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कभी भी खड़ा हो सकता है रोटी का संकट

Jhansi

Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गर्ल्स हास्टल में रहने वाली पांच सौ बासठ छात्राओं के सामने कभी भी रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। पांच माह से अस्थायी तौर पर मेस चला रहे ठेकेदार ने महंगाई के कारण भोजन आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी है।
विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर में चार गर्ल्स हास्टल हैं। समता छात्रावास में 152, एससी/एसटी पीजी छात्रावास में 120, झलकारीबाई गर्ल्स हास्टल में 248 व ओबीसी छात्रावास में 32 छात्राएं रहतीं हैं। गर्ल्स हास्टल के मेस एकीकृत व्यवस्था के तहत संचालित किये जाते हैं। हास्टल के लिए एक ठेकेदार तय किया जाता है, जो सभी छात्रावासों में भोजन की व्यवस्था करता है। इस वर्ष पांच मई को अनुबंधित ठेकेदार ने महंगाई से परेशान होकर छात्रावास में भोजन की आपूर्ति बंद कर दी। अचानक मेस बंद होने विश्वविद्यालय के अधिकारियों के हाथ- पांव फूलने लगे। आनन- फानन में ब्वायज हास्टल के ठेकेदार से भोजन की व्यवस्था का आग्रह किया गया, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। पांच माह से अस्थायी तौर पर ठेकेदार यहां भोजन की आपूर्ति कर रहा है। लेकिन, बढ़ती महंगाई के कारण इस ठेकेदार ने भी विश्वविद्यालय को मेस बंद करने की चेतावनी दे दी। उसने खाना बनाने से मना कर दिया तो छात्राओं के समक्ष भोजन का संकट पैदा हो जाएगा।

परचेज कमेटी निष्क्रिय
झांसी। मेस में बनने वाले भोजन की क्वालिटी मेंटेन करने के लिए परचेज कमेटी बनाई गई है। इसमें प्रो. सुनील काबिया, प्रो. धीर सिंह, प्रो. रोचना श्रीवास्तव व डा. अशीम अंसारी शामिल हैं, लेकिन शायद ही कभी कमेटी ने भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हों, जबकि छात्राएं खाने की गुणवत्ता को लेकर आए दिन वार्डेन से शिकायत करतीं रहतीं हैं।


एक हजार रुपये में छप्पन भोग
झांसी। गर्ल्स हास्टल के मेस के अनुबंध का नया मूल्य एक हजार रुपये प्रति छात्रा प्रति माह तय किया गया है। यानी, एक हजार रुपये में अनुबंधित ठेकेदार को एक माह तक एक छात्रा को एक दिन में दो बार नाश्ता व दो बार खाना देना है। मैन्यू में चाउमिंग, चिली टोमेटो सास, आलू पराठा, सलाद, सब्जी, चाय, भेलपूरी, पनीर, अंडा करी, फ्रूट रायता, जलेबी, दही, नमकीन, हलवा, कढ़ी, सैंडविच, नींबू आदि दर्जनों आइटम शामिल हैं।


कई बार टेंडर निकालने के बाद भी बेहतर ठेकेदार नहीं मिलने के कारण मेस की व्यवस्था सुचारु नहीं हो पा रही है। इसमें सुधार का प्रयास जारी है।
- प्रो. सुरेश वीर सिंह राणा, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
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