आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

अमीटा में पड़ी थी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की नींव

Jalaun

Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। देश के स्वाधीनता आंदोलन में बुदेलखंड का महत्वपूर्ण योगदान है। क्रांति में झांसी की रानी के संघर्ष तथा अन्य क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथाएं सर्व विदित हैं किंतु यह कम ही लोग जानते हैं कि स्वाधीनता के लिए संघर्ष की नींव 1804 ई. में जालौन जिले के अमीटा गांव में पड़ी थी। यहां पहली बार अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का झंडा वहां के वीर बुंदेलों ने उठाया था।
1802 ई. में बेसिन की संधि के बाद अंग्रेज बुंदेलखंड में शासक के रूप में आए। उन्होंने राजस्व वसूली के अपमानजनक तरीके अपनाए। इसे बुंदेलखंड के स्वाभिमानी जागीरदार ठाकुरों ने बर्दाश्त नहीं किया। इसके खिलाफ बुंदेला विद्रोह की आग अमीटा बिलायां के परमार ठाकुरों ने प्रज्जवलित की। परमारवंश की बारहवीं पीढ़ी ने अमीटा तथा बिलायां में अपने राज्य का संचालन केंद्र बनाया। ये दोनों गांव एट रेलवे स्टेशन के निकट एक दूसरे से दो किलोमीटर की सीधी दूरी पर स्थित हैं। इस परिवार के दीवान जवाहर सिंह ने अंग्रेजों की राजस्व वसूली नीति के खिलाफ निकटवर्ती जमीदारों, जागीरदारों तथा अमीर खां पिंडारी को एक सूत्र में बांधा तथा अंग्रेजों को राजस्व देना बंद कर दिया। अमीर खां पिंडारा का डेरा ग्राम बिलायां के निकट एक जंगल में था जिसका नाम बाद में पिंडारी ग्राम हो गया। अमीर खां अंग्रेजों के विरोधी थे। उनसे गठजोड़ करके इन बुंदेलों ने आंदोलन के नए समीकरण बनाए।
अंग्रेजों ने इस विद्रोह को कुचलने तथा अमीटा-बिलायां की गढ़ी ध्वस्त करने के लिए नौगांव छावनी में नियुक्त सेनानायक फावसैट को समुचित निर्देश दिए। उसने सात कंपनियों तथा तोपखाने की एक टुकड़ी केसाथ 21 मई 1804 को अमीटा की गढ़ी को घेरकर आक्रमण कर दिया। अमीटा के परमार इस अचानक हुई घेराबंदी से विस्मित रह गए। उन्होंने एक और अंग्रेजों को यह झांसा दिया कि वे उनसे संधि कराना चाहते हैं। दूसरी ओर अमीटा खां पिंडारी के पास संदेश भेजकर अंग्रेजों को सबक सिखाने की ठान ली। अमीर खां ने चारों ओर से अमीटा दुर्ग के बाहर पड़ी अंग्रेजी सेना को घेरकर लिया। 22 मई 1804 की सुबह होते होते अंग्रेजी सेना बीच में घिर गई। बाहरी परिधि में पिंंडारी सेना तथा अंदर की ओर से परमार सेना ने ब्रिटिश नेता पर हमले कर दिए। दोनों ओर से भीषण गोलाबारी हुई। इसमें अंग्रेजी सेना परास्त हुई। दो दिन के इस युद्ध में अंग्रेजी सेना की भारी जन धन की क्षति हुई। उसकी भारतीय पद्धति सेना की दो कंपनियां तथा तोपखाना टुकड़ी के पचास गोरे सैनिक मौत के घाट उतार दिए गए। मृतक अंग्रेज अधिकारियों की समाधियां कोंच के सरोजनी नायडू पार्क तथा जल संस्थान के बीच पार्क में अभी भी बनी हैं। इस युद्ध में ब्रिटिश सेना की पराजय का दंड सेनानायक फावसैट को भुगतना पड़ा। उसे हटाकर इंग्लैंड वापस भेज दिया गया।
अमीटा बिलायां संघर्ष के दो विशेष प्रभाव हुए। पहला-इस क्षेत्र में तैनात ब्रिटिश अधिकारियों का मनोबल टूट गया कि जाने कब क्या आफत आ जाए। उन्होंने इस परिवार की गतिविधियों पर निगरानी तेज कर दी। दूसरा यह कि अंग्रेजों की दमनकारी नीतियां से क्षुब्ध इस क्षेत्र के जमींदारों को एक सशक्त नेतृत्व मिल गया। 1857 आते आते अमींटा के सूबाजी परमार तथा बिलायां के बरजोर सिंह के नेतृत्व में वे संगठित हो गए। यहां यह उल्लेख जरूरी है कि जालौन जिला गजेटियर में अमीटां, बिलायां को अमंता मलाया लिखा गया है जो संभवत: उच्चारण दोष के कारण है। यह भी संयोग ही है कि 22 मई 1804 को अंग्रेज बुंदेलखंड में पहली बार परास्त हुए तथा 22 मई 1858 को कालपी पर कब्जा करके अंग्रेजों ने इस अंचल में अपना परचम लहराया। उक्त अमींटा बिलायां परिवार के दीवान बरजोर सिंह बुंदेलखंड के वह महान क्रांतिकारी रहे जिन्होंने सबसे लंबी अवधि तक अंग्रेजों से संघर्ष किया। उन्हें बारबार खदेड़ा, छकाया तथा 1859 के मध्य तक अंग्रेजी सेना की नाक में दम कर दिया।
