आपका शहर Close

कालपी दुर्ग अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का नियंत्रण केंद्र था

Jalaun

Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
उरई(जालौन)। 1857 की क्रांति का पहला दौर असफल होने के बाद क्रांतिकारियों ने कालपी के किले को अंग्रेजों के विरुद्ध सुनियोजित क्रांति का प्रमुख केंद्र बनाया था। छह दिसंबर 1857 को कानपुर में मिली करारी शिकस्त ने क्रांतिकारियों को अपनी रणनीति पर पुर्नविचार करने को मजबूर कर दिया। पहले भी कालपी को सुरक्षित स्थान मानकर वहां से क्रांति का बिगुल बजाने की बात चली थी। छह दिसंबर को कानपुर में नाना साहब की पराजय के बाद क्रांतिकारियों ने कालपी आने के बाद नाना साहब, कुंवर सिंह और रानी लक्ष्मीबाई से मंत्रणा के बाद दो जनवरी से कालपी दुर्ग को ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांति का नियंत्रण केंद्र बना दिया।
वक्त बदलने के साथ 1857 की क्रांति का मूक गवाह कालपी का किला बेहद जर्जर हो गया है। देखरेख के अभाव में किले में दरारें आ गई है।
दो जनवरी 1858 को नाना साहब के सेनानायक तात्या टोपे तथा शिविर सहायक मुहम्मद इशहाक ने बुंदेलखंड के समस्त शासकों को व्यक्तिगत पत्र भेजकर उनसे अपनी सेनाएं कालपी कूच करने का अनुरोध किया। इन पत्रों में स्पष्ट कर दिया गया कि संघर्ष देश में जनशांति व सदभाव के लिए किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पेशवा द्वारा किसी राज्य पर कब्जा करना नहीं। अपितु विभिन्न शासकों का शासित क्षेत्र उन्हें दिलाना है ताकि वह शांतिपूर्वक उस पर राज्य कर सकें। मुहम्मद इशहाक ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि ब्रिटिश नियंत्रण के राज्य क्षेत्र बुंदेलखंड के शासकों में क्रांति के सहयोग में उनकी भूमिका के आधार पर सौंप दिए जाएंगे।यह पत्र लेकर पंडित बाबा देवगिरि को विशेष दूत के रुप में भेजा गया। यहीं से सामूहिक क्रांति का नियोजित अभियान प्रारंभ हुआ। तात्या टोपे की अपील जारी होने के बाद उन्होंने कालपी में शस्त्रागार तथा सेना की कमान संभाल ली। जालौन के तहसीलदार नारायणराव को कार्यालय का प्रभारी बनाया गया। नाना साहब पेशवा के भतीजे राव साहब ने स्थायी रुप से कालपी दुर्ग में अपना आवास बना लिया। नाना साहब के भाई बालमभट्ट भी मकर संक्राति के दिन कालपी आ गए। कालपी किले के भूमिगत भाग में आयुध निर्माणी स्थापित कर दी गई। जालौन से आए कसगरों ने शोरा, कोयला तथा मिर्जापुर से प्राप्त गंधक से बारुद बनानी शुरु कर दी। तोपों तथा गोलों की ढलाई व कारतूस बनाना भी शुरु कर दिया। इस प्रकार किले के अंदर भूमिगत शस्त्रागार बनाया गया जो उस समय देश में क्रांतिकारियों का सबसे बड़ा शस्त्रागार माना जाता था।
जिले में अंग्रेजों का प्रवेश रोकने व सीमाओं पर नियंत्रण के लिए जगम्मनपुर से हमीरपुर जाने वाली समस्त नौकाओं को क्रांतिकारियों ने कब्जे में ले लिया। उन्होंनें यमुना घाट व हमीरपुर रोड पर बैटरीज स्थापित कर ली। ब्रिटिश अधिकारियों का मिलीे गुप्तचर सूचना के अनुसार 6 जनवरी को कालपी दुर्ग में 12 तोपों के साथ 3000 क्रांतिकारी एकत्रित थे। इनमें 2000 जिले के कछवाहागढ़ के थे। इन तैयारियों का विवरण फ्रीडम स्ट्रगल इन उत्तर प्रदेश के खंड तीन में मिलता है। कालपी दुर्ग में चल रही तैयारियों का उल्लेख 21 जुलाई 1858 के न्यूयार्क डेली टियून के संपादकीय में फ्रैडरिक ऐंगिल्स ने किया था। मई के मध्य तक कालपी की सेना को छोड़कर उत्तर भारत की समस्विद्रोही टुकड़ियों ने बडे़ पैमाने पर लड़ाई करना छोड़ दिया था। कालपी की सेना ने थोड़े ही समय के अंदर शहर में सैनिक कार्रवाई का केद्र बना लिया। खाने पीने का सामान, बारुद और दूसरी आवश्यक चीजें उनके पास प्रचुरमात्रा में मौजूद थीं। उनके पास तोपें बहुत थीं। यहां तक कि बंदूकें तथा हथियार ढालने और बनाने के कारखाने भी थे।
लविंजकृत सेंट्रल इंडिया के अनुसार सेनानियों ने किले के अंदर मकानों तथा शिविरों का निर्माण किया था। उनके पास साठ हजार पौड बारुद का विशाल भंडार था। इसी बीच मार्च में चरखारी में नाना साहब ने विजय प्राप्त की। अप्रैल में झांसी व 7 मई को कोंच की पराजय के बाद क्रांतिकारी पुन: कालपी में एकत्रित हो गए। सर हूमरोज की सेनाओं ने 20 मई को कालपी को घेर लिया। कानपुर से आने वाली सेना ने गुलौली की ओर से मोचबिंदी कर ली। उसी रात क्रांतिकारियों ने किलाघाट पर यमुना का जल लेकर शपथ ली कि वह रक्त की अंतिम बूंद तक संघर्ष करेंगे तथा अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे। कालपी मेें दो दिन के भीषण संघर्ष के बाद 22 मई को अंग्रेजों की सेना ने कालपी के किले पर कब्जा कर लिया। सभी बचे हुए क्रांतिकारी सुरक्षित मार्ग से गोपालपुरा चले गए। आश्चर्य जनक है हजारों व्यक्ति हताहत हुए किंतु कोई क्रांतिकारी जीवित नहीं पकड़ा जा सका। क्रांतिकारियों ने गोपालपुरा की गढ़ी में अंतिम बार सामूहिक मंत्रणा की तथा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ग्वालियर कूच कर गईं।
जिले में आजादी का बिगुल 1918 में ही बज चुका था। अंग्रेजों ने वादा किया कि यदि प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीयों की मदद से उनकी विजय हो गई तो वह भारत को आजादी दे देंगे।
इसके बाद जिले में प्रथम विश्व युद्ध के लिए रंगरुटों की भर्ती शुरु हुई। असिस्टेंट रिक्रूटमेंट अफसर का दायित्व पं. बेनीमाधव तिवारी व पं. मन्नीलाल पांडेय को सौंपा गया। उरई क्लब के नव निर्मित प्रागंण में भर्ती शुरु हो गई लेकिन विश्वयुद्ध के बाद भी जब अंग्रेजों ने वादा पूरा नहीं किया तो 1920 से असहयोग आंदोलन प्रारंभ कर दिया गया। इसमें दोनों नेताओं के अलावा पं. चतुर्भुज शर्मा, प. गौरीशंकर शुक्ल, रामनारायण अग्रवाल कोंच के अलावा धनराज पालीवाल, का विशेष योगदान था। अधिकतर आंदोलनकारियों केकोंच के होने के कारण 1922 में कोंच में क्रांतिकारियों का सम्मेलन आयोजित किया गया। यहां स्वदेशी स्टोर खोला गया तथा असहयोग प्रेस की स्थापना की गई। यहां से बाबूराम वैश्य तथा ग्याप्रसाद गुप्त रसाल ने निर्भय साप्ताहिक का प्रकाशन किया जो कुछ दिनों में स्वतंत्रता संग्राम सैनिकों का मुख पत्र बन गया।
जिले में आजादी के स्मारक बदहाल और जर्जर है। सरकार की ओर से उनके रखरखाव का कोई इंतजाम नहीं है। चाहे कालपी में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों के नियंत्रण रहे कालपी के किले में स्थित मरहठों के कोषागार का केंद्रीय कक्ष हो। अथवा बिलायां में बरजोर सिंह की गढ़ी, गोपालपुरा का किला हो जहां 1857 में क्रांतिकारियों ने अंतिम बैठक की ।अमीटा की गढ़ी की स्थिति भी दयनीय है। सरकार ने कभी फूटी कौड़ी भी इनके रखरखाव पर खर्च नहीं की। जालौन में ताईबाई की हवेली की भी कभी खबर नहीं ली गई वह जर्जर होकर गिरती जा रही है। इनकी मरम्मत और पुताई तो दूर 15 अगस्त और 26 जनवरी को इन पर रोशनी भी नहीं की जाती। हरचंदपुर स्थित शहीद नगर में स्मारक तत्कालीन विधायक पं. शिव संपत्ति शर्मा के प्रयास से बनवाया गया। इसकी दीवाल छह माह से टूटी पड़ी है। उसका भी कोई पुरसाहाल नहंीं है। आजादीकी लड़ाई के इन गौरवपूर्ण स्थानों के रखरखाव की ओर न तो शासन का ध्यान गया और न किसी सामाजिक संस्था था।

