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जुलाई की बारिश ने संभाली खरीफ

Jhansi

Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। मानसून की कमजोर शुरुआत से खरीफ फसलों पर संकट के जो बादल मंडरा रहे थे, वे अब छंटते नजर आ रहे हैं। जुलाई के अंतिम दस दिनों ने न केवल पिछले वर्ष के मासिक बारिश के औसत को पार कर लिया, बल्कि 85 फीसदी क्षेत्रफल को आच्छादित कर दिया है। बुआई अभी जारी है और अगले दस दिनों में शत प्रतिशत बुआई के आसार जताए जा रहे हैं।
जिले में वर्ष 2011 के जून माह में 264.32 मिलीमीटर एवं जुलाई में 288.76 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस साल जून में केवल 1.24 मिलीमीटर बारिश हुई। इससे खरीफ फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। जुलाई के पहले बीस दिनों में भी महज 56 मिलीमीटर बारिश होने से खरीफ की बुआई में नुकसान तय माने जाने लगा था। कृषि विभाग ने इस साल खरीफ सीजन में 1,91,577 हेक्टेअर में बुआई का लक्ष्य रखा था, लेकिन बीस जुलाई तक महज 65 फीसदी लक्ष्य ही पूरा हो सका। 25 जुलाई से हुुई झमाझम बारिश ने खेतों में खुशहाली लौटा दी। जुलाई के अंतिम दिनों में औसत बारिश का आंकड़ा पिछले साल की औसत बारिश को पार कर 368.24 मिलीमीटर पर पहुंच गया। इससे किसानों ने खेतों में बची हुई फसलों को बो दिया। अब तक 85 फीसदी खेतों में बुआई हो चुकी है और 1,73,685 हेक्टेअर क्षेत्रफल आच्छादित हो गया है।
जिला कृषि अधिकारी एमपी भास्कर ने बताया कि तिल, अरहर, सोयाबीन, ज्वार जैसी फसलों की बुआई के लिए 15 अगस्त तक का समय बचा है। जिस हिसाब से बुआई चल रही है, इन फसलों से लक्ष्य से ज्यादा बुआई होना तय है। उन्होंने बताया कि इन फसलों का बुआई लक्ष्य बढ़ाए जाने की योजना है।

कौन सी फसल कितनी बोई गई
सांख्यिकी विभाग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार धान 10590 के सापेक्ष 6890 हेक्टेअर में, मक्का 2698 के सापेक्ष 2670 हेक्टेअर में, ज्वार 2624 के सापेक्ष 2660 हेक्टेअर में, बाजरा 29 के सापेक्ष 25 हेक्टेअर में, उरद 55872 के सापेक्ष 47000 हेक्टेअर में, मूंग 10188 के सापेक्ष 9010 हेक्टेअर में, अरहर 3901 के सापेक्ष 3620 हेक्टेअर में, मूंगफली 21424 के सापेक्ष 20130 हेक्टेअर में, सोयाबीन 1370 के सापेक्ष 1400 हेक्टेअर में, तिल 96766 के सापेक्ष 80150 हेक्टेअर में बोई जा चुकी है।

सितंबर में पड़ेगी पानी की जरूरत
क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र की मौसम इकाई के नोडल प्रभारी डा. वीके सिंह ने बताया कि अगस्त के मुकाबले सितंबर में कम से कम 150 से 200 मिलीमीटर बारिश हो गई तो बोई गई फसलों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल जाएगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए जलाशयों पर आश्रित नहीं रहना होगा और जलाशयों का पानी रबी के काम आ जाएगा। उन्होंने कहा कि अगस्त से सितंबर तक बारिश रुक- रुक कर एवं चार पांच दिन के अंतराल में हो तो फायदेमंद है।
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