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‘विवेक एक्सप्रेस’ ने दी देशभक्ति की प्रेरणा

Jhansi

Updated Fri, 27 Jul 2012 12:00 PM IST
झांसी। ‘आज हमारे देश की आवश्यकता है लोहे की मांसपेशियां और फौलाद के स्नायु तंत्र, ऐसी प्रचंड इच्छाशक्ति जिसे संसार की कोई ताकत न रोक सके, जो समस्त विश्व के रहस्यों की गहराई में जाकर अपने उद्देश्यों को सभी प्रकार से प्राप्त कर सके। इस हेतु समुद्र के तल तक ही क्यों न जाना पड़े या मृत्यु का सामना क्यों न करना पड़े।’ ‘तुम जो कुछ सोचोगे, वही हो जाएगा, यदि तुम अपने को दुर्बल समझोगे, तो दुर्बल हो जाओगे। बलवान सोचोगे तो बलवान बन जाओगे।’ स्वामी विवेकानंद के ऐसे कई महान विचारों को लेकर बृहस्पतिवार को झांसी आई विवेक एक्सप्रेस से दर्शक रूबरू हुए।
स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती पर भारतीय रेल द्वारा संचालित रेल प्रदर्शनी विवेक एक्सप्रेस में स्वामीजी के ऐतिहासिक चित्रों के साथ- साथ उनके विचारों को भी लोगों ने जाना। सुबह साढ़े नौ बजे प्लेटफार्म छह की एमएचबी साइडिंग में प्रदर्शनी के शुभारंभ डीआरएम नवीन चौपड़ा द्वारा करने के बाद इसे देखने के लिए स्कूली बच्चों के साथ- साथ आमलोगों का तांता लगा रहा। पूर्ण वातानुकूलित पांच डिब्बों की इस ट्रेन में दो डिब्बों में स्वामी विवेकानंद के विहंगम चित्रों व विचारों को दर्शाया गया है। प्रदर्शनी में स्वामी जी के बचपन से लेकर अंतिम समय तक की जीवनी को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने जहां- जहां शिक्षा ग्रहण की, उन स्थानों को प्रदर्शित किया गया है। खासकर उनके द्वारा सन् 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन के संदेश को हिंदी व अंग्रेजी में प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में विवेकानंद की बड़ी बहन स्वर्णमई देवी, छोटे भाई महेंद्र नाथ दत्ता व भूपेंद्र नाथ के चित्र भी हैं। यह प्रदर्शनी लोगों को खूब भा रही है। पहले दिन 810 लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस मौके पर दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रिया में स्वामी जी को भारत की अमूल्य धरोहर तो किसी ने महा संगठक की उपाधि दी। इस अवसर पर एडीआरएम ज्योति प्रकाश पांडे, वरिष्ठ मंडल अभियंता नवीन बाबू, जनसंपर्क अधिकारी रवि प्रकाश आदि मौजूद थे। यह ट्रेन 28 जुलाई तक झांसी में रहेगी।
मालूम हो कि तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इस ट्रेन को हावड़ा स्टेशन से 12 जनवरी 2011 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। तब से यह ट्रेन देश के विभिन्न स्टेशनों पर रुककर स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जन - जन तक पहुंचाने का काम कर रही है। इसका समापन 12 जनवरी 2014 को होगा।
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