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पीएचडी: छूटे विषयों की परीक्षा विश्वविद्यालय स्तर पर

Jhansi

Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST

झांसी। पीएचडी के छूटे हुए विषयों में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय स्तर से दाखिला दिया गया। उच्चशिक्षा विभाग के निर्देश पर शीघ्र ही फूड साइंस व इंजीनियरिंग विषय के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। हालांकि, इंजीनियरिंग व बायोमेडिकल साइंस विषय के संबंध में अभी निर्णय नहीं लिया गया है।
सत्र 2012-13 में पीएचडी में प्रवेश के लिए डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद ने राज्य स्तर पर पीएचडी संयुक्त प्रवेश परीक्षा का संचालन किया था। जून माह में आयोजित प्रवेश परीक्षा में विज्ञान, कला, मैनेजमेंट, कामर्स, इतिहास, समाज विज्ञान, संस्कृति, विधि, हिंदी, संगीत आदि करीब दो दर्जन से ज्यादा विषयों के परीक्षार्थी शामिल हुए थे। प्रवेश परीक्षा से एक दर्जन से ज्यादा विषयों के परीक्षार्थी बाहर रह गए, जिन्होंने उच्च शिक्षा विभाग का दरवाजा खटखटाया। इतना ही नहीं छात्रों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से भी उक्त विषयों की परीक्षा न कराए जाने एवं छात्रों को पीएचडी से दूर रखे जाने की शिकायत की। छात्रों का अहित होता देख यूजीसी ने शासन व डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद को पुन: प्रवेश परीक्षा कराए जाने का आदेश जारी किया। लेकिन, राज्य के अलग - अलग विश्वविद्यालयों में कई ऐसे कोर्स व विषय संचालित हैं, जो दूसरे विश्वविद्यालयों में नहीं हैं। ऐसे में पुन: राज्य स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के फैसले को अव्यावहारिक मानते हुए शासन ने सभी विश्वविद्यालयों को यह अधिकार दे दिया है कि वह अपने यहां संचालित विषय में पीएचडी के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा करा लें। इसी क्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में फूड टेक्नोलॉजी व फार्मेसी विषय में प्रवेश परीक्षा कराए की तैयारी पूरी कर ली गई है। हालांकि, बायोमेडिकल साइंस व इंजीनियरिंग के संबंध में भी परीक्षा कराए जाने का निर्णय लिया जाना बाकी है।
पीएचडी सेल की इंचार्ज प्रो. रोचना श्रीवास्तव का कहना है कि प्रवेश परीक्षा के संबंध में शीघ्र ही अधिसूचना जारी की जाएगी।



इंजीनियरिंग के एसएफएस शिक्षक परेशान
झांसी। इंजीनियरिंग विभाग को संचालित होते हुए एक दशक से ज्यादा समय बीत गया है। विभाग में आधा दर्जन शिक्षक ऐसे हैं, जो पीएचडी गाइड बनने के योग्य हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपना आवेदन भी जमा कर रखा है, लेकिन शिक्षकों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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