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स्टाफ की कमी से जूझ रहा भारतीय पुरातत्व विभाग

Jhansi

Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
झांसी। ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करने वाला विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। यहां स्टाफ पहले से ही कम था, गत दिवस दो और कर्मचारियों के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण संख्या और कम हो गई। ऐसे में प्राचीन स्मारकों की देखरेख की चुनौती बढ़ गई है।
रानी झांसी के शौर्य और वीरता का साक्षी किला, रानी महल, लक्ष्मी तालाब के किनारे स्थित महाराजा गंगाधर राव की छतरी, झोकन बाग स्मारक और इलाहाबाद बैंक चौराहा स्थित स्मारक की देखभाल का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास है। स्मारकों की देखभाल के लिए तीन शिफ्टों में दो- दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है और एक कर्मचारी को रिलीवर के रूप में रखना पड़ता है। इस हिसाब से पांच स्मारकों पर कम से कम 35 कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन विभाग में बमुश्किल 20 कर्मचारी हैं, उसमें भी तीस नवंबर को दो और कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए। ऐसे में सभी स्मारकों की देखभाल सही तरीके से नहीं हो पा रही है। खासकर झोकन बाग स्थित स्मारक बदहाल है। स्वतंत्रता की लड़ाई के गवाह इस स्थल पर देशभक्तों ने ब्रितानियों को सामूहिक रूप से मौत के घाट उतार दिया था। वर्तमान में इस स्मारक के चारों ओर अतिक्रमण है। नियमित साफ- सफाई न होने के कारण यहां गंदगी फैली रहती है। बाहर से आने वाले सैलानी चाहते हुए इसे देखने को नहीं पहुंच पाते हैं। कमोबेश यही हाल इलाहाबाद बैंक चौराहा स्थित स्मारक का है। महाराजा गंगाधर राव की छतरी की देखरेख भी ठीक तरह से नहीं हो पा रही है। यदि विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ हो तो ऐतिहासिक स्मारकों की देखभाल सही तरीके से होने लगेगी और पर्यटक भी यहां पहुंचने लगेंगे, जिससे विभाग की आमदनी बढ़ जाएगी।


वाहन स्टैंड में गुम हो रहा रानीमहल का सौंदर्य
झांसी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कार्यालय रानीमहल में है। साथ ही यहां प्राचीन कलाकृतियां भी रखी हुई हैं, जिन्हें देखने के लिए स्थानीय व बाहर के पर्यटक आते हैं। लेकिन, महल के गेट के दोनों ओर दिन भर वाहन खड़े रहते हैं। एक तरह से यह जगह अघोषित वाहन स्टैंड में तब्दील हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी का ध्यान इस ओर नहीं है कि आखिर प्राचीन स्मारक के बाहर किसके आदेश पर गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं।

‘स्टाफ कम है, लेकिन व्यवस्थाएं सुचारु चल रही हैं। इतने कर्मचारी तो हैं ही कि स्मारकों की देखरेख होती रहे।’
- डी के जायसवाल, सर्वेक्षण सहायक पुरातत्व विभाग
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