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जेएसएसवाई का बढ़ा दायरा

Jhansi

Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। स्वास्थ्य विभाग ने जननी शिशु सुरक्षा योजना के दायरे का बढ़ा दिया है। अब प्रतिमाह दस से ज्यादा प्रसव कराने वाले 13 स्वास्थ्य केंद्र व अस्पताल को भी इसमें शामिल किया गया है। वाहनों के साथ अनुबंध प्रक्रिया शुरू हो गई है।
वैसे यह योजना मात्र जिला महिला अस्पताल, बबीना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं मऊरानीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लागू की जानी थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय, लखनऊ से आए नए दिशा निर्देशों के अनुसार जनपद के ऐसे स्वास्थ्य केंद्र जहां प्रतिमाह 10 से ज्यादा प्रसव होते हैं, उन्हें इस योजना में शामिल किया जाना है। निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जनपद के बबीना, मऊरानीपुर, बंगरा, बामौर, गुरसरांय, मोंठ, चिरगांव के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समथर, प्रसव केंद्र समथर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एरच, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सकरार, जिला महिला अस्पताल व महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज को इस योजना में शामिल किया है। उक्त अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर योजना को शुरू किए जाने के लिए वाहनों की अनुबंध प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सविता दुबे का कहना है कि जेएसएसवाई को शीघ्र ही शुरू कर दिया जाएगा।


क्या है जननी शिशु सुरक्षा योजना?
झांसी। जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिला को प्रसव के बाद अस्पताल से घर तक छोड़ने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन वाहन के साथ अनुबंध करता है। साथ ही गर्भवती महिला को दो दिनों तक अस्पताल में रोक कर उसे हर प्रकार की दवा, इलाज, खाना, नाश्ता आदि की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रशासन की होती है। प्रसव के दौरान अगर प्रसूता की स्थिति बिगड़ जाती है तो अस्पताल एंबुलेंस द्वारा उसे किसी बड़े अस्पताल या मेडिकल कालेज में पहुंचाएगा।

मूर्त रूप लेने में दिक्कतें
झांसी। एक साल पूर्व लागू हुई जननी शिशु सुरक्षा योजना अभी तक मूर्त रूप नहीं ले सकी है। पूर्व में यह जिला अस्पताल में शुरू होनी थी। बाद में बबीना स्वास्थ्य केंद्र व मऊरानीपुर स्वास्थ्य केंद्र में भी शुरू करने के निर्देश दिए गए। विगत दिनों शासन ने 13 अस्पतालों को इसमें शामिल करने का आदेश जारी कर दिया। इस योजना को शुरू करने में मुख्य दिक्कत वाहनों के टेंडर को लेकर आती है। ज्यादा खर्च व कम फायदा के कारण अधिकतर वाहन संचालक अस्पताल से अनुबंध को तैयार नहीं होते हैं।
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