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चना और मटर पर भरोसा जता रहे किसान

Jhansi

Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST

झांसी। किसानों को चना और मटर पर भरोसा है, तभी तो रबी के सीजन में इन्हीं फसलों की बुआई पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कृषि विभाग ने भी कमर कस ली है।
दलहनी फसलों में चना और मटर सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। खासकर बुंदेलखंड में यह फसलें भरपूर बोई जाती हैं। इससे किसानों को फायदा भी खूब होता है। यही वजह है कि कृषि विभाग ने चना के लिए 46587 हेक्टेअर और मटर के लिए 41470 हेक्टेअर क्षेत्रफल में बुआई का लक्ष्य रखा है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो मटर व चना उचित जल निकासी वाली दोमट, बलुई दोमट, मार व पड़वा मिट्टी में काफी उपजाऊ होता है। बुंदेलखंड में मटर की आदर्श आईपीएफ- 99-25, विकास आईपीएफडी-9913, इंद्र केपीएमआर, जेपी 885 और प्रकाश आदि प्रजातियां काफी अच्छा उत्पादन देती हैं। अधिकतम 130- 135 दिनों में तैयार होने वाली यह फसलें 20 से 32 कुंतल प्रति हेक्टेअर तक उत्पादन देती हैं। इसी तरह बुंदेलखंड में चना की राधे व जेजे 16 प्रजातियां काफी उपजाऊ हैं। यह 135 से 150 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं। यदि देर से बुआई करना है तो पूसा-372, उदय और पंतजी-186 प्रजाति लाभदायक रहती है, जो 25 से 30 कुंतल प्रति हेक्टेअर तक उत्पादन देती हैं। जो किसान पलेवा करके बुआई करते हैं, उन्हें प्रति हेक्टेअर 40 किलोग्राम यूरिया जुते खेत में डालकर पलेवा करना चाहिए। इसके अलावा मिट्टी का शोधन करके बुआई करनी चाहिए। मटर की बुआई का समय 15 अक्तूबर से 31 अक्तूबर के बीच रहता है। अगर पलेवा करके देर से बुआई करनी है तो भी 15 नवंबर से पहले बुआई हो जानी चाहिए, अन्यथा फसल कमजोर रहेगी। लगभग यही समय चना की बुआई का है।
कृषि विभाग ने इस बार जिले में 1800 कुंतल चना का बीज और 2000 कुंतल मटर का बीज किसानों को मुहैया कराने का लक्ष्य रखा है। इसमें से विभाग के पास 659 कुंतल चना और 1767 कुंतल मटर उपलब्ध है और किसान इसे खरीद भी रहे हैं। बाकी बीज 25 अक्तूबर के आसपास आने की संभावना है।


दो पानी लगाएं
झांसी। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो चना और मटर की भरपूर पैदावार लेने के लिए पहला पानी 40 से 60 दिन के अंदर फूल आने से पहले लगाएं। दूसरा पानी फली में दाना बनते समय लगाना चाहिए। यदि जाड़े में पानी बरस गया तो समझो किसान चना और मटर की फसल पैदा कर मालामाल हो जाएगा।
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