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दवा रहने पर भी लौटा रहे मरीजों को

Jhansi

Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। जिला महिला अस्पताल प्रशासन हेपेटाइटिस बी का टीका खत्म होने के बाद भी केंद्रीय भंडार से दवा लेने को तैयार नहीं है। इंजेक्शन लगवाने के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को दवा खत्म होने की बात कह कर उल्टे पांव लौटाया जा रहा है। इस तरह की शिकायत आने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने नाराजगी जताई है।
जानकारी के मुताबिक छह माह पूर्व शासन ने स्वास्थ्य विभाग को हेपेटाइटिस - बी के दस हजार टीके उपलब्ध कराए थे। स्वास्थ्य विभाग के केंद्रीय मेडिकल स्टोर ने महिला अस्पताल को पांच हजार टीके जारी कर शेष टीकों को सुरक्षित रख लिया। महिला अस्पताल प्रशासन ने दो माह तक बच्चों को टीका लगाया। जब टीके समाप्त हो गए तो मरीजों को उल्टे पांव वापस लौटाया जाने लगा, जबकि केंद्रीय स्टोर में पर्याप्त टीके रखे हुए हैं।
गौरतलब है कि हेपेटॉइटिस बी का टीका बूस्टर डोज के रूप में लगता है। प्रथम टीका के बाद दूसरा टीका एक माह बाद व तीसरा टीका छह माह बाद लगाया जाता है। डोज पूरा होने के बाद ही टीका प्रभावी तरीके से असर करता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा टीकाकरण बंद कर देने के कारण उन बच्चों के अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है, जिन्हें पहला टीका लग गया था। उन्हें खुले मार्केट में रुपये खर्च कर टीके लगवाने पड़ रहे हैं।
महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डा. मोहिनी सक्सेना का कहना है कि हेपेटाइटिस बी के टीके समाप्त हो चुके हैं। इसी वजह से मरीजों को लौटाया जा रहा है। दवा उपलब्ध होने के बाद फिर से टीके लगाए जाएंगे।
उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सविता दुबे ने महिला अस्पताल प्रशासन की कारगुजारी पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि केन्द्रीय भंडार में पर्याप्त मात्रा में हेपेटाइटिस बी के टीके होने के बावजूद इसकी मांग नहीं करना आश्चर्यजनक है। महिला अस्पताल के अधिकारी जानबूझ कर डिमांड नहीं कर रहे हैं, ताकि टीकाकरण के बोझिल काम से बच सकें।

क्यों लगता है हेपेटॉइटिस बी का टीका
झांसी। शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीका लगाया जाता है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में छह प्रकार के टीके शामिल किये हैं। इसमें पोलियो, डीपीटी (डिप्थेरिया, परटोसिस, टीटनेस ), खसरा व विटामिन ए की खुराक बच्चों को हर सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क दी जाती है। इसके अलावा भी कई प्रकार के टीके बाजार में उपलब्ध हैं। विगत कुछ सालों में बच्चों में पीलिया व पेट संबंधी दूसरे रोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हेपेटॉइटिस बी के टीके भी नि:शुल्क लगाए जा रहे हैं।
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