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ढील मिलते ही कालेजों ने प्रवेश में कर ली मनमानी

Jhansi

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा तृतीय मेरिट लिस्ट में कालेजों को प्रवेश की छूट देने का फैसला अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। अधिकतर प्राइवेट कालेजों ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए मनमाने प्रवेश लिए। अब योग्य अभ्यर्थी विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सत्र 2012-13 में कालेजों में प्रवेश के लिए आनलाइन व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत विद्यार्थियों से आनलाइन प्रवेश फार्म भराए गए। बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 100 से ज्यादा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए 60 हजार से ज्यादा छात्र- छात्राओं ने फार्म भरा। अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर मेरिट बनाकर कालेजों को भेज दिया गया। साथ ही छात्रों को भी एसएमएस व ईमेल से इसकी सूचना दी गई, ताकि छात्र समय पर प्रवेश ले सकें। पहली मेरिट सूची जारी होने के बाद दूसरी सूची तैयार कर प्रवेश लिए गए। लेकिन, तीसरी मेरिट सूची जारी करने के मामले में विश्वविद्यालय ढीला पड़ गया। विश्वविद्यालय ने सभी कालेजों को स्वयं तृतीय मेरिट सूची तैयार कर प्रवेश लेने को कह दिया। इसका फायदा उठाते हुए कालेजोें ने मनमाने तरीके से तैयार की गई तृतीय मेरिट सूची के आधार पर प्रवेश लिया। इस कारण हजारों की संख्या में योग्य विद्यार्थी प्रवेश से वंचित हो गए हैं। सोमवार को भी दर्जनों की संख्या में विभिन्न कालेजों में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले छात्र कुलसचिव व कुलपति कार्यालय का चक्कर लगाते दिखे। बांदा के एक प्राइवेट कालेज में प्रवेश के लिए पंजीकृत छात्र अवनीश का कहना था कि वह 72 प्रतिशत अंक से पास है, लेकिन उसे प्रवेश न देकर 45 प्रतिशत अंक वालों को प्रवेश दिया गया। इस संबंध में विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी कर ली गई है, अब कुछ नहीं किया जा सकता है।

आरक्षित वर्ग के छात्रों को भी नहीं बख्शा
झांसी। कालेजों पर एससी/ एसटी कोटे की सीटों के प्रवेश में जमकर अनियमितता बरतने का आरोप है। नियम है कि अनुसूचित जाति व जनजाति की सीटों पर अंतिम समय तक प्रवेश नहीं होता है, तो उसे सामान्य वर्ग में कन्वर्ट कर दिया जाए। छात्रों का कहना है कि बहुत से कालेजोें ने अंतिम समय तक एससी- एसटी की सीटों पर प्रवेश नहीं लिया। बाद में उन्होंने इसे सामान्य वर्ग में बदल कर अपने मर्जी के हिसाब से छात्रों को प्रवेश दे दिया। जबकि, छात्रों द्वारा प्रवेश की सूचना मांगे जाने पर वह एससी- एसटी सीटों की सूचना भी नहीं दे रहे हैं।
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