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नहरों की सफाई का नहीं निकला हल

Jhansi

Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
झांसी। रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आयोजित गोष्ठी में बाकी समस्याओं का भले ही समाधान खोज लिया गया हो, पर नहरों की सिल्ट सफाई को लेकर कोई हल नहीं निकल सका। लिहाजा, रबी उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास अधूरे ही रहे।
कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन के समक्ष लगभग सभी किसानों ने नहरों की सिल्ट की सफाई नहीं होने, नहरों में कटान से पानी और फसल बरबाद होने और पलेवा के लिए नहरों में पानी छोड़ने का समय गलत निर्धारित किए जाने की बात रखी। किसानों का कहना था कि नहरों की सिल्ट साफ करने का जो समय है, वही समय पानी छोड़ने का भी है। ऐसे में सिल्ट सफाई के नाम पर आने वाला पैसा सिर्फ कागजों में खर्च हो जाता है, धरातल पर उसका लाभ नहीं मिल पाता। बिना सिल्ट सफाई के नहरों में पानी छोड़ने से उसे टेल तक पहुंचने में बीस- बीस दिन लग जाते हैं और तब तक बुआई का काम खत्म हो जाता है। इन हालातों में रबी का उत्पादन बढ़ना तो दूर खेतों में बुआई हो जाए तो भी बड़ी बात है। नहरों में जगह- जगह कटान के चलते पानी बेकार बहता रहता है और खेतों में भर जाता है, जिससे वहां फसल पैदा नहीं होती है। माेंठ रजवाहा में तो पानी का इतना ज्यादा ओवरफ्लो हो रहा है कि खेतों में पानी भर जाने से एक हजार एकड़ क्षेत्र में फसल पैदा नहीं होगी। किसानों ने मांग करते हुए कहा कि यदि गर्मियों में नहरों की सफाई करा दी जाए तो अक्तूबर में पलेवा के लिए किसानों को समय पर और पर्याप्त पानी मिल जाएगा। समस्या सुनने के बाद एपीसी ने सिंचाई विभाग के अफसरों से बात की। मुख्य अभियंता बेतवा संतोष कुमार ने कहा कि गर्मियों में सिल्ट साफ करा दी जाएगी तो बरसात में पुन: घास और पौधे उग आएंगे, लिहाजा कोई फायदा नहीं होगा। उन्हाेंने तर्क दिया कि सितंबर के मध्य के बाद तक वर्षा होती रहती है। ऐसे में सिर्फ अक्तूबर का ही समय बचता है, जिसमें सफाई कराई जा सकती है। हालांकि, वह इस बात का उत्तर नहीं दे सके कि आखिर नहरों के टेल तक क्यों सफाई नहीं हो पाती है। उन्होंने कहा कि पलेवा के बाद मोंठ माइनर की सफाई कराई जाएगी। इस पर एपीसी ने माेंठ में ओवरफ्लो की समस्या दूर करने के लिए जिलाधिकारी को स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। लेकिन, सिल्ट सफाई की समस्या जस की तस बनी रही। लाख टके का सवाल यह है कि जब नहरें साफ नहीं हो पाएंगी तो पानी भी सही तरीके से नहीं मिल पाएगा, फिर कैसे पलेवा होगा और कैसे रबी की उत्पादकता बढ़ेगी।

अब 20 अक्तूबर से चलेंगी नहरें
झांसी। सिंचाई विभाग ने जिले की सभी नहरें 30 अक्तूबर से चलाने का रोस्टर तैयार किया था, जिस पर किसानों ने एपीसी की बैठक में आपत्ति जताई। इसी क्रम में देर शाम जिलाधिकारी गौरव दयाल ने सिंचाई विभाग और कृषि विभाग के अफसरों के साथ बैठक कर काश्तकारों के हित में जिले की सभी नहरें 20 अक्तूबर से चलाने के निर्देश दिए।


कतारबद्ध होकर खड़े रहे किसान
झांसी। कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित मंडलीय रबी गोष्ठी में जहां बाकी किसान कुर्सियों पर बैठे थे, वहीं भाजपा नेता जवाहर लाल राजपूत के नेतृत्व में आए दो दर्जन से अधिक किसान सभागार के अंदर कतार में खड़े रहे। उनके हाथ में बैनर भी था, जिस पर लिखा था कि बुंदेलखंड पैकेज के 40 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन किसानों को कोई लाभ नहीं मिला। जिलाधिकारी ने सीडीओ को भेजकर उनसे बात की, लेकिन किसान टस से मस नहीं हुए और पूरे समय इसी तरह खड़े रहकर प्रदर्शन करते रहे।

कीटनाशक से कीड़े नहीं, किसान मर रहे
झांसी। बामौर के किसान सरदार सिंह ने विभाग से मिलने वाले कीटनाशक की गुणवत्ता की पोल अपने ही अंदाज में खोली। उन्होंने कहा कि कंपनियां ऐसी दवा सप्लाई कर रहीं हैं, जिनसे फसल के कीड़े तो नहीं मरते, लेकिन मजबूर किसान उसे खाकर आत्महत्या जरूर कर रहा है। उनकी बात सुनकर कुल पल के लिए सभागार में सन्नाटा खिंच गया।

विभागों ने लगाई प्रदर्शनी
झांसी। मंडलीय रबी गोष्ठी - 2012 के अंतर्गत विभिन्न विभागों ने योजनाओं की जानकारी किसानों को देने के लिए प्रदर्शनी भी लगाई। प्रदर्शनी का शुभारंभ कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन ने फीता काटकर किया। इसके बाद उन्होंने सभी स्टालों का अवलोकन किया। कृषि विभाग के स्टाल पर दवा छिड़काव के लिए नैप सेक स्प्रेयर प्रदर्शित किया गया था। इसकी कीमत 865 रुपये है, लेकिन इस पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसी तरह विभिन्न प्रजातियों के बीज, उस पर मिलने वाले अनुदान और कीटनाशकों की जानकारी दी जा रही थी। क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के स्टाल पर किसानों को बताया जा रहा था कि मृदा परीक्षण का सामान्य शुल्क मात्र सात रुपये है। यदि भूमि में सूक्ष्म तत्वों का परीक्षण कराया जाता है तो 30 रुपये खर्च आएगा। मत्स्य विभाग, पशुपालन विभाग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, खेतान केमिकल्स एवं फर्टिलाइजर्स, यूपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रियल कारपोरेशन लिमिटेड, इफको आदि के स्टालों पर भी किसानोें को विभिन्न योजनाओं की जानकारियां दी गईं। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने भी सरकारी योजनाओं संबंधी पुस्तकों का प्रदर्शन किया।

स्प्रिंकल सैट पर मिलेगा अनुदान
झांसी। कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि मंत्रि परिषद ने स्प्रिंकल सैट पर अनुदान की मंजूरी दे दी है। लघु और सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत और सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

डीएम के साथ बैठक की
झांसी। रबी गोष्ठी के उपरांत कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन ने सर्किट हाउस में झांसी व चित्रकूट धाम मंडल के जिलाधिकारियों व मुख्य विकास अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान रबी तैयारियों के अलावा मनरेगा आदि अन्य योजनाओं पर विचार विमर्श किया गया।
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