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...तो अगले साल फिर फेंका जाएगा हजारों कुंतल आलू!

Kannauj

Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
कन्नौज। चुनावी वादों पर भरोसा करना आलू किसानों को मंहगा पड़ने वाला है। आलू फैक्ट्री और मेगा फूड पार्क की स्थापना की कौन कहे, प्रशासन अभी तक इसके लिए जमीन तक नहीं ढूंढ पाया है। उधर किसानों ने राजनीतिज्ञों पर भरोसा करके बंपर क्षेत्रफल में आलू बो दिया। अब अगले साल सितंबर, अक्तूबर में जब कोल्ड स्टोरेज खाली करना पड़ेगा तो किसानों के सामने आलू फेंकने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा। पिछले साल हजारों बोरा आलू सड़कों, जंगलों और खेतों में फें का जा चुका है। हालत यह है कि विभिन्न उद्यमियों के आलू आधारित उद्योग पर सब्सिडी के बारे में पूछने पर शासन-प्रशासन चार महीने बाद भी उन्हें जवाब नहीं दे सका है।
दो दशक से अनुत्तरित आलू आधारित उद्योग का सवाल जिले के करीब 50 हजार आलू किसानों को फिर मथ रहा है। दो दशक से उद्योग लगवाने की कोशिश का नतीजा आज भी जीरो है। मुख्यमंत्री की विशेष प्राथमिकता वाली आलू फैक्ट्री और मेगा फूड पार्क बनाने की योजना भी फाइलों में कैद है। इसीलिए खतरे की घंटी बज गई है। सब्सिडी पैटर्न और शासन से मिलने वाली सहूलियतों की नीति निर्धारित न होने का खामियाजा किसान भुगतेंगे। वर्ष 2003 में 32000 हेक्टेयर में बोया जाने वाला आलू अब 49000 हेक्टेयर में लहलहा रहा है, लेकिन खपत के लिए कोई उद्योग नहीं लग सका।
नब्बे के दशक से आलू की समस्या पैदा हुई, जो समय के साथ विकराल होती गई। किसान बताते हैं कि 1999 में जब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव संसदीय चुनाव लड़े तो आलू किसान जोरदार मुद्दा बने। आलू फैक्ट्री लगवाने के वादे हुए। इसके बाद उनके बेटे अखिलेश यादव लगातार तीन बार सांसद चुने गए। वर्ष 2002-03 में सपा सरकार बनने पर सांसद अखिलेश यादव ने कन्नौज में आलू पर आधारित उद्योग लगवाने के लिए पहल की, पर किसानों का सपना साकार नहीं हुआ। यूपी के सीएम बनने के बाद और पत्नी डिंपल यादव के सांसद बनने के बाद जीत का प्रमाणपत्र लेने आए अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान आलू पर आधारित उद्योग लगवाने की बात दोहराई।
इसके बाद उद्यान विभाग ने कन्नौज में आलू पर आधारित उद्योग लगवाने के लिए चिप्स, वोदका, आलू पाउडर, भुजिया आदि इंडस्ट्री लगाने के इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजे। कलकत्ता की पोटैटो किंग कंपनी समेत कई उद्यमियों ने संपर्क साधा। उद्योगपतियों ने सवाल दागा कि कितनी सब्सिडी मिलेगी और अन्य क्या सुविधाएं मिलेंगी? इसका जवाब करीब चार महीने बीतने के बाद भी शासन-प्रशासन नहीं दे पाया। कन्नौज में मेगा फूड पार्क बनाकर विभिन्न फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की घोषणा सरकार कर चुकी है पर जिला प्रशासन करीब दो महीने बाद भी 50 से 100 एकड़ जमीन नहीं खोज पाया है। सपा विधायक विजय बहादुर पाल कहते हैं कि आलू किसानों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से वार्ता कर किसानों की समस्या के समाधान की मांग करेंगे।

ॎ यूपी में सबसे ज्यादा 98 कोल्डस्टोरेज कन्नौज में संचालित हैं।
ॎ एक दशक के दौरान करीब 40 नए कोल्डस्टोरेज बनकर तैयार हुए हैं।
ॎ इस बार आलू बुवाई का क्षेत्र 7 हजार हेक्टेयर बढ़ा है, जो एक रिकार्ड है।
ॎ कन्नौज जिले में इस बार सर्वाधिक 49 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल बोई गई है।

विस चुनाव में खूब गरमाया था आलू मुद्दा
ॎ बीते विधानसभा चुनाव में आलू का मुद्दा खूब गरमाया था। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव को छिबरामऊ में किसानों ने बीच रास्ते में खड़े होकर बस से उतरने को मजबूर किया था। राहुल गांधी ने खेत पर जाकर सड़ने के लिए फेंके गए आलू को देखा। कन्नौज व तिर्वा की जनसभाओं में आलू पर जमकर बोले और विपक्षी दलों को कोसा। बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भी जनसभाओं में आलू किसानो की दुर्दशा उठाई। भाषणों की गूंज से आलू किसानों की चरचा प्रदेश से लेकर देश तक में पहुंची, पर समस्या जस की तस है।


फिर भेजेंगे रिमाइंडर- डीएचओ
कन्नौज। जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव स्वीकारते हैं कि आलू की मंदी फिर मुसीबत बन सकती है। वे कहते हैं कि आलू पर आधारित उद्योग लगवाने के लिए कई कंपनियां इच्छुक हैं। कुछ स्थानीय पूंजीपति भी आगे आए हैं, पर उद्योग स्थापित करने पर मिलने वाली सब्सिडी व सुविधाओं की स्थिति साफ न होने से आगे की प्रक्रिया अटक गई है। उनका कहना है कि इस बाबत शासन को पुन: रिमाइंडर भेजा जाएगा।

जनप्रतिनिधि नहीं कर रहे उचित पैरवी
कन्नौज। बीते एक दशक से आलू उद्योग की स्थापना कराने के लिए सक्रिय कोल्डस्टोरेज मालिक एवं कृषि निर्यात जोन के सदस्य रहे राजीव टंडन बताते हैं कि स्थानीय राजनीतिकों के स्तर से उचित पैरवी नहीं हो रही है। क्षेत्रीय विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि ईमानदारी से सक्रिय हों तभी उद्योग स्थापित होंगे और किसानों की समस्या का समाधान होगा।

नौ साल पहले मुलायम ने भेजा था पत्र
ॎ सपा मुखिया एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 सितंबर 2003 को तब कृषि निर्यात जोन के सदस्य राजीव टंडन को पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि उनकी ओर से भेजे गए सुझावों का उन्होंने अध्ययन किया। क्षेत्रीय विकास के लिए ये व्यवहारिक हैं। इस विषय पर वे शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दे रहे हैं।
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