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सूखे की आहट से बढ़ी बेचैनी

Jaunpur

Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। छिटपुट बरसात ने बेचैनी बढ़ा दी है। कहीं पानी गिर रहा है और कहीं उड़ रही है धूल। ऐसी स्थिति से राज्य सरकार भी बेचैन है। कृषि विभाग के साथ राजस्व परिषद लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। साप्ताहिक रिपोर्ट के साथ बरसात के हर रोज के आंकड़े राजस्व परिषद को भेजे जा रहे हैं। इधर, तीन दिनों से बरसात का आंकड़ा शून्य भेजा जा रहा है। दोपहर की धूप ने किसानों को बेचैन कर रखा है। बोए गए बीजों के अंकुरित नहीं होने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कागज पर हरियाली भी दिखाई जा रही है। कृषि विभाग का दावा है कि 70 फीसदी क्षेत्रफल में धान की रोपाई और बुवाई हो चुकी है।
सूखे की आहट से प्रदेश सरकार बेचैन है। औसत से करीब 60 फीसदी कम बरसात ने बेचैनी और बढ़ा दी है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि एक स्थान से बरसात का आंकलन नहीं किया जा सकता। इस बार ऐसी बरसात नहीं हुई जिससे समूचे जिले की स्थिति का आंकलन किया जा सके। बरसात में दो-चार किलोमीटर में अंतर देखा गया है। एक किलोमीटर दूर बरसात हुई तो दूसरे किलोमीटर में सूखा ही रहा। ऐसे मानसूनी बरसात से वास्तविक स्थिति का आंकलन भी नहीं किया जा सकता। इस नाते भी कि बरसात का आंकलन करने वाले मीटर तहसीलों में लगे हैं। यदि तहसीलों में बरसात नहीं हुई तो बरसात का आंकड़ा शून्य समझा जा रहा है। यदि तहसील में बरसात हो गई तो वही बरसात पूरे तहसील क्षेत्र की मान ली जा रही है। इसे आंकड़ेबाजी के सिवा कुछ नहीं कहा जा सकता। प्रशासनिक अफसर भी मान रहे हैं कि इस बार स्थिति दूसरी है। जब तक ग्राम पंचायतवार रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक कुछ कहना मुश्किल है। इसके इतर कृषि विभाग ने दावा किया है कि धान की रोपाई और बुवाई 70 फीसदी क्षेत्रफल में की जा चुकी है। जिले में धान की फसल 139200 हेक्टेयर में की जानी थी और सोमवार तक 83521 हेक्टेयर में धान बोया जा चुका है। इसी तरह उर्द का शत प्रतिशत क्षेत्रफल में बोया गया है। अरहर पचास फीसदी क्षेत्रफल में बोई गई है। दलील दी जा रही है कि अरहर लेट बोई जाती है। जबकि हकीकत यह है कि पहली बरसात में ही अरहर और मक्का बोया जाता रहा है। अभी सूखा तो नहीं माना जा रहा है लेकिन यदि पंद्रह दिनों तक ऐसा ही मौसम रहा तो सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। इस नाते कि बचे क्षेत्रफल में बुवाई नहीं हो पाएगी और बोए गए क्षेत्रफल में फसलें सूखने जैसी स्थिति बन जाएगी। अपर जिलाधिकारी पीके उपाध्याय कहते हैं कि अभी सूखे जैसी स्थिति नहीं है। राजस्व परिषद को साप्ताहिक रिपोर्ट भेजी जा रही है।
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