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छात्र एक और रिजल्ट कई

Jaunpur

Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। छात्र एक और रिजल्ट कई। है न कमाल की बात, यह किया है वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने। विश्वविद्यालय की ओर से इंटरनेट पर डाले गए डिटेल में कुछ अंक हैं और मार्कशीट में अंक कुछ हैं। इंटरनेट वाले अंकपत्र में हर छात्र को तीसरे पेपर के समान ही दूसरे पेपर में अंक दर्ज किए गए। सैंपलिंग के तौर पर अमर उजाला ने कुछ छात्रों के अंकपत्रों की तहकीकात की। बीएससी बायो ग्रुप के छात्रों के साथ कुछ ज्यादा ही हुआ। खासकर बाटनी के अंक में कई बार संशोधन किया गया।
दरअसल मूल्यांकन की गलत रणनीति के चलते सितंबर तक विश्वविद्यालय छात्रों के परिणाम नहीं दे पाया। इधर, छात्र राजनीति सक्रिय हुई तो धरना प्रदर्शन के साथ ईंट पत्थर चलने लगे। छात्रों के दबाव और भरोसे में लेने के चक्कर में आंख मूंदकर परिणाम जारी कर दिए गए। बताया जा रहा है कि संबंधित छात्र के सीएफ (काउंटर फाइल) चेक किए बगैर अंकपत्र मनमाना तैयार कर दिए गए। इतना जरूर सावधानी बरती गई कि इंटरनेट के अंकपत्र पर रिजल्ट इनकंपलीट जरूर लिखा गया। जब अंकपत्र भेजे गए तो पहले के अंकपत्र के सभी अंक ही बदल गए। राज कालेज के बीएससी बायो ग्रुप प्रथम वर्ष के छात्र राहुल कुमार निषाद को बाटनी के तीनों पेपर में पहले क्रमश: 23, 19 और 19 दिए गए। जब विवि ने अंकपत्र दिया तो नंबर 23, 04, 19 हो गए। यानी एक पेपर के अंक 19 से घटकर चार पहुंच गए। इसी तरह नीलेश कुमार प्रजापति को पहले बाटनी में 26, 15, 15 अंक मिले थे और मार्कशीट में नंबर 26, 02, 15 हो गए। छात्रा रंजना जैसवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। रंजना को पहले 21, 18, 18 अंक मिले थे और अंकपत्र में नंबर 21, 09, 18 हो गए। नेहा कुमारी को पहले बाटनी के तीनों पेपर में क्रमश: 21, 15, 15 अंक दिए गए और जब विवि से अंकपत्र मिला तो नंबर 21, 13 और 15 हो गए। दो तरह के अंकपत्र देख छात्र भी भौचक हैं। इन अंकपत्रों से एक बात और साफ होती है कि बाटनी के दूसरे पेपर में फर्जी नंबर दिए गए। अब छात्र पुनर्मूल्यांकन के लिए भटक रहे हैं तो कोई सुनने वाला ही नहीं है। इस नाते भी कि उत्तर पुस्तिकाओं की तलाश कर पाना विवि के गोपनीय विभाग के भी बस की बात नहीं है। परीक्षा नियंत्रक आरएस यादव का कहना है कि कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ है। छात्रों की शिकायत के बाद अंकपत्र दुरुस्त कराए जा रहे हैं।
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