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बच्चों से भरी स्कूल वैन नाले में गिरी

Jaunpur

Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
मड़ियाहूं। मिर्जापुर रोड से सुदनीपुर जा रहे लिंक मार्ग पर सदलपुर गांव के पास बच्चों से भरी स्कूल बस नाले में पलट जाने से तीन बच्चे गंभीर रूप से जख्मी हो गए। घायल बच्चों को सीएचसी पहुंचाया गया। हादसे के तुरंत बाद वैन चालक बच्चों को छोड़ कर भाग निकला। चालक को भागते देख रास्ते से गुजर रहे सुदनीपुर के उमाशंकर यादव तुरंत नाले में कूदे और बच्चों को बाहर निकाला। हादसे के वक्त वैन में 19 बच्चे सवार थे। दुर्घटना की जानकारी होते ही परिजन भी पहुंचे और बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल की ओर भागे। कुछ देर बाद स्कूल पहुंचकर अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे से पहले ही स्कूल संचालक ताला लगाकर भाग निकला। पुलिस के समझाने पर मामला शांत हुआ।
कसबे के दिलावरपुर मोहल्ले में संत साईं कान्वेंट स्कूल है। स्कूल की टाटा मैजिक वैन शुक्रवार सुबह बच्चों को लाने के लिए करीब चार किलोमीटर दूर सुदनीपुर की ओर निकली थी। वैन सुदनीपुर निवासी जोखू यादव चला रहा था। वैन में जगह नहीं होने के बावजूद 19 बच्चों को भूसे की तरह लाद दिया गया। स्कूली बच्चों के मुताबिक सुबह करीब सात बजे जोखू यादव के मोबाइल की घंटी बजी और उसने जैसी ही मोबाइल जेब से निकाला वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे करीब पंद्रह फीट गहरे नाले में चली गई। वैन नाले में पलटने के बजाय करवट हो गई। गाड़ी नाले में गिरते ही चालक जोखू यादव भाग निकला। डरे सहमे बच्चे लगातार चीख रहे थे। पीठ पर हस्ता, हाथ में पानी की बोतल लिए बच्चे जान बचाने के लिए वैन के भीतर ही छटपटा रहे थे। रास्ते से गुजर रहे सुदनीपुर निवासी उमाशंकर यादव ने नजारा देखा तो दंग रह गए। बगैर देर किए तुरंत नाले में कूदे और स्कूल वैन में फंसे सभी 19 बच्चों को बाहर निकाला। सभी के कपड़े, बैग पानी से भीग चुके थे। कुछ देर बाद बच्चों के परिजन भी मौके पर पहुंच गए। अपने-अपने बच्चों को घर लेकर गए। वैन में सवार फैजान (7), सान्य कुमार विश्वास (7), सागर (4), श्रेया वर्मा (5) को गंभीर चोटे आई है। इन बच्चों को सीएचसी से जिला अस्पताल भेजा गया। वैन में शिव शंकर (11), मो. फरीद (12), गुलफाम (10), मो. कैफ (8), नदीम (12), कीर्तन जायसवाल (4), अंतिका वर्मा (7), अभय जायसवाल (6), ध्रुव दुबे (8), निधि दुबे (4), गौरव मौर्या (11), संदेश पांडेय (10), शिवांगी (10), आशुतोष (7), आदित्य कुमार (4) सवार थे।


परिजनों ने स्कूल में किया हंगामा
मड़ियाहूं। हादसे के बाद बच्चों के परिजन दिलावरगंज स्थित स्कूल पहुंच गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल बगैर मान्यता के ही चल रहा है। परिजन यहां फीस वापस करने की मांग कर रहे थे। अभिभावकों के पहुंचने से स्कूल संचालक रमाशंकर जायसवाल कैंपस से निकल भागे। अभिभावक स्कूल संचालक को मौके पर आने की मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस सभी को समझाकर कोतवाली लाई।
अभिभावक जब स्कूल पहुंचे तो बच्चे पढ़ रहे थे और गेट अंदर से बंद था। हंगामे से पहले स्कूल संचालक रमाशंकर जायसवाल अपने घर जमालापुर चले गए और फंस गए स्कूल के शिक्षक।
भीड़ ने गेट पीटना शुरू कर दिया तो स्कूल के शिक्षकों ने बच्चों की दुहाई देते हुए सभी को शांत रहने का अनुरोध किया। कुछ देर बाद कोतवाली के दारोगा गुरु दयाल सिंह पहुंचे और लोगों को समझाकर कोतवाली ले आए। कोतवाली प्रभारी शिवानंद यादव ने स्कूल संचालक रमाशंकर जायसवाल को फोन कर कोतवाली बुलाया। पूछा कि स्कूल बस में कितने बच्चे सवार थे। स्कूल संचालक ने बताया कि 19 बच्चे बैठाए गए थे और क्षमता भी 19 बच्चों की है। उधर, कोतवाली में अभिभावक सुरेश गुप्ता, माया श्ंाकर दुबे, उदय राज मौर्य, अरविंद जायसवाल, नदीम ने कहा कि स्कूल प्रबंधन बच्चों के बैग, कापी किताब, ड्रेस, जूता टाई का इंतजाम करे। स्कूल प्रबंधक रमाशंकर जायसवाल ने भरोसा दिलाया कि सभी 19 बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था स्कूल प्रबंधन करेगा। इसके बाद लोग घर चले गए।

पुलिस ने सभी स्कूलों को जारी की नोटिस
मड़ियाहू। हादसे के बाद कोतवाली पुलिस ने दूसरे स्कूलों को भी नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि बच्चों को ढोने वाले वाहन की क्षमता परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक है या नहीं।

बच्चों के लिए मसीहा बनकर पहुंचे उमाशंकर
हादसे के तुरंत बाद सुदनीपुर के उमाशंकर के राहत एवं बचाव कार्य की सभी ने तारीफ की। उमाशंकर बच्चों के लिए मसीहा बनकर पहुंचे। वैन चालक भाग रहा था और वह नाले में दाखिल हो रहे थे। एक-एक कर बच्चों को निकाला। डरे सहमे रो रहे बच्चों को गोद में उठाकर चुप भी कराया। उमाशंकर की इस बहादुरी की सभी ने तारीफ की।

पुलिस की लापरवाही सामने आई
बच्चों के साथ हो रहे खिलवाड़ में कहीं न कहीं प्रशासनिक लापरवाही भी है। न तो परिवहन विभाग ने कभी चेक किया और न ही पुलिस ने। दोनों की भूमिका पर लोग सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि परिवहन विभाग कागज पर तो इतनी सवारी बैठाने की इजाजत नही देता लेकिन मौखिक ओवरलोडिंग पुलिस और परिवहन विभाग की मिलीभगत से ही होती है।
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