Comments

स्पॉटलाइट

Bigg Boss 11: बंदगी के ऑडिशन का वीडियो लीक, खोल दिये थे लड़कों से जुड़े पर्सनल सीक्रेट

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

सुष्मिता सेन के मिस यूनिवर्स बनते ही बदला था सपना चौधरी का नाम, मां का खुलासा

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

'दीपिका पादुकोण आज जो भी हैं, इस एक्टर की वजह से हैं'

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

B'Day Spl: 20 साल की सुष्मिता सेन के प्यार में सुसाइड करने चला था ये डायरेक्टर

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

RBI ने निकाली 526 पदों के लिए नियुक्तियां, 7 दिसंबर तक करें आवेदन

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

Most Read

 अभिनेता राजपाल की बेटी को आज ब्याहने जाएंगे संदीप, ये होंगी खास बातें

Sandeep will go to marry Rajpal's daughter
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

प्रदेश के अफसरों के लिए मुसीबत बना हुआ है मुख्यमंत्री योगी का ये फरमान...

cm yogi's order become a problem for officers in up
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

पदक विजेता निशानेबाजों का जोरदार स्वागत

पदक विजेता निशानेबाजों का जोरदार स्वागत
  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

महात्मा गांधी को लेकर अनिल विज का विवादित बयान, कांग्रेस पर भी कसा तंज

bjp minister anil vij controversial statement on mahatma gandhi, congress
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

अमाक न्यूज एजेंसी का दावा- IS ने कराया श्रीनगर में आतंकी हमला, घाटी में पहली दस्तक

 Amaq News Agency of Islamic state has reported that IS first attack in the Kashmir
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

कुछ ऐसे होगी सुशील मोदी के बेटे की शादी, ना डीजे होगा ना लजीज खाना

No band baaja baraat and dahej in sushil modi's son wedding
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!