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प्रोटीन वाली पंजीरी का ‘दम’, 38 हजार बच्चे कुपोषित

Jalaun

Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का बुरा हाल है। बाल विकास महकमे की प्रोटीनयुक्त पंजीरी खाने के बाद भी करीब 38000 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। ये विभागीय आंकड़े हैं, हकीकत में यह संख्या और भी ज्यादा है। इसी से जाहिर है कि पंजीरी में कितना ‘दम’ है। पंजीरी बेचे जाने के आरोप भी गाहे-बगाहे लगते रहते हैं। कई बार बाजार में बेची गई पंजीरी पकड़ी भी गई है। लोग इसे खरीद कर जानवरों को खिलाते रहे हैं। कई गांववालों का तो यहां तक कहना है कि यह ‘प्रोटीनयुक्त’ पंजीरी खाकर उनके जानवरों का दूध घट गया, इसलिए उन्होंने इसे जानवरों को खिलाना भी बंद कर दिया है। दूसरी ओर धन का आवंटन न होने से आंगनबाड़ी केंद्रों पर मध्यान्ह भोजन योजना भी तीन महीने से ठप पड़ी है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंच रही है इस पंजीरी का हश्र किसी से छिपा नहीं है। इसमें सूंड़ी जैसे कीड़े निकलने से आए दिन हंगामे की खबरें भी जगजाहिर हैं। इसे खाकर बच्चे स्वस्थ होने की बजाय बीमार पड़ रहे हैं। कुपोषण रोकने के लिए दी जाने वाली पंजीरी बच्चों को रोगी बना रही है। पंजीरी में कहने को तो सोयाबीन, मक्का व न जाने कौन कौन से प्रोटीनयुक्त सामग्री होने का दावा किया जाता है लेकिन कुपोषित बच्चों की संख्या पर नजर डालें तो इसकी हकीकत खुद-ब-खुद सामने आ जाती है। नतीजा यह है कि गरीबों के बच्चों को पर्याप्त प्रोटीन न मिलने से वह कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।
सबसे ज्यादा कुपोषण के शिकार बच्चे महेबा में 5589, माधौगढ़ में 6970 व डकोर में 6955 हैं। जिलेभर में 6 महीने तक के 1021 और 6 वर्ष तक के 37942 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर थोड़ी स्थिति मध्यान्ह भोजन योजना से सुधर सकती है लेकिन बीते तीन माह से इस योजना के मद में प्रदेश सरकार से धेला भी नहीं मिला है। इसे केंद्रों के चूल्हे ठंडे पडे़ हैं। अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चे खिलौनों से खेलते मिलते हैं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां विभागीय आंकडे़ पूरे करने में जुटी रहती हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे का कहना है कि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या चाैंकाने वाली कतई नहीं है। कुपोषण की रोेकथाम के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। मध्यान्ह भोजन योजना का धन मिलते ही दोपहर का भोजन बच्चों को खिलाकर उनका कुपोषण दूर किया जाएगा।

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