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मुख्यमंत्री जी! जरूरत है आपकी नजर- ए - इनायत की

Jhansi

Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
झांसी।
माननीय मुख्यमंत्री जी,
देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी वीरता के लिए पहचाने जाने वाली महारानी लक्ष्मीबाई की कर्मस्थली और बुंदेलखंड की हृदयस्थली झांसी नगरी में सूबे का निजाम बनने के बाद प्रथम बार आगमन पर आपका स्वागत है। महोदय, आपके आगमन से यहां की जनता जितनी उत्साहित है, उससे कहीं बहुत ज्यादा आशान्वित भी है। कारण , प्राकृतिक सौन्दर्य , ऐतिहासिक धरोहर, पर्यटन की अपार संभावनाएं, पुरा व खनिज संपदा को अपनी कोख में समेटे बुंदेलखंड की धरती के इस उजले पहलू के साथ ही कर्ज, गरीबी, बेरोजगारी और विकास के क्षेत्र में पिछड़ापन इस क्षेत्र का स्याह पहलू भी है। कर्ज से डूबे किसानों की आत्महत्याएं अक्सर समाचार पत्रों के पहले पन्ने पर सुर्खियां पाती रही हैं। ऐसा नहीं कि यहां की समस्याओं से आप वाकिफ नहीं हैं, क्योंकि सत्तानशीं होने से पहले जब आप क्रांति रथ के साथ यहां आए थे , तब यहां की समस्याओं को लेकर मुखर होकर बोले थे।
वैसे तो बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा हो या विकास की गंगा बहाने का वादा, चुनावों के समय हर किसी ने यहां के मेहनतकश लोगों को छला ही है लेकिन अब एक बार फिर आप जैसे दूरदृष्टा, कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले युवा निजाम से उम्मीद की किरणें जगीं हैं। हरि अनंत, हरि कथा अनंता की तरह यहां की समस्याओं का भी अंत नहीं है लेकिन फिर भी कुछ बड़ी समस्याओं और मुद्दों का जिक्र करना सामयिक ही है। उम्मीद है आप निराश नहीं करेंगे.......

ज्वलंत समस्या बना अंडर ब्रिज
शासन की अनदेखी के कारण सीपरी बाजार अंडर ब्रिज पास योजना की फाइल एक साल ग्यारह माह से ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। नवंबर माह 2010 में सीपरी बाजार रेलवे पुल चौड़ीकरण के लिए रेलवे से एनओसी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने रूपरेखा तैयार की थी। रेल प्रशासन ने शुरुआती स्टीमेट, टेंडर व रेलवे बोर्ड तक की प्रक्रिया के लिए कुल अनुमानित लागत बीस करोड़ रुपये की दो प्रतिशत राशि यानी चालीस लाख रुपये प्रदेश शासन से मांगे थे। इसके बाद फाइल को स्वीकृति के लिए शासन के पास भेज दिया गया। लेकिन, अब तक यह राशि रेलवे को उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।

लटकी है पेयजल की महायोजना
कुएं, हैंडपंप और बोरिंग के सहारे प्यास बुझाने को मजबूर नगर की अधिसंख्य आबादी को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए जल निगम ने यूनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम (स्माल एंड मीडियम टाउन) कार्यक्रम के तहत 462 करोड़ के संशोधित प्रोजेक्ट को मार्च 2012 में मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा था। लेकिन अब तक इस पर शासन की मुहर नहीं लग सकी है।

औद्योगिक विकास की जरूरत
बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास के वादे तो खूब किए गए, परंतु यह हकीकत में नहीं बदल पाए। इसकी बानगी बिजौली ग्रोथ सेंटर में देखने को मिलती है। यहां 81 में से 11 इकाइयां ही कार्यरत हैं। बावजूद, इसे फास्ट मूविंग एरिया में डाल रखा है, जिससे यहां उद्योगों की स्थापना के लिए रियायतें भी नहीं मिल पा रहीं हैं। इसे स्लो मूविंग एरिया में रखे जाने की जरूरत है। इससे उद्योग लगेंगे तो लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

महानगर को बी - 2 का दर्जा
कर्मचारी पिछले कई सालों से झांसी महानगर को बी-2 श्रेणी का दर्जा दिए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं। पिछले बसपा के शासन में सपा भी कर्मचारियों की मांग का पुरजोर समर्थन करती थी। चुनाव में बी - 2 का दर्जा दिलाने का सपा ने वादा भी किया था, परंतु अब तक इस दिशा में सपा सरकार ने को पहल नहीं की है।

पर्यटन को बनाएं उद्योग
8.06 करोड़ रुपये की लागत से गढ़मऊ झील के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव पिछले एक साल से शासन के गलियारों में दबा हुआ है। जबकि, बुंदेलखंड में पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित कर यहां की बदहाली को दूर करने की दिशा में पर्यटन विभाग की इस परिकल्पना को मील का पत्थर माना जा रहा है। झांसी में तमाम पर्यटन स्थल होने के बावजूद पर्यटक रेलवे स्टेशन से सीधे मध्य प्रदेश के ओरछा व खुजराहो निकल जाते हैं।


हवाई अड्डे की योजना हवा में
झांसी की हवाई पट्टी को हवाई अड्डे में बदले जाने की दिशा में तकरीबन एक दशक पूर्व कवायद शुरू की गई थी। इस दिशा में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की टीम हवाई पट्टी का निरीक्षण भी कर चुकी है। लेकिन, मामला इससे आगे नहीं बढ़ पाया। जबकि, पर्यटन व औद्योगिक दृष्टि से इसे जरूरी माना जा रहा है।

खनिज संपदा पर माफिया राज
बुंदेलखंड में खनिज संपदा की भरमार है। लेकिन, इस पर माफिया कब्जा जमाए हुए हैं, अवैध खनन जोरों पर जारी है। एक साल पूर्व चुनाव प्रचार के दौरान झांसी आने पर आपने भी खनिज को माफियाओं से मुक्त कराने का वादा किया था। लेकिन, सरकार गठन के छह माह बाद भी इस दिशा में अब तक कोई गंभीर पहल नहीं की गई है।

नहीं मिल पा रहा किसानों को मुआवजा
पहूंज बांध उच्चीकरण, पथरई व लखेरी बांध के डूब क्षेत्र में आने वाली कृषि भूमि के मुआवजे की मांग को लेकर नवंबर 2011 में प्रभावित किसानों के छूटे बालिग परिवारों को भूखंड व अनुकंपा राशि उपलब्ध कराने, मकानों का मुआवजा वर्ष 2011 की दर से देने, छूटी हुई परिसंपत्तियों की माप शीघ्र करने, धार्मिक स्थलों का मुआवजा देने आदि विभागीय समस्याओं के निस्तारण का कार्य पूरा कर रिपोर्ट मंजूरी के लिए शासन को भेजी गई थी। लेकिन किसानों की मांग को अब तक पूरा नहीं किया गया है। इसको लेकर कई बार किसान बड़े आंदोलन कर चुके हैं।
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