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चित्रों ने दिया बेटी बचाओ का संदेश

Jhansi

Updated Sun, 26 Jan 2014 05:51 AM IST
झांसी। अमर उजाला की अनूठी पहल ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान के तहत राजकीय संग्रहालय के सहयोग से बुधवार को चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें कलाकारों ने चित्रों के जरिये बेटी बचाओ का संदेश दिया।
राजकीय संग्रहालय में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी तनवीर जफर अली ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसा पाप करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि वह भी किसी औरत की वजह से ही इस दुनिया में आए हैं। दुनिया का अस्तित्व बेटी पर ही टिका है। बेटियां आज समाज के हर क्षेत्र में अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। उनकी उपेक्षा करने वाले अज्ञानी हैं। लोगों में बेटियों के प्रति जागरूकता पैदा करने में इस तरह के अभियानों की महती भूमिका है। इस दौरान डीएम ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही कलाकारों से उनके द्वारा चित्रों में दिए गए संदेशों के बारे में जाना।
प्रदर्शनी में कलाकार सुनील मिश्रा, यशवंत जोशी, विनय कुमार, प्रदीप रायकवार व सुरेश चंद्र विश्वकर्मा ने महिलाओं पर केंद्रित चित्रों का प्रदर्शन किया, जिनके जरिये महिलाओं के जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूते हुए उनकी समस्याओं व अधिकारों को दर्शाया। साथ ही तूलिका के माध्यम से महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज भी बुलंद की। कलाकारों ने कन्या भ्रूण हत्या को सामाजिक व कानूनन रूप से अपराध बताते हुए लोगों से इसका विरोध करने की अपील की।
इस मौके पर वरिष्ठ चित्रकार कुंती हरीराम, कामिनी बघेल, किशन सोनी व जगदीश लाल समेत राजकीय संग्रहालय की उमा पाराशर, नवरत्न लाल गुप्ता समेत तमाम कला प्रेमी मौजूद रहे।

जंजीरों में जकड़ी है बेटी
झांसी। प्रदर्शनी में कलाकार सुनील मिश्रा, यशवंत जोशी, विनय कुमार, प्रदीप रायकवार व सुरेश चंद्र विश्वकर्मा द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई इंस्टोलेशन आर्ट का भी प्रदर्शन किया गया। इसमें महिला स्वरूप को लहूलुहान अवस्था में जंजीरों में जकड़ा दर्शाया गया। महिला के एक पैर में दहेज की बेड़ी पड़ी हुई थी, तो दूसरे में रुढ़िवादी परंपराओं की। महिला के एक पैर को वृक्ष की जड़ का स्वरूप देकर उसे प्रकृति का मूल आधार बताया गया। समाज के विभिन्न प्रहारों से उसका शरीर रक्त रंजित था, बावजूद हाथ में वह देश के स्वाभिमान का प्रतीक तिरंगा झंडा थामे हुए थी। कलाकारों की इस इंस्टोलेशन आर्ट को कला प्रेमियों द्वारा खूब पसंद किया गया।

बेटी के बगैर दुनिया अधूरी
झांसी। घड़ी चाहे सोने की ही क्यों न हो, परंतु बगैर बैटरी के वह अधूरी है। इसी प्रकार धरती कितनी ही सुंदर क्यों न हो, लेकिन वह बिना बेटी के अधूरी है। मास्टर ऑफ फाइन आर्ट के विद्यार्थी चित्रकार सुनील मिश्रा ने प्रदर्शनी में लगाए गए अपने चित्रों के जरिये कुछ इसी तरह का संदेश दिया। प्रोफेशन आर्टिस्ट बनने की तमन्ना रखने वाले सुनील ने अपने एक चित्र में महिला के गर्भ में समूचे ब्रह्मांड को दिखाते हुए बेटी को सृष्टि का मूल आधार बताया।

लड़कियों से रोशन होती है दुनिया
झांसी। घर का चिराग केवल लड़के ही नहीं होते, बल्कि लड़कियां भी घर में उजाला फैलाती हैं। उनकी ममता और प्रतिभा की लौ से ही दुनिया रोशन है। ड्राइंग एंड पेंटिंग विषय में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके यशवंत जोशी के चित्र इसी तरह का संदेश देते नजर आए। भविष्य में प्रोफेशनल पेंटिंग की बुलंदियों को छूने की चाहत रखने वाले यशवंत ने अपने एक चित्र में नारी शक्ति की आजादी की पैरोकारी करते हुए बेटी को ताले में बंद दर्शाया।

प्रेम से दुनिया का दिल जीतती है बेटी
झांसी। जिस तरह से कली चारों ओर सुगंध बिखरने के लिए फूल बनने को बेताब होती है, ठीक उसी तरह मां के गर्भ में रहने वाला कन्या भ्रूण भी बाहर निकलकर अपने प्रेम से दुनिया का दिल जीतने की चाहत रखता है। फाइन आर्ट में स्नातक चित्रकार विनय कुमार के चित्रों में इसी तरह के संदेश देखने को मिले। कन्या भ्रूण हत्या पर करारा प्रहार करते हुए उन्होंने अपने एक चित्र में समाज की सूली पर लटकी मां के गर्भ में छुरा भोंकते हुए दिखाया।

बेटी की रक्षा को बढ़ाएं हाथ
झांसी। ऊपर से कन्या भ्रूण गिर रहा है और नीचे नुकीला हथियार रखा हुआ है, लेकिन दोनों के बीच एक हाथ आ जाता है, जो उस भ्रूण की रक्षा करता है। मास्टर ऑफ फाइन आर्ट के विद्यार्थी प्रदीप रायकवार ने अपने इस चित्र के जरिये बेटी बचाओ का अनूठे अंदाज में संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज में आज की यही स्थिति है। जिन पर जागरूकता अभियानों के जरिये ही अंकुश लगाया जा सकता है। चित्र के जरिये यही दर्शाने की कोशिश की गई है।

कन्या भ्रूण की व्यथा बताई
झांसी। ऊपर एक बोतल से दूध की बूंद टपक रही है और नीचे खून से लथपथ कई हाथ खड़े हुए हैं, जो उस बूंद की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से यह दूध उन तक नहीं पहुंच पाता है। यह व्यथा है कन्या भ्रूण की, जिन्हें बाहर निकलने से पहले ही खत्म कर दिया जाता है। बैचलर ऑफ फाइन आर्ट के विद्यार्थी चित्रकार सुरेश चंद्र विश्वकर्मा ने अपने चित्रों के जरिये कुछ इसी अंदाज में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अलख जगाई।

आज कठपुतली और मैजिक शो
झांसी। बेटी ही बचाएगी अभियान के तहत बृहस्पतिवार को अमर उजाला व राजकीय संग्रहालय के तत्वावधान में राजकीय संग्रहालय में प्रात: 10 बजे से चित्रकला प्रदर्शनी शुरू होगी। जबकि, अपराह्न डेढ़ बजे से बेटियों पर आधारित कठपुतली व मैजिक शो होगा। इसके बाद अपराह्न तीन बजे से बेटी पर केंद्रित फिल्म का प्रदर्शन होगा।
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