पहली अप्रैल 1858 को झांसी में पराजय के बाद जब झांसी की रानी ने कालपी की ओर प्रस्थान किया तब उन्होंने मार्ग में बरजोर सिंह से बिलायां में भेंट करना आवश्यक समझा। उनसे भेंट के बाद वे कोंच गईं जहां 7 मई 1858 को भीषण संघर्ष हुआ। 22 मई को कालपी के संघर्ष में भी बरजोर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने गांव गांव संपर्क करने, आर्थिक संसाधन जुटाने, नाना साहब के सेनापति तात्याटोपे तथा जालौन की रानी ताईबाई को मदद करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रानी तथा क्रांतिकारियों के कालपी से गोपालपुरा होकर ग्वालियर की ओर चले जाने के बाद क्रांति के संचालन का भार बरजोर सिंह पर आ गया था। 31 मई 1858 को उनकी बिलायां गढ़ी पर ब्रिटिश सेना ने हमला किया जिसका उन्होंने साहस पूर्वक मुकाबला किया। वे अपने एक विश्वासपात्र मोती गूजर को अपना अस्त्र तथा ध्वज देकर बेतवा की ओर खिसक लिए। अंग्रेज पहले मोती गूजर को ही बरजोर समझ कर उससे युद्ध करते रहे। बाद में सच्चाई पता लगने पर बरजोर सिंह पर दो हजार रुपए का इनाम जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर घोषित किया गया।
दीवान बरजोर सिंह अपने कई हजार आश्वारोहियों के साथ चलते थे। पहले अपने शासकीय पक्षों में ब्रिटिश अधिकारी उन्हें विद्रोही लिखते थे। किंतु बाद में बरजोर सिंह को डाकू कहकर अंग्रेजों ने प्रचारित किया तथा करवाया। उन पर अनेक बार सरकारी खजाने लूटने के मुकदमे दर्ज किए गए। गुरसरांय, मऊ, मिहौैनी तथा सहाव में बरजोर सिंह तथा ब्रिटिश सेना के बीच अनेक झड़पों में लगभग चार सौ क्रांतिकारी शहीद हुए।
प्रभारी कैप्टन बेली ने इंग्लैंड स्थित भारत सचिव को 4 जनवरी 1859 को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि बरजोर सिंह को राजनीतिक विद्रोही के बजाय डाकू मान लिया जाए। अंग्रेज उन्हें पकड़ नहीं सके। सरकारी अभिलेखों में जून 1859 तक उनके जीवित रहने के साक्ष्य मिलते हैं।
इस संबंध में अमीटा के उनके वंशजों ने बताया कि वे जून 1859 में पलेरा (टीकमगढ़) चले गए थे जहां लू लगने से उनकी मृत्यु हुई। इस प्रकार आजादी की यह दीपशिखा सबसे लंबी अवधि तक संघर्ष करके शांत हो गई। बाद में जालौन के जिलाधिकारी एमलाज के प्रयास से 15 अगस्त 1972 को बिलायां में उनका स्मारक चबूतरा बना जो उस वीर बरजोर सिंह की शौर्यगाथा कह रहा है।
अयोध्या प्रसाद गुप्त कुमुद
‘मां तुझे प्रणाम’ पर आज से दो दिवसीय कार्यक्रम
उरई (जालौन)। अमर उजाला के तत्वावधान में स्वाधीनता दिवस के अवसर पर सिटी सेंटर मेें दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें इंफोपार्क ग्रुप तथा साहित्यिक संस्था पहचान के सहयोग से देशभक्ति से ओतप्रोत विभिन्न कार्यक्रम होंगे। यह जानकारी इंफोपार्क ग्रुप के प्रबंधक अभय द्विवेदी व पहचान संस्था के अध्यक्ष गिरधर खरे ने दी।
उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को शाम सात बजे सिटी सेंटर हाल में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा होगा। इसमें जिले व गैर जिले से आमंत्रित 21 कवियों एवं शायरों का सम्मान किया जाएगा। कवियों का सम्मान पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि विजय चौधरी एवं युवजन सभा के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मौखरी करेंगे। 15 अगस्त को शाम 6.30 बजे माहिल तालाब स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया जाएगा। इसके बाद शोभा यात्रा निकलेगी। शोभायात्रा की बग्घी पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रमाशंकर व्यास को बैठाया जाएगा। दूसरी बग्घी पर सेना के शहीदों के परिजनों को बैठाया जाएगा। शोभायात्रा माहिल तालाब से शुरू होकर सिटी सेंटर हाल तक जाएगी।
इससे पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रमाशंकर व्यास मशाल जलाकर युवाओं को सौंपेंगे जिसे लेकर युवा शोभायात्रा के आगे आगे चलेेंगे। इस मौके पर प्रबंधक अभय द्विवेदी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व शहीदों के परिजनों को सम्मानित करेंगे। 7.15 बजे प्रख्यात गायक मिर्जा साबिर बेग, डॉ. वीणा श्रीवास्तव, राजेश निरंजन, शगुफ्ता, संजय दुबे देश भक्ति के गीत प्रस्तुत करेंगे। अंत में जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल सिंह यादव के सौजन्य से प्रसिद्ध आतिशबाज असलम व अकरम की आतिशबाजी का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा।
दूसरी ओर सपा के जिला प्रवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि 15 अगस्त को सपा कार्यालय में सुबह 7.30 बजे ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

