से की सील खोल दी जाती है। अगर अवैध निर्माण केडीए द्वारा तय मानकों से अधिक है तो इसे ध्वस्त करने का भी प्रावधान है। हालांकि, बीते पांच वर्ष में एकाध छोटे-मोटे मामलों में ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है।

बार एसोसिएशन ने अवैध निर्माण की जो सूची दी है, उसके साथ ही शहर में हो रहे अन्य निर्माण कार्यों की जांच चल रही है। सभी जोन प्रभारियों से अवैध निर्माण का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट मंगा ली गई है। कई गड़बडि़यां मिली हैं। अब अवैध भवनों के नक्शा व अन्य दस्तावेज जांचे जा रहे हैं। सभी अवैध निर्माण सील किये जायेंगे। अगर कोई सीलिंग के बाद भी काम जारी रखता है तो एफआईआर दर्ज कर बिल्डरों को जेल भेजा जायेगा।
राकेश कुमार, सचिव
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