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गहरी हैं भारतीय संस्कृति की जड़ें: पद्मश्री देवयानी

Jhansi

Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST

झांसी। फ्रांस छोड़कर भारत को अपना घर बनाने वाली नृत्यांगना पद्मश्री देवयानी को उम्मीद है कि भारतीय कला व संस्कृति के वैभव का युग फिर से लौटेगा। इस संस्कृति की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि पाश्चात्य संस्कृति इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
झांसी महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने आईं नृत्यांगना व कोरियोग्राफर देवयानी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भरत नाट्यम भाव भंगिमाओं पर आधारित पूर्ण नृत्य है, जिसमें संस्कृति, संगीत व कलाकारी का समावेश है। बिना कुछ कहे अंगों की भंगिमाओं से सब कुछ देना, सिर्फ भारतीय संस्कृति व संगीत की विशेषता है। श्रृंगार, प्रेम और भक्ति का अनूठा संगम इस नृत्य में देखने को मिलता है। कह सकते हैं भरत नाट्यम कला की संपूर्ण अवस्था है। उन्होंने बताया कि जब वह 18 वर्ष की थीं, तब अपनी मातृभूमि पेरिस (फ्रांस) में पारंपरिक वैले करतीं थीं। इसके बाद उन्होंने माडर्न वैले सीखा, फिर स्पैनिश वैले, इसके बाद उनको भरत नाट्यम में रुचि पैदा हुई। करीब तीन साल पेरिस में रहकर भारतीय नृत्य सीखा, फिर भारत आ गईं। यहां दो गुरु बनाए, पर दोनों की असमय मौत से उनके लक्ष्य में दिक्कत आई, लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी और सब कुछ भरत नाट्यम के लिए समर्पण का संकल्प लेकर नई दिल्ली में जम गईं। एक डाक्यूमेंट्री फिल्म में भाव भंगिमा पर आधारित पूर्ण डांस देखा तो उससे सीखने की रुचि बढ़ती चली गई।
उन्होंने बताया कि अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड जैसे देशों में रहने वाले भारतीय अपने देश के नृत्य, संगीत और संस्कृति से प्यार करते हैं। वह देश के विभिन्न स्थानों पर होने वाले बड़े- बड़े महोत्सवों में हिस्सा ले चुकी हैं। वर्ष 2006 में वह भेल में अपना कार्यक्रम दे चुकी हैं। भारत के बाहर भी कई देशों में प्रोग्राम दे चुकी हैं। देवयानी ने तेलगू फिल्म ‘ए गर्ल फ्रॉम अमेरिका’ में कुचीपुड़ी नृत्यांगना की भूमिका निभाई। हिंदी फिल्म ‘इंग्लिश- विग्ंिलश’ में श्रीदेवी की भूमिका उन्हें काफी पसंद है। नयी पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति से बचाने व अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहने के लिए वह चाहती हैं कि माता- पिता अपने बच्चों को संस्कारित बनाएं।
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