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विराट के नाम है शस्त्र लाइसेंस

Kanpur

Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
कानपुर। घंटाघर के जमुना होटल के कर्मचारी पर गोली चलाने के आरोप में पकड़े गए भाजपा नेता विराट विक्रम सिंह ने मीडिया के सामने कहा था कि उसके नाम कोई शस्त्र लाइसेंस नहीं है। लेकिन, तफ्तीश में पता चला है कि आरोपी का नाम काकादेव थाने के अभिलेखों में शस्त्र लाइसेंसधारकों की सूची में दर्ज है। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि होटल कर्मी पर क्या वाकई तमंचे से गोली चलाई गई थी या पुलिस ने कोई खेल किया है।
शुक्रवार की देर रात होटल कर्मी विजय को गोली मारने के आरोप में शास्त्री नगर निवासी विराट विक्रम सिंह भदौरिया, गल्ला मंडी दयाल बाग थाना न्यू आगरा निवासी पंकज कटारिया और क्यू ब्लाक शारदा नगर निवासी अमित सिंह गिरफ्तार हुए थे। पुलिस ने बताया था कि तमंचे से विराट ने गोली मारी है। प्रेस कांफ्रेस में भी सीओ कलक्टरगंज जगदीश सिंह, एसओ आनंद मिश्रा एक स्वर में बोले थे कि विराट के नाम कोई शस्त्र लाइसेंस नहीं है। विराट ने भी यही बात दोहराई थी। इसी आधार पर पुलिस ने तफ्तीश को आगे बढ़ाया। अब काकादेव थानाध्यक्ष गोपी चंद्र यादव ने बताया कि विराट के नाम वर्ष 2008 में तत्कालीन डीएम के आदेश पर रिवाल्वर/पिस्टल का लाइसेंस जारी हुआ है। काकादेव थाने के अभिलेखों में शस्त्रधारियों की सूची में क्रमांक संख्या 868/2008 में विराट विक्रम सिंह के नाम शस्त्र लाइसेंस दर्ज है। लेकिन, विक्रम ने लाइसेंस के आधार पर पिस्टल/ रिवाल्वर खरीदा है, इसका जिक्र अभिलेखों में नहीं है। इस खुलासे से प्रत्यक्षदर्शियों के दावे में दम दिखने लगा है, जिसमें कहा गया था कि विजय को रिवाल्वर से गोली मारी गई थी। सूत्रों की माने तो गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाने वाले एक सिपाही ने विराट का शस्त्र लाइसेंस बचाने की रणनीति पहले तैयार कर ली थी।
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निरस्त होगा शस्त्र लाइसेंस
‘विराट विक्रम सिंह के नाम यदि कोई शस्त्र लाइसेंस हैं तो उसे निरस्त कराया जाएगा। काकादेव थाने से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट आने पर विराट के शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण की संस्तुति डीएम से की जाएगी।
-अमिताभ यश, डीआईजी नगर।
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ये उठ रहे सवाल
क्या पुलिस ने सेटिंग के बाद विराट और उसके साथियों को पकड़ा था?
आरोपियों से 315 बोर का तमंचा बरामद हुआ तो खोखा कहां गया?
बगैर पड़ताल के पुलिस ने आरोपियों की बात कैसे सही मान ली?
सीओ और थानेदार क्या इसमें शामिल है अथवा गुमराह किए गए हैं?
4 दिन के बाद भी कलक्टरगंज पुलिस क्यों नहीं जान सकी शस्त्र लाइसेंस के बारे में?

पुलिस की लापरवाही उजागर हुई
काकादेव थाने के अभिलेखों में विराट के नाम शस्त्र लाइसेंस दर्ज है, लेकिन कौन का शस्त्र खरीदा है, इसके बारे में जिक्र नहीं है। इस बारे में काकादेव पुलिस ने छानबीन करना भी जरूरी नहीं समझा। जबकि इस दौरान विधानसभा, निकाय चुनाव हुए। तब लाइसेंसधारियों को शस्त्र जमा कराने के निर्देश शासन स्तर पर दिए गए थे। यदि वह शस्त्रधारियों के बारे में छानबीन करती तो विराट के शस्त्र लाइसेंस का पता भी पहले ही चल जाता।
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