आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

खुशखबरी: किसानों को स्प्रिंकलर सिस्टम पर फिर मिलेगी छूट

Jhansi

Updated Thu, 25 Oct 2012 12:00 PM IST

झांसी। बुंदेलखंड में सिंचाई के लिए वरदान बौछारी सिंचाई (स्प्रिंकलर सिस्टम) के उपकरणों पर एक बार फिर छूट देने की योजना लागू कर दी गई है। मंत्री परिषद से अनुमति मिलने के बाद इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
नहरों से सिंचाई हो या अन्य सतही सिंचाई, पानी खेत तक पहुंचते - पहुंचते 20 से 30 फीसदी तक बरबाद हो जाता है। ढाल होने की स्थिति में खेत में कहीं ज्यादा पानी पहुंच जाता है तो ऊंचाई की ओर पानी की कमी रह जाती है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। पर, स्प्रिंकलर सिस्टम की सिंचाई में पानी का वर्षा की बूंदों की तरह पौधों पर छिड़काव होता है, जिससे पूरे खेत में समान पानी पहुंचता है। खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की काफी कमी है। नहरें सीमित क्षेत्रों में हैं, ऐसे में बौछारी सिंचाई यहां के लिए वरदान है। इस सिस्टम में मुख्य भाग पंप, मुख्य नाली, बगल की नाली, पानी उठाने वाली नाली एवं पानी छिड़कने का फुहारा होता है। नली में दबाव के साथ पंप द्वारा पानी भेजा जाता है, जिससे फुहारा द्वारा पानी का छिड़काव होता है। पानी उठाने वाली नली राइजिंग नली कहलाती है। यह फसल के पौधों से ऊंची रखी जाती है, ताकि पानी फसल के ऊपर गिरे। पानी छिड़कने वाले हेड घूमने वाले होते हैं, जिससे आसपास के सभी पौधों पर वर्षा की भांति समान पानी पहुंचता है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बौछारी सिंचाई में 20 से 25 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। समान पानी मिलने से मृदा में नमी का स्तर समान होता है, जिससे फसल की वृद्धि उचित तरीके से होती है।
पूर्व में स्प्रिंकलर सिस्टम पर शासन से अनुदान मिलता था। इस कारण किसान यह उपकरण खरीदने में काफी रुचि दिखाते थे। लेकिन, पिछले साल से अनुदान बंद कर दिया गया था। इसको लेकर किसान बराबर मांग करते आ रहे थे बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में जहां, पानी की कमी है वहां स्प्रिंकलर सिस्टम पर पुन: अनुदान शुरू किया जाए। इसे देखते हुए मंत्रि परिषद ने फिर से अनुदान योजना को मंजूरी दे दी है। पिछले दिनों आए कृषि उत्पादन आयुक्त ने इस संबंध में मंत्रि परिषद के निर्णय की जानकारी दी थी। कृषि विभाग की मानें तो लघु एवं सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा, जबकि सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गई है। जल्द ही इस संबंध में शासनादेश जारी होने की उम्मीद है। एक माह के अंदर योजना पर अमल शुरू हो जाएगा।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

Film Review: कॉफी विद डी: रोचक विषय की भोंथरी धार

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

क्या फ‌िर से चमकेगा युवराज का बल्ला और क‌िस्मत, जान‌िए क्या होने वाला है आगे

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

BHIM एप के 1.1 करोड़ डाउनलोड, जानिए क्यों बाकी पेमेंट एप से बेहतर

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

कार का अच्छा माइलेज चाहिए तो पढ़ लें ये टिप्स

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

FlashBack : इस हीरोइन ने इंडस्ट्री छोड़ दी पर मां-बहन के रोल नहीं किए, ताउम्र रहीं अकेली

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

Most Read

शिवपाल समर्थकों ने बनाया नया संगठन, नाम जानकर हो जाएंगे हैरान

shivpal supporters created new organization
  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

अखिलेश की सूची में कुछ नाम बदले, कुछ निरस्त, यहां देखें

correction in akhilesh yadav list
  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

बोले राजा भइया- नहीं है गठबंधन की जरूरत, अकेले ही जीत लेंगे चुनाव

there is no need of alliance with congress
  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

खाते में आ गए 49 हजार, निकालने पहुंची तो मैनेजर ने भगाया

49000 come in account without permission of account hoder
  • शनिवार, 14 जनवरी 2017
  • +

बीजेपी को झटका, पूर्व विधायक ने थामा अखिलेश का हाथ

shiv singh chak joins samajwadi party
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

सपा ने गठबंधन में नहीं दी जगह, अब रालोद ने घोषित किए प्रत्याशियों के नाम

RLD declares its candidates for UP election.
  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top