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मूंगफली ने किसानों को किया निराश

Jhansi

Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
झांसी। देर से हुई बारिश के कारण इस वर्ष मूंगफली की फसल चौपट हो गई है। अबकी लगभग चालीस फीसदी कम पैदावार पैदा हुई है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि मंडी में प्रतिदिन 5 से 7 हजार कुंतल मूंगफली आ रही है, जबकि पिछले साल 10 से 15 हजार कुंतल आवक थी।
किसानों की मानें तो बारिश की देरी के कारण उत्पादन कम हुआ है और फसल भी कमजोर हुई है। पिछले साल मूंगफली के दाने ज्यादा अच्छे थे, लेकिन इस बार पानी की कमी के कारण दाने सूखे हुए हैं। बुआई के समय अगर बारिश अच्छी होती है तो उत्पादन बढ़ जाता है। इससे मूंगफली के दाने भी पुष्ट होेते हैं, लेकिन इस बार प्रकृत िने साथ नहीं दिया। मूंगफली बेचने आए हस्तिनापुर गांव के किसान रमेश राजपुत के अनुसार पिछले साल एक एकड़ खेत में 5 से 6 कुंतल मूंगफली हुई थी, लेकिन इस बार मात्र 3 से 4 कुंतल ही उपज हुई है।
गल्ला मंडी के पूर्व अध्यक्ष उमेश गुप्ता की कहते हैं कि इस साल मूंगफली की आवक काफी कम है। क्वालिटी के मुताबिक 3,500 से 5,000 रुपये प्रति कुंतल की दर से यह बिक रही है।


मूंगफली की खेती घाटे का सौदा
झांसी। अंबावाय के किसान अरुण कुमार के मुताबिक इस वर्ष मूंगफली की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई है। उनकी मानें तो एक एकड़ जमीन के लिए 40 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। उन्होंने 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बीज खरीदा था। यानी, केवल बीज मद में 3,200 रुपये खर्च किए थे। एक एकड़ खेत की निराई व गुड़ाई में 1500 रुपये खर्च हुए, जबकि 700 रुपये की डीएपी व 600 रुपये की यूरिया का इस्तेमाल किया था। पानी कम होने के कारण पंप सेट चलाने में 1,500 रुपये डीजल में खर्च हुए। मूंगफली को उखाड़ने व सूखाने के लिए मजदूरों को 1,500 रुपये देने पड़े। फसल को बाजार तक लाने में मजदूरी व ढुलाई में करीब 2,000 रुपये खर्च हो गए, जबकि एक एकड़ खेत में सिर्फ 3 कुंतल मूंगफली हुई। यह भी सिर्फ 4,000 रुपये प्रति कुंतल की दर से बिकी। कई माह की कड़ी मेहनत और ग्यारह हजार रुपये खर्च करने के बाद उनके हाथ में सिर्फ बारह हजार रुपये आए हैं।

पिछले वर्ष की अपेक्षा 35 से 40 प्रतिशत आवक कम हो रही है।
कैलाश भार्गव
सचिव
राज्य कृषि उत्पाद समिति

अभी सर्वे नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा लगता है कि किसानों की 20 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हुई है।
एम पी भास्कर
जिला कृषि अधिकारी
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