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धन खर्च होने के बाद भी पेयजल योजनाएं अधर में

Jalaun

Updated Sat, 07 Jul 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। स्वजल धारा परियोजना से जुड़ी पेयजल योजनाओं पर धन तो पूरा खर्च हो गया लेकिन आज भी 12 पेयजल योजनाएं अधूरी हैं। अधूरी पेयजल योजनाओं के पीछे जिला विकास कार्यालय के कुप्रबंधन को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। कारण यह है कि आज भी पूर्व प्रधानों की समितियां इन योजनाओं का संचालन कर रही हैं जबकि नियम यह है कि स्वजल धारा की निर्माण कार्यदायी संस्था ग्राम पेयजल स्वच्छता समिति का अध्यक्ष मौजूदा प्रधान ही होना चाहिए।
जिले में स्वजल धारा परियोजना का संचालन वर्ष 2005-6 से हो रहा है। शुुरुआती वर्ष में दस लाख रुपए की लागत से शुरू हुई थी। इसमें अंशदान की राशि सहित 11 लाख रुपए से अधिक धनराशि खर्च कर दी गई। हालत यह है कि पाइप लाइन पूरी तरह जर्जर है। अधूरी पाइप लाइन की वजह से पूरे गांव में पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। वर्ष 2006-7 में जगनेवा पेयजल योजना पर 19 लाख खर्च कर दिए गए। कहने को ढाई हजार मीटर पाइप लाइन पड़ी है लेकिन मौके की हकीकत कुछ और ही बता रही है। आधा अधूरा काम हुआ है। मौजूदा प्रधान को इस पेयजल योजना को संचालित करना चाहिए परंतु पूर्व प्रधान ही इसका संचालन व मेंटीनेंस का धन डकार रहे हैं।
गुढ़ा बेरा स्वजल धारा योजना हथनौरा, रुद्रपुरा की पेयजल योजनाओं पर तो काम की ऐसी स्थिति है कि करीब 40 लाख रुपए की बढ़ी धनराशि खर्च हो गई लेकिन मौके पर काम ही आधा अधूरा है। यहां भी पूर्व प्रधानों का जलवा कायम है। जिला शासी निकाय व सतर्कता निगरानी समिति की बैठकों में कई बार जिला विकास अधिकारी को निर्देश दिए गए कि वह पेयजल योजनाओं की मौके पर जाकर हकीकत देखें और जो पुरानी समितियां योजनाओं का संचालन कर रहीं हैं उनसे पूरा चार्ज नई गठित समितियों को हस्तांतरित कराएं लेकिन इन निर्देशों का अब तक कितना पालन हुआ इसकी हकीकत भी दस्तावेजी सुबूत साफ साफ दर्शा रहे हैं।
स्वजल धारा की मुहम्मदाबाद, ऐरी, चिल्ली, कुसमिलिया पेयजल योजना वैसे तो स्वजल धारा समिति के जिम्मे थीं जिसका आधा ही पैसा खर्च हुआ और नतीजा यह हुआ कि ऐरी रमपुरा, चिल्ली, कुसमिलिया में पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। प्रशासन ने इसे जलसंस्थान के हवाले कर दिया। हालत यह है कि सीमेंट पाइप डाले नहीं गए। वे आज भी नलकूप की बाउंड्री में कैद हैं। जनरेटर जरूर है लेकिन आज तक उसका उपयोग ही नहीं हुआ। स्वजल धारा पेयजल योजना की हकीकत जानने को लखनऊ से आने वाली टीम भी उरई से लौट जाती है। इससे पेयजल योजनाओं की जमीनी हकीकत शासन के सामने आ ही नहीं पाई।
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