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डाक्टरों के तबादले से मरीज बेहाल

Kannauj

Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
कन्नौज। जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर होती जा रही हैं। डाक्टरों के तबादले एक के बाद एक होते जा रहे हैं। इससे जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी तक में डाक्टरों की कमी हो गई है।
स्वास्थ्य महकमे से मिली जानकारी के अनुसार एक-दो महीने के अंदर फिजीशियन व सर्जन आशीष मिश्रा, एमबीबीएस शैलेंद्र शाक्य, एसीएमओ डा. लाखन सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. सुमनसुधा गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. इंदू कटियार, एमबीबीएस डा. इरफान अहमद, नाक, कान व गला विशेषज्ञ डा. रुद्रसेन, हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. एसपी कटियार, सर्जन डा. सुनील चौरसिया, सर्जन डा. सुनील कुमार सिंह, कार्डियोलाजिस्ट डा. सुनील कात्याल, टीबी चेस्ट विशेषज्ञ डा. अवधेश कटियार, बाल रोग विशेषज्ञ डा. हरीश अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. रीतू कात्याल, हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. घनश्याम सादीजा, सर्जन डा. राघवेंद्र सिंह, नेत्र सर्जन डा. संजय बाबू, बाल रोग विशेषज्ञ डा. श्रीओम का तबादला गैर जनपद के लिए हो गया है। इनमें से ज्यादातर डाक्टर गैर जनपद जा चुके हैं। नए डाक्टरों के न आने की वजह से संकट गहरा गया है।
सूत्र बताते हैं कि कई डाक्टरों का जबरिया तबादला कराया गया है, जबकि तमाम डाक्टरों ने जुगाड़ फिट करके स्थानांतरण कराया है। वहीं, परिजनों को आगे करके निजी नर्सिंग होम चला रहे कई डाक्टरों को नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने भी खुन्नस में कई डाक्टरों के तबादले करवाए हैं, जबकि खुद एक दशक से ज्यादा समय से डटे हैं। खास बात यह है कि इस बीच कई डाक्टरों के तबादले कन्नौज जनपद के लिए शासन ने किए, लेकिन उनमें से ज्यादातर ने आकर ज्वाइन ही नहीं किया। सीएमओ डा. राकेश रमन की मानें तो जिले में निरंतर तबादले से डाक्टरों की कमी उत्पन्न हो गई है। उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया है। जिला चिकित्सालय के सीएमएस डा. हीरा सिंह कहते हैं जब तक नए डाक्टरों की तैनाती नहीं होगी तब तक हालात सुधरने वाले नहीं।

जल्द समाधान का आश्वासन
कन्नौज। जनपद के अस्पतालों में डाक्टरों की कमी की समस्या मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष 25 मार्च को लखनऊ में और 12 जून को कन्नौज आगमन पर रखी गई थी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि वैसे तो पूरे प्रदेश में डाक्टर कम हैं। कन्नौज में डाक्टरों की कमी की समस्या का समाधान जल्द कराया जाएगा।

निजी अस्पतालों की चांदी
डाक्टरों की जबरदस्त कमी के कारण विकलांग व आम लोग बेहद परेशान हैं। जिला अस्पताल समेत सीएचसी व पीएचसी में राहत न मिलने पर वे निजी अस्पतालों की शरण में जाने को मबजूर होते हैं। कुछ कानपुर के लिए भागते हैं तो कुछ को फर्रुखाबाद जाना पड़ता है।
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