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मनमाने ढंग से फीस बढ़ाई तो चलेगा कानूनी डंडा

Kannauj

Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
कन्नौज। मनमाने तरीके से फीस वृद्धि करने वाले निजी स्कूलों के संचालकों की नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी ने नियमों का सख्ती से पालन कराने का फरमान जारी दिया है।
कन्नौज जिला मुख्यालय के साथ ही गुरसहायगंज, तिर्वा, छिबरामऊ क्षेत्र में आईसीएसई, सीबीएसई, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त ज्यादातर अशासकीय विद्यालय फीस निर्धारण में मनमानी कर रहे हैं। इसकी तमाम शिकायतें पहुंचीं। इसी के बाद जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक से बिंदुवार जानकारी हासिल करने के बाद शुल्क निर्धारण संबंधी शासनादेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया।
डीएम की तरफ से भेजी गई चिट्ठी में लिखा है कि जनपद में यह देखा जा रहा है कि तमाम शिक्षण संस्थाएं छात्रों से मनमाने ढंग से अभिभावकों से विचार-विमर्श किए बिना ही शुल्क की वसूली करती हैं। बार-बार अप्रत्याशित रूप से फीस बढ़ा दी जाती है। इससे अभिभावकों के वित्तीय भार में वृद्धि हो जाती है और छात्रों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ता है। मनमाने तरीके से शुल्क बढ़ाकर वसूली करना लोकनीति के विरुद्ध है। ऐसे विद्यालय प्रत्येक वर्ष छात्रों से शुल्क के रूप में प्राप्त धनराशि में से एक बहुत बड़ी धनराशि को सरप्लस फंड के रूप में एकत्रित करके इसका प्रयोग संस्था के विकास में करने के बजाय अन्यत्र स्थानांतरित कर देते है। विद्यालयों द्वारा शिक्षण शुल्क एवं अन्य मदों में लिए जाने वाले शुल्क का कोई तार्किक औचित्य एवं आधार भी नहीं बताया जाता है।
डीएम ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी अफसरों की समिति ऐसी शिक्षण संस्थाओं की फीस का निर्धारण स्कूलों द्वारा छात्रों को उपलब्ध कराई जाने वाले संसाधन व सुविधाओं के आधार पर करे। शुल्क निर्धारण में स्थानीय वस्तुस्थिति व स्कूल आवश्यक्ताओं की भी पड़ताल करे। फीस बढ़ाने के संबंध में निर्णय लेते समय विद्यालय प्रशासन शैक्षिक व शिक्षणेतर कर्मचारियों को छठे वेतनमान व अन्य भत्ते दिए जाने का ब्यौरा पेश करे। विद्यालय के पास उपलब्ध सरप्लस फंड का भी खुलासा करे। फीस उन्हीं मदों के तहत ली जाए जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित हैं।
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