amita revolt

स्पॉटलाइट

तीन हफ्ते में मां बनीं सनी लियोन, देंखे बेटी की पहली तस्वीर

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

मानसून में इन तरीकों को अपनाकर पहले से ज्यादा जवां दिखेंगे मर्द

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

अपने आप को फिट रखने के लिए पापा सुनील के इस फंडे को फॉलो करती हैं अथिया

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

महिलाएं प्यार में देती हैं मर्दों को इस वजह से धोखा, रिसर्च में हुआ खुलासा

  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

...तो इन वजहों से महिलाओं का जल्दी बढ़ता है वजन

  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

Most Read

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

शिक्षामंत्री की कुर्सी पर बैठ FB में शेयर की फोटो, वायरल होते ही हिरासत में युवक

police arrested boy sat on minister's chair after uploading pic on FB
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

सीजफायर उल्लंघन पर भारत का पाक को करारा जवाब, कई पोस्ट की तबाह

befeating response to pakistan of CFV many posts destroyed
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

..जब पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच 10 घंटे फंसे रहे दो स्कूलों के 217 बच्चे

more than two hundred children were stucked in pak shelling in school
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017
  • +

जीते रामनाथ कोविंद, उत्तर प्रदेश को मिली खास सौगात

ramnath kovind will be the first president of uttar pradesh
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

तेजस्वी को साबित करनी होगी बेगुनाही, किसी कीमत पर नीतीश नहीं करेंगे समझौता

Tension between Bihar Mahagathbandhan partners jdu and rjd continues
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!