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नौ दिन चले अढ़ाई कोस

Jhansi

Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
झांसी। औद्योगिक इकाइयों की अनावासीय संपत्तियों पर गृहकर निर्धारण को लेकर उद्योगपतियों और नगर निगम के बीच चल रहा गतिरोध समाप्त नहीं हो सका है। मामला शासन स्तर तक जाने के बाद भी न तो उद्योगपतियों को राहत मिल सकी है और न नगर निगम कर आरोपित कर सका है। ऐसे में राजस्व की हानि तो हो ही रही है, उद्योगपतियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम क्षेत्र में बिजौली औद्योगिक क्षेत्र, ग्रोथ सेंटर और ग्वालियर रोड पर पचास से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। इनकी अनावासीय संपत्ति पर कर निर्धारित किया जाना है। उद्योगपति इसमें नियमानुसार राहत चाहते हैं, जिसके लिए वह लंबे समय से प्रयासरत हैं। 31 मार्च 2012 को हुई उद्योग बंधु की मंडलीय बैठक में तय किया गया था कि बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारी व नगर निगम के अफसर बैठक कर कर निर्धारण में आ रहे गतिरोध का समाधान करें। इस पर 03 मई को बैठक हुई, जिसमें चार बिंदु तय किए गए। लेकिन, 28 मई को चैंबर द्वारा स्पीड पोस्ट के माध्यम से अपर नगर आयुक्त को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया कि बैठक में तय किए गए औद्योगिक आस्थानों में स्थापित इकाइयों के कुल क्षेत्रफल की भूमि का मूल्य पंजीकृत किए गए लीज डीड के आधार पर मान्य होगा। औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर निजी क्षेत्र से क्रय की गई भूमि जिलाधिकारी सर्किल रेट पर तय होगी। अनावासीय संपत्तियों के परिसर के कुल क्षेत्रफल में रिक्त पड़े क्षेत्र का केवल 500 वर्ग मीटर ही कर निर्धारण के लिए आकलित होगा। भवन निर्माण की अवधि को देखते हुए आवासीय संपत्ति की भांति मूल हृास (डिप्रिसिएशन) की सुविधा दी जाएगी तथा अनावासीय संपत्तियों का कर निर्धारण किराया पद्धति के अनुसार नहीं किये जाने का उल्लेख विभाग द्वारा जारी कार्यवृत्त में नहीं किया गया है। इसके बाद से मामले को लेकर नगर निगम और चैंबर के पदाधिकारियों के बीच वार्ता तो हुई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। पिछले दिनों उद्योग बंधु के संयुक्त अधिशासी निदेशक कौशल राज शर्मा ने नगर आयुक्त के नाम पत्र भेजकर शासन स्तर पर विचाराधीन गृहकर नियमावली के प्रकाशन तक औद्योगिक इकाइयों के गृहकर निर्धारण एवं वसूली प्रक्रिया को लंबित रखने को कहा था। लेकिन, इससे भी उद्योगपतियों को राहत नहीं मिल सकी है। उधर, नगर निगम ने कुछ इकाइयों को नोटिस भेजकर टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन स्टाफ के ट्रांसफर और अन्य कारणों से मामला आगे नहीं बढ़ सका है।

‘कानपुर जैसे महानगर में भी अनावासीय संपत्तियों के परिसर के कुल क्षेत्रफल में रिक्त पड़े क्षेत्र का केवल 500 वर्ग मीटर पर ही कर निर्धारण किया जाता है। झांसी की आबादी अभी दस लाख से भी कम है, ऐसे में यहां की औद्योगिक इकाइयों पर इतना अधिक कर अनुचित है।’
- आर के ओमर, जनरल सेक्रेटरी बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री

‘हम उद्योग बंधु के आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। नगर विकास विभाग जो दिशा निर्देश देगा, उस पर अमल किया जाएगा। टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी, ताकि राजस्व की वसूली हो सके।’
- आर सी श्रीवास्तव, अपर नगर आयुक्त नगर निगम


बैठक आज
झांसी। औद्योगिक इकाइयों की विभिन्न समस्याओं के निस्तारण के संबंध में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक आयुक्त सभागार में बृहस्पतिवार को सायं चार बजे से होगी।
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